छत्तीसगढ़ में राजनीतिक पार्टियों ने दलितों को बनाया अपना चुनावी मुद्दा

छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस और बीजेपी के उम्मीदवारों के नाम तय होने के बाद एससी वर्ग की खाली हुई सीट के लिए सामान्य वर्ग के लिए सरोज पांडेय और कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग के लेखराम साहू को उम्मीदवार बनाया है. दोनों ही राजनीतिक पार्टियां एससी वर्ग का हिमायती बताने में बिलकुल भी पीछे नहीं हैं.

Surendra Singh | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 13, 2018, 2:02 PM IST
छत्तीसगढ़ में राजनीतिक पार्टियों ने दलितों को बनाया अपना चुनावी मुद्दा
राजनीति विश्लेषक सुनील कुमार
Surendra Singh | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 13, 2018, 2:02 PM IST
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक तरफ राजनीतिक पार्टियां खुद को एससी वर्ग का हितैषी बताती हैं और उनके पक्ष में खड़े होने का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर जब उनको उच्च स्तर की राजनीति में एससी वर्ग को नेतृत्व देने की बात आती है तो उनके साथ छलावा किया जाता है.

दरअसल, छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस और बीजेपी के उम्मीदवारों के नाम तय होने के बाद एससी वर्ग की खाली हुई सीट के लिए सामान्य वर्ग के लिए सरोज पांडेय और कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग के लेखराम साहू को उम्मीदवार बनाया है. दोनों ही राजनीतिक पार्टियां एससी वर्ग का हिमायती बताने में बिलकुल भी पीछे नहीं हैं. क्योंकि प्रदेश में एससी वर्ग के लिए आरक्षित 10 विधानसभा की सीटों में 10 में से 9 सीटों पर बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के पास है. बता दें कि साल 2013 के विधानसभा चुनाव में एससी वर्ग ने अहम भूमिका निभाई थी.

बीजेपी भलीभांति जानती है कि इस वर्ग को नाराज करना राजनीतिक तौर पर ठीक नहीं होगा. इसलिए एससी वर्ग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की बात कह रही है. वहीं राजनीति विश्लेषक सुनील कुमार मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी इसे आगामी चुनाव में अपना बड़ा मुद्दा बना सकती हैं, लेकिन इस तरह के मुद्दे चलने वाले नहीं हैं. हालांकि बीजेपी और कांग्रेस का एससी वर्ग के लिए प्रेम दिखाई नहीं देता है, लेकिन एससी वर्ग को साधने के लिए दोनों राजनीतिक पार्टियां अपना प्रेम जरूर दिखा रही हैं. बता दें कि राज्यसभा के लिए दोनों ही राजनीतिक पार्टियों ने एससी वर्ग को कोई तवज्जो नहीं दी है.

 
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर