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किसानों के खेत में चुनावी फसल तैयार करना चाह रहे राजनीतिक दल!

किसानों के खेत में चुनावी फसल तैयार करना चाह रहे राजनीतिक दल!

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

छत्तीसगढ़ में किसानों को लेकर राजनीति का खेल एक बार फिर से शुरू हो गया है.

छत्तीसगढ़ में किसानों को लेकर राजनीति का खेल एक बार फिर से शुरू हो गया है. सत्तारुढ़ पार्टी भाजपा किसानों के लिए धान बोनस देकर उन्हें लुभाने की कोशिश कर रही है तो वहीं कांग्रेस पार्टी भी किसानों के मुद्दे लगातार उठाकर अपने आप को आगे रखने की कवायद कर रही है. छत्तीसगढ़ राज्य किसान प्रधान राज्य है और इस राज्य को धान का कटोरा भी कहा जाता है, लेकिन धान का कटोरा होने के बावजूद भी यहां के किसान राजनेताओं के वायदों के जाल में फस रहे हैं.

सूबे की सत्तारुढ़ पार्टी भाजपा ने जो घोषणा की थी, उसको पूरा नहीं किया है. भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में हर साल 2100 रुपए धान समर्थन मूल्य और 300 रुपए बोनस देने की बात कही थी, लेकिन उसको पूरा नहीं कर पा रही है. कांग्रेस इस बार मिशन 2018 को फतेह करके किसानों को बोनस की राशि दोगुनी देने का वायदा जरुर कर रही है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि भाजपा सरकार किसानों के साथ छलावा कर रही है. किसानों से किए वायदे भी पूरा नहीं कर पा रही है. भाजपा की नीतियों से किसान परेशान हैं.

किसानों के मामले में सीएम डॉ. रमन सिंह ने कांग्रेस पर तंज कसा है. सीएम डॉ. सिंह का कहना है कि कांग्रेस वो दुकान है, जो पिछले 15 साल से नहीं खुली.
ऐसे में कितना महंगा ही बोर्ड क्यों न लगा लें, कोई फर्क नहीं पड़ता. सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार इस साल 24 सौ करोड़ रुपये का धान बोनस किसानों को दे रही है. पिछले साल भी बोनस दिया गया था.

बसपा विधायक केशव चन्द्रा का कहना है कि किसानों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए हर राजनीतिक दल तैयार तो हैं, लेकिन नेताओं की तैयारी सिर्फ सदन तक ही रह जाती है. सदन के बाहर आने के बाद किसानों के मुद्दें जस के तस ही रह जाते हैं. कांग्रेस विधायक अमरजीत भगत का कहना है कि कांग्रेस हर मोर्चे पर किसानों के हक में खड़ी है. सरकार कांग्रेस के दबाव में ही किसानों को बोनस दे रही है.

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वहीं चौथी बार सत्ता का सपना देख रही सत्तारुढ़ पार्टी भाजपा खुद को किसानों का सबसे बड़ा हितैशी करार दे रही है. सीएम डॉ. रमन सिंह का कहना है कि इस बार किसानों को बोनस की राशि प्रति क्विंटल 2050 और 2070 के हिसाब से मिलेगी. बता दें कि 11 व 12 सितंबर को विधानसभा के दो दिनों के विशेष सत्र में हर राजनीतिक दल किसानों का परम हितैशी बनने की होड़ में थी. चुनावी साल में दल किसानों के खेत में अपनी राजनीतिक फसल उगाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन यह तो आने वाला समय ही तय करेगा कि किसान किसे सत्ता ताज पहनाते हैं और किसे बाहर का रास्ता दिखाते हैं.

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Tags: All India Congress Committee, Assembly Elections 2018, Chhattisgarh news

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