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रामदेव के करीबियों में थे राजीव दीक्षित, जन्मदिवस पर ही हुई थी संदेहास्पद मौत

राजीव दीक्षित. फाइल फोटो.
राजीव दीक्षित. फाइल फोटो.

भारत स्वाभिमान आंदोलन के तत्कालीन राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव दीक्षित की संदेहास्पद मौत मामले की फाइलें 9 साल बाद फिर से खुलने वाली हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 24, 2019, 12:20 PM IST
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भारत स्वाभिमान आंदोलन के तत्कालीन राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव दीक्षित की संदेहास्पद मौत मामले की फाइलें 9 साल बाद फिर से खुलने वाली हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय ने दुर्ग पुलिस को आदेश जारी किया है कि मामले में नए सिरे से जांच की जाए. विदेशी वस्तुओं के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले राजीव दीक्षित एक समय में बाबा रामदेव के सबसे करीबियों में थे.

एक इत्तेफाक ही है कि राजीव दीक्षित की मौत उसी दिन हुई, जिस दिन उनका जन्म दिवस था. 30 नवंबर, 1967 को यूपी के अलीगढ़ में राजीव दीक्षित का जन्म हुआ था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राजीव दीक्षित ने इलाहाबाद में बीटेक करने के दौरान ही अपना मकसद तय कर लिया था. यहां अपने टीचर्स और कुछ साथियों के साथ राजीव ने ‘आजादी बचाओ आंदोलन’ शुरू किया. जिद थी भारत का सब कुछ स्वदेशी बनाना.

आईआईटी से एमटेक करने के बाद राजीव दीक्षित ने कुछ वक्त तक सीएसआईआर में काम किया. बताते हैं कि इस दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी काम किया. यहां से निकलने के बाद राजीव की जिंदगी का एक ही मकसद था. राष्ट्रसेवा.



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राजीव दीक्षित के बारे में मौजूद मीडिया रिपोर्ट के वो 2009 में बाबा रामदेव के संपर्क में आए. दावा किया जाता है कि उन्होंने ही रामदेव को देश की समस्याओं और काले धन के बारे में बताया, जिससे रामदेव बहुत प्रभावित हुए और दोनों साथ में काम करने के लिए सहमत हो गए. इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक भारत स्वाभिमान आंदोलन शुरू करने के दौरान राजीव दीक्षित और रामदेव ने शपथ ली कि ‘हम केवल कुशल लोगों को मतदान करेंगे’, ‘हम दूसरों को 100 फीसदी मतदान के लिए प्रेरित करेंगे’, ‘हम भारत को विश्व-शक्ति बनाएंगे’, ‘हम भारत को पूरी तरह से स्वदेशी बनाएंगे’ और ‘बुद्धिमान, ईमानदार लोगों को जोड़कर देश के विकास में लगाएंगे.’ इस आंदोलन के तहत राजीव और रामदेव ने योजना बनाई कि लोगों को अपने साथ जोड़ने के बाद 2014 में वो देश के सामने अच्छे लोगों की एक नई पार्टी का विकल्प रखेंगे और लोकसभा चुनाव में दावेदारी पेश करेंगे.

शव का क्यों नहीं हुआ पोस्टमार्टम?
आजादी बचाओ आंदोलन के जनक राजीव दीक्षित की 29-30 नवंबर 2010 की रात छत्तीसगढ़ के भिलाई के बीएसआर अपोलो अस्पताल में मौत हो गई थी. 30 नवंबर को ही इनका जन्मदिवस भी था. मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया जाता है, लेकिन इस पर समय समय पर सवाल उठते रहे हैं. दीक्षित स्वदेशी उत्पादों के प्रणेता थे और देश भर में घूम-घूम कर इस विषय पर अपना व्याख्यान देते थे. विदेशी कंपनियाें के उत्पादों के उपयोग का विरोध करने के चलते उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बन चुकी थी. बावजूद इसके भिलाई में प्रवास के दौरान हुई उनकी मौत पर तत्कालीन जिला प्रशासन ने शव को बिना पोस्टमार्टम कराए ही अंतिम संस्कार के लिए गृहनगर भेज दिया था.

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