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छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: होती के धोती नइ होती के निंगऊटी, जुन्ना हाना आजो जनावत हे...

सांकेतिक फोटो.

सांकेतिक फोटो.

समे परेमा कतको झन ला अपन बीते दिन ला सुरता मा लाए बर परथे. देख समझके चलना अउ चलाना सदादिन बर बने होथे. आज के जरूरत हा कतकोझन ला पदोवत हे.

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आज ले 50-60 बरस पहली हमर माँ अइसनहे कई किसम के हाना ला हमर आगू मा सुनावय. रंग - रंग के बिसकूटक अऊ कहानी कहइया के संगे संग हुंकारू देवइया घलो राहंय. आए ए पईत फेर सुरता लहुट लहुट के आवत हे. जिहां हावय तेखर छकल - छकल अउ जिहां नइये तिहां हंड़िया उपास. समे परेमा कतको झन ला अपन बीते दिन ला सुरता मा लाए बर परथे. देख समझके चलना अउ चलाना सदादिन बर बने होथे. आज के जरूरत हा कतकोझन ला पदोवत हे. नइये जरूरत तभो ले संउख ला पूरा करबो कहिके देखासिखी मा अपन पूंजी पसरा ला डोला डारे हें.

चिंता मा दिन रात के खटइया खटिया धरले हे. सुरता के डोरी ला लमावत अपन दिन ला काटत हे. ओपईत के सुरता मा एपईत ला घटावत घटावत कतका दिनले खटाही ते कोन जानी. आज हमन ला अपन रद्दा के सही चयन करना जरूरी होगे हे. सफल जीवन खातिर सादा सर्वदा ला अपनाए जाए त ओपईत अउ एपईत सबो बरोबर जनाही अउ जनवाही.

राहत ले कतको बउरे फेर आज का होगे
एदे काली के बात हरय तइसे लागथे. कोठी मा धान अउ जांगर के मचान दुनो जंउजर लागय. मन मा उछाह राहय. काली के चिंता नइ पदोवय. जांगर भर माई पिल्ला कमावय अउ ससन भर खावय. रतिहा जें खा के तान के सुतइया आज का होगे. अइसे कहिके उसनिंधा खटावत हे. के दिन ले उसनिंदा रहिके खटाबे चलरे जीव अपन अवरदा ला नाप - नाप के चलत रा. घिलर घिलर के जियई घलो बने नोहय. आने वाला कल के सेती सकेले रहिबे तेने बुढ़त काल मा काम आही. जानबा होगे तभो ले अपन रद्दा ला चतवारे नई सकिस तेला दुख झेले ला परही. सबो दिन अपन हिसाब मा राहय. कभू खुशियाली मनावव त खियाली पुलाव झन बनावव देख समझ के समय ला निकालना समझदारी होथे.

दू चार पइसा बचाना तोला कोन सिखोही
सबो परिवार बढ़ित जिनगी बर दू चार पइसा सकेलत चलथे फेर जेन परिवार मा अइसन सोच नइये तेन परिवार ला आगू चलके दुःख पाए ला परथे. खाना पीना तो सबो घर होथे फेर अपन आमदनी ला घलो विचार मा राखना चाही. चार दिन के जिनगी ए  अइसे कहिके दुख ला नेवता देवइया कतको झन समाज मा हांवय अउ एकरे सेती सामाजिक व्यवस्था डगमगाए ला धर लेथे. बढ़ोना राखे के शिक्षा हमर अन्न कुंवारी हा देवत आवत हे. ये हमर सियान मनके सिखोना हरय तेला हमला गठिया के धरना हे.

पारा परोसी गांव गंवतरिहा
पारा परोसी गांव गंवतरिहा सबो झन अपन गुन अवगुन के सेती जाने पहचाने जाथें. गुनवान कभू दुख नइ पावय. गुनी मनखे चार झन ला सकेले राखथे. भल ला कहने वाला अपन दुख ला कभू नइ रोवय. तोरे बर सदादिन छैंहा बने रइही.

हाना पारे के मतलब होथे तोला हाना ले उबारना. मानव जाति के उदय होइस तब ले देखासिखी मा हाना उबरत गिस. हाना पारने वाला के नाम पता नइये फेर बाते बात मा सिखोना देवइया के जयकार होना चाही. समाज ला सही रद्दा मा लाने के उदिम होवत राहय अउ 21 वीं सदी मा घलो हाना अपन बड़ई पावत राहय. कहानी किस्सा अउ बिसकूटक ला सकेलत राहव इही जिनगी के सार ए.

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