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राजनीतिक दलों के लिए आखिर कितना महत्वपूर्ण है छत्तीसगढ़ का मैदान

राजनीतिक दलों के लिए आखिर कितना महत्वपूर्ण है छत्तीसगढ़ का मैदान

सांकेतिक चित्र.

सांकेतिक चित्र.

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में मैदानी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के बदौलत बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में काबिज हुई.

चुनावी साल में सीटों के गुणाभाग में राजनीतिक दल उलझे हुए हैं, मगर हैरानी की बात ये है कि बीजेपी-कांग्रेस दोनों दलों का मैदानी क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान नहीं है. छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को सत्ता की चाबी माना जाता रहा है. मगर बीते विधानसभा चुनाव में यह भ्रम टूटा और मैदानी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के बदौलत बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में काबिज हुई, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग ही दिखाई दे रही हैं. क्योंकि मैदानी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली बीजेपी हो या फिर कांग्रेस दोनों मैदानी क्षेत्रों में ज्यादा एक्टिव दिखाई नहीं दे रहे हैं.

यह बात अलग हैं कि बीजेपी सभी 90 सीटों पर तैयारियों का दंभ भर रही है तो वहीं कांग्रेस मैदानी क्षेत्रों में सरकार के खिलाफ माहौल होने की दलील देने में जुटी है. छत्तीसगढ़ के बीजेपी के उपाध्यक्ष सुनील सोनी कहते हैं कि भाजपा सभी 90 सीटों पर फोकस कर रही है. किसी भी सीट को मजबूत मानकर छोड़ा नहीं जा रहा है. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख शैलेष नीतिन त्रिवेदी कहते हैं कि मैदानी क्षेत्र में सरकार के खिलाफ माहौल है, जिसका लाभ कांग्रेस को मिलेगा.

आदिवासी बाहुल्य छत्तीसगढ़ में बस्तर और सरगुजा संभाग को पहाड़ी-आदिवासी संभाग माना जाता है.
अन्य तीन रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग को मैदानी क्षेत्रों में गिना जाता है. इन्हीं मैदानी क्षेत्रों के कुल 64 में से 38 सीटों पर जीत हासिल कर बीजेपी सत्तासीन हुई थी. जबकि मैदान में कांग्रेस को महज 24 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. बावजूद इसके चुनावी साल में मैदान पर हलचल दिखाई नहीं दे रही है.

राजनीतिक विश्लेषक बाबूलाल शर्मा भी मानते हैं कि मैदानी क्षेत्रों की अनदेखी करने वाली पार्टी को चुनाव में बड़ा नु​कसान हो सकता है. क्योंकि छत्तीसगढ़ में जोगी पार्टी, आम आदमी पार्टी, सर्व आदिवासी समाज और ओबीसी महासभा संयुक्त रूप से मैदानी क्षेत्रों में सक्रिय है. ये सक्रियता बताने के लिए काफी है कि सत्ता तक पहुंचने के लिए मैदान मारना जरूरी होगा.

Tags: Assembly Elections2018, Chhattisgarh news

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