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पांच साल में एड्स की बीमारी से छत्तीसगढ़ में 3051 मौतें
Raipur News in Hindi

Mamta Lanjewar | News18 Chhattisgarh
Updated: July 4, 2018, 5:00 PM IST
पांच साल में एड्स की बीमारी से छत्तीसगढ़ में 3051 मौतें
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छत्तीसगढ़ में भले ही एचआईवी एड्स की रोक थाम को लेकर करोड़ों रुपयों की योजनाएं चलाई जा रही हैं.

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छत्तीसगढ़ में भले ही एचआईवी एड्स की रोक थाम को लेकर करोड़ों रुपयों की योजनाएं चलाई जा रही हैं. वहीं इससे होने वाली मौतों के राज्य में आंकड़े बेहद भयावह हैं. वहीं खुद स्वास्थ्यमंत्री ने जब इस संबध में जवाब दिया है तो इसके बाद ना केवल यह सरकार के प्रयासों पर सवाल उठाता है. बल्की विपक्ष ने सरकार को इसके लिए जिम्मेदार भी ठहराया है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के पूछे गये एक सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ने जो बताया है, उसके बाद एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं सवालों के घेरे में हैं.

नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ने बताया कि राज्य में पिछले 5 सालों में एड्स से करीब 3051 लोगों की मौत हुई है. गंभीर बात यह भी है कि पिछले तीन महीने में 176 लोगों की जान एड्स से गयी है. पिछले पांच सालों के आंकड़ों को देखें तो पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 में ही 703 एड्स पीड़ित लोगों की मौत हो गयी थी. वहीं स्वाईन फ्लू से पिछले चार सालों में 121 लोगों ने दम तोड़ दिया.

2017-18 में तो 67 लोगों की मौत स्वाइन फ्लू से हुई थी. वहीं डायरिया से पांच सालों में 298 मौतें हुई.
मलेरिया को लेकर तमाम दावों के बीच पिछले 5 सालों में 284 मौतें हुई हैं. सर्वाधिक मौत पिछले साल हुई, जिसमें करीब 62 जानें मच्छरों के काटने से गई. पांच सालों में छत्तीसगढ़ में पीलिया से 94 जानें गयी हैं. वहीं अन्य संक्रामक बीमारियों से मौतों का आंकड़ा भी डरावना है.

प्रदेश में पिछले पांच सालों में 6224 मौतें अलग-अलग संक्रामक बीमारियों जैसे टीबी आदि से हुई है है. ये और बात है कि जहां हर साल मौत का सिलसिला 1500 के करीब हुआ करता था. पिछले साल ये आंकड़ा सिर्फ 614 ही रहा. वहीं विशेषज्ञ एवं कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के डॉ राकेश गुप्ता का कहना है कि सरकार का आधा अधूरा प्रयास इसके लिए जिम्मेदार है.



जाहिर तौर पर इन आंकडो़ं को देखकर राज्य के आम लोगों को भी गौर करना चाहिए कि राज्य में बेफिजूल की साज सज्जा के लिए खर्च जरूरी है या सुचारू स्वास्थ्य व्यवस्था. आंकड़े साबित करते हैं कि राज्य के डॉक्टर मुखिया को व्यवस्था में कसावट लाने की जरूरत है. क्योंकि डॉक्टर होने के नाते वो बेहतर तरीके से स्वास्थ्य व्यवस्था लचरता को टटोल सकते हैं. सवाल यह है कि अब क्या यह उनकी प्राथमिकता में होगा.

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First published: July 4, 2018, 5:00 PM IST
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