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हाथियों के इलाके में बन रहा रेल कॉरिडोर, बढ़ा जान जाने का खतरा

हाथियों के इलाके में बन रहा रेल कॉरिडोर, बढ़ा जान जाने का खतरा

वन विभाग लगातार  लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है. (Demo PIc)

वन विभाग लगातार लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है. (Demo PIc)

विकास की गति तेज तो हुई वहीं अतिक्रमण का भी पैमाना बढ़ गया है. जंगलों में आवाजाही ही नहीं बढ़ी बल्कि भवन से लेकर उद्योगों की चिमनियां भी दिखाई देती है.

रायपुर. विकास की गति तेज तो हुई वहीं अतिक्रमण का भी पैमाना बढ़ गया है. जंगलों में आवाजाही ही नहीं बढ़ी बल्कि भवन से लेकर उद्योगों की चिमनियां भी दिखाई देती है. विलुप्त प्राय जीव जंगलों से गांव शहर तक आ रहे हैं. नव निर्माणाधीन रेल कॉरीडोर के रेल ट्रेक पर अब हाथियों को देखा जा रहा है. वन्य प्रेमियों को यह आशंका सता रही है कि कहीं हाथी की मौत रेल दुर्घटनाओं से ना हो जाए. छत्तीसगढ़ 44 फिसदी वनों से घिरा है. यहां के जंगलों में विलुप्त प्राय जीवों की संख्या अच्छी खासी है.

हाथियों मे प्रदेश के जंगलों को बसेरा बना लिया है. कोल माइंस क्षेत्रों के लिए भूपदेवपुर से लेकर रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ तक रेल कॉरीडोर बिछानें का कार्य चल रहा है. इसी क्षेत्र में हाथीयों का डेरा है. अब हाथी दिन हो या रात रेल ट्रेक पर आ रहे हैं. ऐसा इस लिए हो रहा है क्योंकि यह हाथियों का पुराना आने जानें का मार्ग है. ओडिशा से हाथी आकर कोरबा के जंगलों में इसी मार्ग से जीतें है.

पासिंग पुल में भरा पानी
रेल कॉरीडोर भी हाथियों के कॉरीडोर के रुम में जाना जाता है. धरमजयगढ़ के बायसीकालोनी क्षेत्र में सबसे अधिक हाथियों के हमले दर्ज है. रेल कॉरीडोर के निर्माण के पूर्व मार्ग पर 15 पासिंग पुल बनानें का प्रस्ताव भेजा गया था मगर पांच पुल ही बने हैं. इन पुलों में पानी भरा हुआ है. हाथी इन पासिंग पुल का उपयोग नहीं कर रहे हैं और ट्रेक से आ-जा रहे हैं. यहीं चिंता का विषय भी है जब भविष्य में रेल गाड़ियां पटरियों पर दोड़ेगी तो दुर्घटनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता.

मामला एनजीटी में
वन्य जीवों के लिए काम करनें वाले सामाजिक कार्यकर्ता सजल मधु ने बताया कि रेल कॉरीडोर निर्माण में जिस तरह खामियां हैं. पासिंग पुल कम बनाया गया इन मुद्दों को लेकर एनजीटी में मामला दायर किया गया है. इस तरह ट्रेक पर हाथी का आना चिंता का विषय है. एक रिपोर्ट के मुताबिक रायगढ़ जिले में बीते 11 वर्षों में 51 हाथियों की अलग अलग कारणों से मौत हो चुकी है. वहीं 129 लोगों को हाथियों को मौत के घाट उतार दिया है, जिसमें एक चीनी इंजीनियर जहांग कीटाऊ भी हैं. 10 हजार से अधिक किसानों को हाथियों से हुए हमले फसलों के नुकसान को लेकर मुआवजा दिया गया है.

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Tags: Chhattisgarh news, Elephants are reaching the village

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