छत्तीसगढ़ः एक फीसदी वोट पलट सकता है सरकार, आदिवासी सीटें होंगी निर्णायक

बीजेपी और कांग्रेस के बीच मतों का अंतर पिछले विधान सभा चुनाव में एक फीसदी रहा है. यह पलट जाता है तो बाज़ी पलट सकती है.

News18.com
Updated: December 8, 2018, 10:15 PM IST
छत्तीसगढ़ः एक फीसदी वोट पलट सकता है सरकार, आदिवासी सीटें होंगी निर्णायक
बीजेपी और कांग्रेस के बीच मतों का अंतर पिछले विधान सभा चुनाव में एक फीसदी रहा है. यह पलट जाता है तो बाज़ी पलट सकती है.
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Updated: December 8, 2018, 10:15 PM IST
छत्तीसगढ़ चुनावों में एक्ज़िट पोल ने कांग्रेस को बढ़त दी है. माना जा रहा है कि 90 सीटों वाले विधानसभा चुनावों में लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. हालांकि मायावती और जोगी का गठबंधन मुकाबले को त्रिकोणीय कर सकता है.

लेकिन, कांग्रेस की परेशानियां कम होती नहीं दिख रही हैं. चूंकि, 2016 में कांग्रेस ने अजीत जोगी और उनके बेटे को पार्टी से निकाल दिया था इसलिए अब अजीत जोगी कांग्रेस को हराने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.

भले ही एक्ज़िट पोल कुछ भी कह रहा हो लेकिन राज्य का भाग्य तीन बातों से निर्धारित होगा- आदिवासियों का वोट, एससी के वोटों का अजीत जोगी और कांग्रेस के बीच में बंटवारा और बीजेपी से कितना ओबीसी वोट कांग्रेस खींच पाती है.

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एससी और आदिवासी सीटों का महत्त्व-

2013 के चुनावों के दौरान कांग्रेस ने उत्तरी और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में अधिकतर आदिवासी सीटें जीत लीं थीं. कांग्रेस को 29 आदिवासी सीटों में से 18 पर जीत मिली थी. जबकि 2008 में कांग्रेस ने 10 आदिवासी सीटें जीती थीं. 2008 में बीजेपी को अधिकतर आदिवासी सीटें मिली थीं. कांग्रेस की आदिवासी इलाके में बढ़ती हुई पैठ को देखकर कहा जा सकता है कि कांग्रेस फिर से बढ़त बना सकती है.

हालांकि, इस दौरान बीजेपी एससी सीटों को जीतने में सफल रही थी. पार्टी ने 2013 में 10 में से 9 सीटें जीतीं जबकि 2008 में पार्टी सिर्फ पांच सीटें जीत पाई. लेकिन इस बार अजीत जोगी और मायावती के आ जाने से समीकरण बदल गए हैं. जिसकी वजह से बीजेपी को नुकसान हो सकता है.
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इसीलिए बीजेपी ने अपनी पॉलिसी बदलते हुए ओबीसी को लुभाने की कोशिश की है जिसके लिए इस बार 14 और ज्यादा ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और बीजेपी का वोट शेयर दिखाता है कि दोनों के बीच मुकाबला काफी नज़दीकी होगा. 2013 में बीजेपी का वोट शेयर 41 फीसदी था जबकि कांग्रेस को वोट 40 फीसदी वोट मिले थे. यही हाल 2008 में भी था जब बीजेपी को 40 फीसदी वोट मिले थे और कांग्रेस को 39 फीसदी. विश्लेषण से पता चलता है कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोट का ये अंतर लगातार घटा है क्योंकि 2003 में वोटों का अंतर ढाई फीसदी था लेकिन 2013 में ये घटकर 0.75 फीसदी रह गया.



चूंकि बीजेपी पिछले 15 सालों से सत्ता में है इसलिए कहीं न कहीं उसके खिलाफ सत्ता विरोध लहर भी काम करेगी. सिर्फ एक फीसदी वोट इधर से उधर हो जाए तो पासा पलट सकता है.

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 इसके अलावा वो विधानसभा क्षेत्र भी निर्णायक साबित हो सकते हैं जहां पर पिछले विधान सभा चुनाव में जीत का फर्क पांच प्रतिशत से कम था. 2013 में लगभग 31 विधान सभा क्षेत्र ऐसे थे जिसमें जीत का अंतर पांच फीसदी से कम था और 25 विधानसभा क्षेत्र ऐसे थे जिसमें ये अंतर 5 से 10 फीसदी के बीच था.



इसमें ओबीसी वोट काफी महत्तवपूर्ण हो सकता है. अब अगर कांग्रेस रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में ओबीसी वोट खींच पाएगी तो नतीजे इसके पक्ष में हो सकते हैं.

इसके अलावा किसानों के लिए ऋण माफी की घोषणा भी प्रभाव डाल सकती है क्योंकि इनकी भी राज्य में काफी बड़ी संख्या है.
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