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OPINION: कुपोषित होगा या सुपोषित, नया बना जिला पेंड्रा-गौरेला-मरवाही?

News18 Chhattisgarh
Updated: February 11, 2020, 10:52 AM IST
OPINION: कुपोषित होगा या सुपोषित, नया बना जिला पेंड्रा-गौरेला-मरवाही?
सीएम भूपेश बघेल ने नए जिले का शुभारंभ किया.

धन की कमी से जूझती छत्तीसगढ़ सरकार के पास नए जिले के लिए कितना बजट होगा? नए जिले के निर्माण के पीछे एक बड़ा राजनितिक कारण, बिलासपुर जिले से जोगी परिवार के प्रभाव को ख़त्म कर उन्हें इस छोटे जिले तक सीमित करना भी हो सकता है.

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प्रो. अनुपमा सक्सेना
पेंड्रा-गौरेला-मरवाही छत्तीसगढ़ राज्य का नया जिला बन चुका है. मेरे जैसे बहुत से लोगों का अपना गांव रहा है पेंड्रा. निश्चित रूप से सबके साथ मै भी खुश हूं. किन्तु कुछ आशंकाएं भी हैं. यह सही है कि बिलासपुर मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी को देखते हुए नए जिले के निर्माण से क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक सहूलियत तो मिलेगी. किन्तु प्रशासन की नजदीकी कहीं भारी ना पड़ जाये. ऐसा न हो कि वहां अब प्रशासन का साया हर पल दबंग बनकर खड़ा रहे, हर बात के टारगेट दिए जाएं यथा टैक्स वसूली, आरटीओ वसूली, वनोपज टैक्स वसूली, चुंगी नाका, सेल्स टैक्स, प्रोटोकॉल, आदि.

भोले भाले आदिवासी को बेवकूफ न बनाया जाये और प्रशासन टारगेट पूरा करने के लिए आदिवासी का शोषण ना करने लगे और खो न जाएं अमरकंटक की वादियों की हवा, विष्णु भोग चावल की खुशबू ओर साल सागौन के पेड़ों की. धन की कमी से जूझती छत्तीसगढ़ सरकार के पास नए जिले के लिए कितना बजट होगा? यह भी एक यक्ष प्रश्न है. आज ही मेरे एक छात्र ने पूछा कि जिला मुख्यालय अगर गुरुकुल में होगा तो, स्कूल कहां लगेगा?

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अपने परिवार के साथ पूर्व सीएम अजीत जोगी. फाइल फोटो.


जोगी परिवार का प्रभाव
पेंड्रा, गौरेला, मरवाही, कोटा, रतनपुर के कारण पूरा बिलासपुर जिला अजीत जोगी परिवार के प्रभाव वाले क्षेत्र रहे हैं. नए जिले के निर्माण के पीछे एक बड़ा राजनितिक कारण, बिलासपुर जिले से जोगी परिवार के प्रभाव को ख़त्म कर उन्हें इस छोटे जिले तक सीमित करना भी हो सकता है. इस छोटे क्षेत्र में भी, जिले की घोषणा द्वारा जोगी परिवार के प्रभाव को कम करने का उद्देश्य भी हो सकता है. बजट की कमी से जूझती छत्तीसगढ़ सरकार की यह घोषणा, इस राजनीतिक हित पूर्ती को साधने का साधन मात्र बनकर न रह जाये. आश्चर्य की बात यह है कि छत्तीसगढ़ की राजनीती में दूरगामी परिणाम देने वाला यह राजनितिक पक्ष, मीडिया में नए जिले से सम्बंधित चर्चाओं में कहीं नहीं दिखा.

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10 फरवरी को नए जिले का शुभारंभ सीएम भूपेश बघेल ने किया.
कैसे भूल सकते हैं इनका योगदान?
पेंड्रा, गौरेला, मरवाही के विकास में मथुरा प्रसाद दुबे, भंवर सिंह पोर्ते, अजीत जोगी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. मथुरा बाबू विधान पुरुष के नाम से जाने जाते थे, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था और स्वतंत्रता के बाद कोटा विधानसभा का लगातार 7 वर्षों तक प्रतिनिधि रहे. उन्होंने पेंड्रा को शिक्षा का मंदिर बनाया और उनके इस मंदिर का शंखनाद हर साल 11वीं बोर्ड की मेरिट लिस्ट में होता था जब मल्टी परपज़ स्कूल का कोइ न कोई बच्चा उसका हिस्सा बनता था. मथुरा बाबू ने उस जमाने मे पेंड्रा में स्विमिंग पूल बनवाया था जिससे छात्र न केवल अध्ययन करें अपितु अन्य विधा में भी आगे रहे, पेंड्रा स्कूल के अंर्तगत एक बड़े हॉस्टल की भी व्यवस्था की गई थी जो शिक्षा के मंदिर में बाहर से आने वाले छात्रों के लिए आवास की व्यवस्था थी.

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सभा को संबोधित करते पूर्व सीएम अजीत जोगी. फाइल फोटो.


मरवाही की अलग कहानी
स्कूल में ही बागवानी कृषि का पृथक से विभाग था जो छात्रों को कृषि संबंधी सभी आयामो में निपुण करता था. आगे चल कर डॉक्टर भवर सिंह पोर्ते ने कॉलेज खुलवाकर शिक्षा के विकास में योगदान दिया. मथुरा बाबू के बाद पंडित राजेंद्र शुक्ल ने लगातार 25 वर्षों तक इस पेंड्रा गौरेला का विकास किया और गुरुकुल नए विद्यालय की स्थापना करवाई. साथ ही 100 बिस्तर का अस्पताल का प्रारंभ किया. वहीं मरवाही अपनी अलग ही कहानी गढ़ रहा था. उसने छत्तीसगढ़ का प्रथम मुख्यमंत्री प्रदेश को अजीत जोगी की रूप में दिया. जोगी जी ने उस सम्पूर्ण पेंड्रा गौरेला मरवाही का विकास की गंगा बहा दी. आज भी उनकी बनवाई पेंड्रा से मरवाही तक कि सड़क उस विकास गाथा को प्रमाणित करती नजर आती है, आज भी पेंड्रा गौरेला मरवाही में रोड के ऊपर चलते ट्रैक्टर उस विकास को याद करते हैं.

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नए जिला के शुभारंभ कार्यक्रम में पहुंची जनता.


..तो प्रशासनिक कुशलता बढ़ेगी
माना जाता है कि कम जनसंख्या, प्रशासनिक कुशलता को बढ़ाती है। छत्तीसगढ़ में में प्रति वर्ग किलोमीटर जनसँख्या का घनत्व 189 है. जोकि देश के औसत 382 से काफी कम है. नए बने जिले पेंड्रा, गौरेला, मरवाही की जनसंख्या 3 लाख 36 हजार 4 सौ 20 है और क्षेत्रफल 1978 वर्ग किलोमीटर है. इस प्रकार नए जिले में प्रति वर्ग किलोमीटर जनसंख्या का घनत्व 170 होगा जो राज्य के औसत से कम है. 2011 में देश में प्रति जिले की औसत जनसंख्या 10.90 लाख थी. सबसे ज्यादा जनसंख्या मुंबई के ठाणे जिले की थी 110.10 लाख और सबसे कम जनसंख्या अरुणाचंल प्रदेश के देबांग वैली जिले की थी 8000. इस प्रकार नए बने जिले की जनसंख्या 3 लाख 36 हजार 420 राष्ट्रीय औसत से काफी कम है.

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जनता से मिलते सीएम भूपेश बघेल. फाइल फोटो.


राजनीति उद्देश्यों के साथ विकास भी होगा?
किन्तु आकंड़ो में प्रशासनिक कुशलता के सभी सकारात्मक पक्ष होने का प्रभाव आगे आने वाले दिनों में सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, आवेदनों के तेजी से निबटारे, अपराधों में कमी, आदि आंकड़ों में दिखना चाहिए. उम्मीद है कि राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के साथ साथ सरकार और प्रशासन इस क्षेत्र के विकास के लिए भी पूरा तत्पर रहेगा.

(लेखिका गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में राजनीति विभाग की प्रोफेसर हैं और सामाजिक व राजनीतिक मामलों में अपने स्वतंत्र विचार के लिए जानी जाती हैं. ये उनके निजी विचार हैं.)

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First published: February 11, 2020, 10:46 AM IST
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