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रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता से 3 घंटे से ज्यादा तक पूछताछ, पुलिस को नहीं मिला जवाब

डॉ. पुनीत गुप्ता.
डॉ. पुनीत गुप्ता.

पुलिस ने 3 घंटे से भी अधिक समय तक डॉ. पुनीत गुप्ता से पूछताछ की, लेकिन उन्‍होंने अधिकांश सवालों का जवाब नहीं दिया.

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डीकेएस अस्पताल फर्जीवाड़ा मामले के मुख्य आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता आखिरकार पुलिस के सामने सोमवार को पेश हुए. डीकेएस अस्पताल में 50 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े का आरोप अस्पताल के पूर्व अधीक्षक ने डॉ. पुनीत गुप्ता पर लगा है. वर्तमान अधीक्षक डॉ. केके सहारे ने मामले की विभागीय जांच कराने के बाद इस मामले में 15 मार्च को गोल बाजार थाने में एफआईआर दर्ज कराया था. इस मामले में पूछताछ के लिए पुलिस ने 2 बार पहले पुनीत गुप्ता को नोटिस जारी किया, लेकिन वह थाने में उपस्थित नहीं हुए थे. इसी बीच पुनीत गुप्ता को हाईकोर्ट से 25 अप्रैल को राहत मिल गई थी.

गोल बाजार पुलिस ने फिर 2 बार डॉ. पुनीत गुप्ता को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया था. 1 मई को ही पुलिस ने पुनीत गुप्ता को 8 मई से पहले उपस्थित होने के निर्देश दिए थे, लेकिन पुनीत गुप्ता 2 दिन पहले ही सोमवार (6 मई) को गोल बाजार थाने पहुंच गए. थाने में पुनीत गुप्ता के साथ ही उनके पिता डॉ. जीबी गुप्ता और वकीलों की टीम पहुंची थी. डॉ. पुनीत गुप्ता से जांच टीम के हेड नसर सिद्दीकी ने 3 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की. इस दौरान करीब 50 से अधिक सवाल पुनीत गुप्ता से पूछे गए, लेकिन अधिकांश सवालों के जवाब पुनीत गुप्ता टालते ही नजर आए. एसएसपी आरिफ शेख का कहना है कि पुलिस ने 3 बिंदुओं पर अपनी जांच को केन्द्रित किया था, जिसमें अस्पताल का अधीक्षक रहते पुनीत गुप्ता ने फेक बैलेंस शीट दिया था. इसमें सीए के साइन भी फर्जी थे. लोन पाने के लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे. इसके साथ ही जो नियुक्तियां की गई थी उसमें भी गड़बड़ी थी.

बिग पाइंट
15 मार्च को पुनीत गुप्ता के खिलाफ गोल बाजार थाने में दर्ज हुआ मामला.
25 मार्च को गोल बाजार पुलिस ने पुनीत गुप्ता को नोटिस जारी कर 2 दिनों में उपस्थित होने कहा.


05 अप्रैल को पुनीत गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी किया.
25 अप्रैल को पुनीत गुप्ता को हाईकोर्ट से मिली जमानत.
26 अप्रैल को पुलिस ने नोटिस जारी कर 2 दिनों में थाने में उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने कहा.
1 मई को पुलिस ने फिर नोटिस जारी कर 8 मई तक बयान दर्ज कराने दिया था समय.
पुलिस ने 3 घंटे से भी अधिक समय तक डॉ. पुनीत गुप्ता से पूछताछ की लेकिन पुनीत गुप्ता अधिकांश सवालों के जवाब टालते ही रहे. मीडिया से बात करते हुए डॉ. पुनीत गुप्ता ने मामले को न्यायालय के अधीन बताते हुए ज्यादा कुछ भी बोलने से मना कर दिया साथ ही जांच में सहयोग करने की बात जरुर कही है. डॉ. पुनीत गुप्ता के वकील हितेंद्र तिवारी ने भी जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है.

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