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रायपुर: 9 में से 6 विधानसभा में कांग्रेसी विधायक, फिर भी लोकसभा में मिली करारी हार

कांग्रेस के समर्थक.

कांग्रेस के समर्थक.

छत्तीसगढ़ की रायपुर लोकसभा सीट से सत्ताधारी दल कांग्रेस की करारी हार ने पार्टी के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

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छत्तीसगढ़ की रायपुर लोकसभा सीट से सत्ताधारी दल कांग्रेस की करारी हार ने पार्टी के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल है कि राज्य में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने के बाद भी आखिरकार राजधानी की सीट पर कैसे करारी हार हुई. इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद दुबे को बीजेपी प्रत्याशी सुनील सोनी से 3 लाख 44 हजार से अधिक वोटों से हार का समाना पड़ा.

9 विधानसभा क्षेत्र वाले रायपुर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के 6 विधायक काबिज हैं, जो चंद माह पहले ही भारी मतों से जीत कर विधानसभा तक पहुंचे हैं, लेकिन इन 6 सीटों सहित सभी 9 विधानसभा सीटों पर बीजेपी की बंपर जीत ने कांग्रेस के सारे समिकरण को ध्वस्त कर दिया. रायपुर के रण में बीजेपी ने बाजी मारी. पूर्व महापौर ने वर्तमान महापौर को करारी शिकस्त दी. यह आजादी के बाद रायपुर में बीजेपी की सबसे बड़ी जीत थी.

लोकसभा लोकसभा में विधानसभा वार नतिजों पर एक नजर डालें तो रायपुर ग्रामीण से प्रमोद दुबे को 51021 और सुनील सोनी को 114655 मत मिले. यहां वोटों का अंतर 63634 था. रायपुर पश्चिम से प्रमोद दुबे को 41385 और सुनील सोनी को 100942 म​त मिले. अंतर 59557 रहा. रायपुर दक्षिण से कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद को 47267 और बीजेपी प्रत्याशी को 98842 वोट मिले. अतर 51575 रहा. धरसींवा से कांग्रेस को 49902, बीजेपी को 100677 वोट मिले. बलौदाबाजार में कांग्रेस को 65923 और बीजेपी 109144, रायपुर उत्तर से कांग्रेस को 38884 और बीजेपी को 71213, आरंग से कांग्रेस को 58376 और बीजेपी को 82128 मत, अभनपुर से कांग्रेस को 61278 और बीजेपी को 83879 मत, भाटापारा से कांग्रेस को 74479 और बीजेपी को 74731 वोट मिले.

आकड़े बताने के लिए काफी हैं कि कांग्रेस ने भले ही चुनाव में साम-दाम-दंड-भेद जैसे तमाम तथ्यों का प्रयोग किया हो, मगर जनता जनार्दन ने विधानसभा दर विधानसभा कांग्रेस को कैसे सिरे से नकार दिया. जबकि चंद माह पहले ही सत्ताधारी दल कांग्रेस ने रायपुर दक्षिण, भाटापारा और बलौदबाजार के अलावा अन्य 6 सीटों पर बंपर जीत दर्ज की थी. अब इस हार के बाद कांग्रेस मंथन करने की बात कह रही है तो वहीं राजनीति के जानकार इसे कांग्रेस की असफलता करार दे रहे हैं.

राज्य सरकार में मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिव डहरिया का कहना है कि जनता के जनादेश का सम्मान है. कांग्रेस को मिली हार की समीक्षा की जाएगी. मंत्री टीएस सिंहदेव का भी कहना है कि इस हार की समीक्षा पार्टी स्तर पर दी जाएगी. राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार बाबूलाल शर्मा कहते हैं कि राज्य में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस ने मुख्य वायदों को पूरा करने की कोशिश की है, लेकिन इस बात की समीक्षा करनी चाहिए कि क्रियान्यवन में कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई.
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