रमन सरकार में मंत्री के साथ ही नक्सलियों के निशाने पर भी रहे हैं विक्रम उसेंडी, पढें- खास बातें
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रमन सरकार में मंत्री के साथ ही नक्सलियों के निशाने पर भी रहे हैं विक्रम उसेंडी, पढें- खास बातें
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ विक्रम उसेंडी. फाइल फोटो.

छत्तीसगढ़ भाजपा की कमान कांकेर लोकसभा सीट से सांसद विक्रम उसेंडी के हाथों में दे दी गई है. धरमलाल कौशिक की जगह विक्रम उसेंडी को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है.

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छत्तीसगढ़ भाजपा की कमान कांकेर लोकसभा सीट से सांसद विक्रम उसेंडी के हाथों में दे दी गई है. धरमलाल कौशिक की जगह विक्रम उसेंडी को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. लोकसभा चुनाव से ऐन पहले विक्रम उसेंडी को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपे जाने के बाद से चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. सांसद से पहले विक्रम उसेंडी छत्तीसगढ़ की रमन सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं. मूलत: बस्तर संभाग के निवासी विक्रम उसेंडी नक्सलियों के निशाने पर भी रहे हैं. भाजपा आला कमान के चहेते भी मानें जाते हैं.

मई 2018 में नक्सलियों ने कांकेर सांसद विक्रम उसेंडी के फार्म हाउस को निशाना बनाया था. नक्सलियों ने अन्तागढ़ थाना क्षेत्र के बर्रेबेड़ा स्थित फार्म हाउस को आईडी ब्लास्ट कर उड़ा दिया था. इतना ही नहीं नक्सलियों ने फार्म हाउस के कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की थी. इससे पहले भी आदिवासी नेता विक्रम उसेंडी नक्सलियों के निशाने पर रहे हैं.

28 जुलाई 2016 को विक्रम उसेंडी को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की कल्याण समिति का सदस्य बनाया गया. साल ​2014 के लोकसभा चुनाव में कांकेर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी की फूलोदेवी नेताम को हराकर विक्रम उसेंडी 16वीं लोकसभा के लिए चुने गए थे. इससे पहले साल रमन सरकार में वे 2008-2013 वन मंत्री, सार्वजनिक उपक्रम, लोक शिकायतें मंत्री और इससे पहले साल 2004 -2008 उपाध्यक्ष, बस्तर विकास प्राधिकरण, 2003- मई 2014 सदस्य भी रह चुके हैं. वे अंतागढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं.



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विक्रम उसेंडी पहली बार साल 1993 में विधायक चुने गए थे. इसके बाद साल 2004 से 2013 तक के तीन विधानसभा चुनावों में उन्हें अंतागढ़ सीट से लगातार जीत मिली. साल 2014 में भाजपा ने उन्हें कांकेर सीट से प्रत्याशी बनाया और वे जीते. इसके बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. तब से अब तक वे सांसद हैं. हालांकि 2018 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने अंतागढ़ सीट से उन्हें प्रत्याशी बनाया, लेकिन उन्हें कांग्रेस के अनूप नाग से हार का सामना करना पड़ा.

किसान परिवार से ताल्लुक
17 अक्टूबर 1965 में उत्तरी बस्तर के कोंडागांव के अंतागढ़ में जन्में विक्रम उसेंडी ने बीएसई स्नातक तक ही पढ़ाई की है. इसके बाद से वे कृषि व सामाजिक कार्य के साथ ही राजनीति में भी सक्रिय हो गए. विक्रम उसेंडी के पिता देवसिंह उसेंडी माता का नाम सोमवती उसेंडी व पत्नी रामप्यारी उसेंडी हैं.
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