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छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: घेरीपईत घोरत रहिबे ते नइ बनय, काबर के...

न्यूज 18 क्रिएटिव.

न्यूज 18 क्रिएटिव.

समय परे मा बात ला लमाना पर जथे, फेर लमावत घानी घलो थोकन बिचार करत चलना चाही. मन के काहे पल्ला भागतेच पाबे, थोरको थीरबांह नइ धरय. हमर अपन सेती होवंय या फेर अउ ककरो सेती घोर घोर के उही उही बात ला नइ लानना चाही.

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समय परे मा बात ला लमाना पर जथे, फेर लमावत घानी घलो थोकन बिचार करत चलना चाही. मन के काहे पल्ला भागतेच पाबे, थोरको थीरबांह नइ धरय. हमर अपन सेती होवंय या फेर अउ ककरो सेती घोर घोर के उही उही बात ला नइ लानना चाही. बात परे मा समय नइ लागय फेर भागतेच झन राहय तेकरो खियाल होना चाही. पारी पारी सबो डहर ला चतवार के राखना आज हमर जिम्मेदारी होगे हे.

कोनो जनम के सेती ताय अइसे कहिके मन के बात मने मन मा झन राहय. भीतरे भीतर गुंगवाना बने नइ माने जाए. सगुन देखइया के चेहरा घलो सगुन विचारत हे तइसे लागथे. असली हा कोनो जगा राहय असलिच रइही. अपने आप मन के उदगार भितरी डहर ले आवत हे तइसे जनाथे. जनवइया घलो जानी डारथे के सत के रद्दा मा चिनहारी, अनचिनहारी मनखे परतितिया नइ होवय. विसवासी के उम्मर बाढ़थे अउ अविसवासी घाटा मा रहिथे अइसे हमर सियनहा मन ला कहत सुने गेहे.

काली अउ आज मा कतका फरक होगे कोन बताही
चारों मुड़ा ला देख डारे सबो जगा मा एकेच बात सार हे आज ला जीले काली के का भरोसा. सबो जनम मा सबो परब अपन खच्चित दिन परिस अउ आने वाला जनम मा घलो परही. प्रकृति अपन नियम मा बंधे बंधाए तैयार रइथे. मानुस तन अपन तरक्की के आधार के डगर ला नापत नापत आज कहां ले कहां पहुंचगे. पाछू लहुट के देखे बर घलो कनुवाए ला धर लेहे. बने बात मा सबो बनेहे त काबर कनुवाना. आन ला बनाने वाला काली के हिसाब थोरे मांगत हे. फेर एक ठन बात अउ आगे करनी के फल. करनी के फल ला कोन भोगही अइसे सोचना घलो एक ठन बात होगे. काल अपन गणना ला नइ छोड़य तोला जीना हे त आज मा जी. आने वाला समय मा जेन जीही तेन बना लिही.

हम चल देतेन अइसे कहइया घलो हावय
हार मान लेना कोई बुद्धिमानी नइ माने जाय. प्रयास करते रइही तेने हा अपन जीत ला निरनय करे के साहस देवत देखे गेहे. सब झन बर संसारी जीवन जरूरी करे गेहे. अपन अवरदा पाके सबो झन जूड़ छांव मा तिरिया जाथें. सुकलाल के बात मा सुखेसुख होही अइसे तें कइसे कहि सकत हस. नांव मा का धरे हे. नांव के सेती हमर पहिचान होथे बस. असली जगा हमर जिये धरे के गुण मा हावय. सबो पहर के बांटा होगे हे. अब काखर बांटा मा काय परही कोनो नइ जानय. सदादिन ले चलत आवत हे अइसे कहिके अपन पादा ला झन बुलावव एमा करम के लेखा ला कोन मेटाही. अंधियारी पाख अउ अंजोरी पाख के चंदा घलो हमन ला सुख दुख के संकेत देवत चलत रइथे. हिरु बछरू ला घलो भगवान बनाए हावय. जानसून के अलहन ला कोनो नइ बलावव तभे तो सावचेत रेहे के हमन ला पाठ पढ़ाए गे हावय. फेर का बात के चिंता. अपन संसो पीरा ला टांग देवव अउ जिनगी भर जीवव.

सबो के सेती अपन डहर ला बने बनाना हे
रेंगे रद्दा मा चिन्हा पारत कोनो ला नइ देखे गेहे तभो ले चिन्हा परत रइथे. रद्दा मा काबर चिन्हा परत होही एला विचार करव बने बिचार करे मा जानबा होथे अउ जानबा के सेती नवा बिचार के जनम होथे. घेरीपईत आठोकाल, बारो महिना एके रद्दा मा नइ रेंगे जाय. जिनगी के जाल मा चारों डाहर गोल-गोल किंदरना परगे अब तोर उपर हे कोन मेरन ले बुलकके अपन बर तोला नवा रद्दा बनाना हे.

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