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निकाय चुनाव: प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टियां असमंजस में, युवा चेहरों पर लग सकता है दांव

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: October 22, 2019, 3:05 PM IST
निकाय चुनाव: प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टियां असमंजस में, युवा चेहरों पर लग सकता है दांव
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मालूम हो कि दंतेवाड़ा और चित्रकोट चुनाव संपन्न होते ही राजनीतिक दल निकाय चुनाव में जीत की रणनीति बनाने में जुट गई है. यहीं वजह है कि चाहे कांग्रेस की हो या बीजेपी या फिर जोगी कांग्रेस, सभी दलों में मंथन का दौर जारी है.

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रायपुर.  चित्रकोट चुनाव में मतदान कार्य खत्म होते ही राजनीति दल निकाय चुनाव (Urban Body Election) की तैयारियों में जुट गई है. कहा जा रहा है कि चाहे सत्ताधारी दल कांग्रेस (Congress) हो या फिर विपक्षीय दल बीजेपी, दोनों ही युवा चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी में है. तो वहीं जोगी कांग्रेस अनुभव के साथ युवा को मौका देने की बात कह रही है. मालूम हो कि दंतेवाड़ा (Dantewada) और चित्रकोट (Chitrkote) चुनाव संपन्न होते ही राजनीतिक दल निकाय चुनाव में जीत की रणनीति बनाने में जुट गई है. यहीं वजह है कि चाहे कांग्रेस की हो या बीजेपी या फिर जोगी कांग्रेस, सभी दलों में मंथन का दौर जारी है.

युवाओं को मिल सकता है मौका

निकाय चुनाव में जीत के फैक्टर के लिए सबसे अहम प्रत्याशी चयन पर राजनीतिक दल असमंजस की स्थिति में दिखाई दे रही है. इसे लेकर चर्चा छिड़ गई है कि निकाय चुनाव में युवाओं को मौका मिलेगा या अनुभवी को प्राथमिकता दी जाएगी. इस मसले पर बीजेपी प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का कहना है कि सामान्य तौर पर निकाय चुनाव में मिले-जुले चेहरे होते हैं. निकाय चुनाव कार्यकर्ताओं का चुनाव कहा जाता है. युवाओं के साथ परिषद को चलाने में कुछ अनुभवी चेहरों की भी जरूरत होती है. तो वहीं जोगी कांग्रेस प्रवक्ता इकबाल रिजवी का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में काम किए हुए व्यक्ति को मौका मिलना चाहिए.

कांग्रेस ने कही ये बात

बीजेपी और जोगी कांग्रेस तो युवा के साथ अनुभव पर ध्यान दे रही है. मगर सत्ताधारी दल की ओर से वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंहदेव की मानें तो कांग्रेस केवल और केवल जीतने योग्य चेहरे पर ही दांव लगाएगी. तो वहीं राजनीति के जानकार का मानना हैं कि राजनीति में नई पौध तैयारी होनी चाहिए. निकाय चुनाव बेहद ही स्थानीय स्तर का चुनाव माना जाता है. यही वजह है कि जमीनी कार्यकर्ताओं को इस में अधिक से अधिक मौका दिया जाता है. मगर 15 सालों बाद सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब यह चर्चा तेज हो गई है कि पुराने ढ़र्रे पर ही प्रत्याशी चयन होंगे या नए चेहरे के साथ राजनीतिक दल मैदान में जाएगी.

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First published: October 22, 2019, 3:02 PM IST
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