छत्तीसगढ़ी में व्यंग्य पढ़ें- गोंदली-आलू म खरगोश-कछुआ कस रेस: हाय-हाय महंगाई

छत्तीसगढ़ी में आर्टिकल पढ़ें.
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गोंदली छक्का–चौका मारत–मारत नाकों दम कर दे हे. अभी सौ रूपिया प्रति किलो के स्कोर हे. इही हाल रइही त मध्यम वर्ग के बाउंडरी ले बाहिर शतक के पार हो जही. ’ लालबुझक्कड़ किहिस –‘ आलू साग के राजा आय. वुहू खूब दू-चार/दु-चार के स्कोर बनावत अर्द्ध-शतक के पार पहुंच गे हे.’

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हाट-बजार ले आवत रिहिस रद्दा म ओला लालबुझक्कड़ मिलिस. आपस म राम राम के व्यवहार होइस. लालबुझक्कड़ ह खबरीलाल के मुख ल देख के किहिस–‘कइसे मितान तोर मुख म 24 काबर बजे हे. अइसे दिखत हस जइसे कोनो जगा ले भन्नाटी चाल के आवत हस.’  खबरीलाल किहिस का बताओं बुझक्कड़ भाई–‘जस–जस देवारी तिहार लकठात जात हे तस–तस गोंदली (प्याज), आलू, बंगाला (टमाटर) सहित जम्मों साग भाजी के भाव चढ़त जात हे. गोंदली अउ आलू के  बीच म महंगाई के रेस चलत हे. गोंदली अस्सी ले सौ रूपिया किलो अउ आलू पचास ले साठ-सत्तर  रूपिया किलो मिलत हे.’

महंगाई के रेस म गोंदली अव्वल
खबरीलाल बुताय मन ले आघू किहिस–‘गोंदली महंगाई के रेस म सब ले तेज अउ अव्वल बने रेहे बर अड़े हे. ओखर आघू म आलू ढूलत जात हे. गोंदली अउ आलू के रेस खरगोश अउ कछुआ के रेस कस होगे हे. ये रेस म आम मनखे रंउदावत हे. गोंदली कथे मोर बिन साग कइसे रांधहू रांध के देखाव. जमाखोर मन के किरपा हे.’ पानी जादा गिरे ले गोंदली अउ आलू के फसल के नुकसानी होथे अउ भाव चढ़थे अइसे कथे. जेन हर बखत सच नइ होय. अब चुनाव बखत गोंदली धारों –धार रोवाथे.’

गोंदली के चौका-छक्का..शतक पार   
गरीबदास किहिस-’मेंहा सब समझ गेंव. आलू काहत हे के हर घर म मोर हाजिरी हे. मोर भाव आठ रूपिया किलो ले शुरू होय हे. अभी–अभी अर्ध–शतक ठोके हंव. मोरो इरादा शतक के तीर तार पहुंचे के हे.’ खबरीलाल किहिस-‘गोंदली के अतलंगिया भाव ले गिराहिक त्रस्त हें. गोंदली छक्का–चौका मारत–मारत नाकों दम कर दे हे. अभी सौ रूपिया किलो के स्कोर हे. इही हाल रइही त गोंदली ह निम्न अउ मध्यम वर्ग के बाउंडरी ले शतक लगा के पार हो जही.’ लालबुझक्कड़ किहिस–‘ आलू साग के राजा आय. वुहू खूब दू-चार /दु-चार के स्कोर बनावत अर्द्ध-शतक के पार पहुंच गे हे.’



बंगाला चालीस पचास के लाली बाली म खबरीलाल किहिस-‘ बंगाला घलो चालीस–पचास के आसपास ढूलत हे. जादा बंगाला होथे त ओखर सड़क म शोभा दिखथे. सबो किसम के भाजी-पाला के दाम बीस -पच्चीस अउ तीस रूपिया पाँव ले कमती होबे नइ होत हे. मूनगा (सहिजन) एक सौ पच्चीस रूपिया किलो हे. सबे दार अउ किराना समान के दाम घलो कोरोना काल म परीक्षा लेवत हे. कुल मिलाके दार-भात बर जिनगानी के पहाड़ चढ़ई हे.

लालबुझक्कड़ किहिस- ‘मंहगाई रानी सूरसा राक्षसी कस भयानक होवत हे. कोरोना के भगम-भाग म सब जिनिस के भाव चढ़त हे. किराना समान घलो अपन नवा रिकार्ड बनाय म लगे हें. दूध पचास रूपिया लीटर ल छूवत हे. महंगाई ताना मारत हे. किसान हरूना धान के कटइ शुरू कर दे हे. छतीसगढ़ म एक दिसम्बर ले सोसाइटी के दुवारा धान खरीदी करही जेला अभी एक महीना हे. अपन जरूवत के अनुसार कोचिया तीर धान बेचना ओखर मजबूरी हे. छोटे किसान कइसे धीर धरे?

देवारी तिहार के हाट-बाजार
खबरीलाल किहिस–‘देवारी तिहार के रौनक अब धीरे–धीरे कोरोना मुक्त होवत हे. कोरोना डर सड़क म दउड़त हे. गश्त लगावत हे. अभी तिहार के उत्साह जागे हे. बाजार सज-धज के तियार हे. जइसे नवा–नवा बहुरिया सिंगार करे बइठे होय. बैपारी मन ल बने गिराहिकी मिले के भरोसा हे. फेर कोरोना के छाँव सबे बैपार म परत दिखत हे. गरीबदास किहिस–‘बाजार म सोना–चांदी के जेवर खनकत हे. अउ सोना चांदी के भाव सुन के खरीददार छटकत हें | सदाबहार बैपार त दवई दूकान के हे. कोरोना के चलते इम्युनिटी बढ़ाय के दवा के बिक्री सौ प्रतिशत बाढ़गे. ये हा कोरोना किरपा आय. दवई के बढ़त भाव बर सरकार ल ब्रेकर के खोज करे बर लागही.

इनकर सहाय कोन हे?
लालबुझक्कड़ किहिस-‘गाँव वाले कोरोना के सेती डर्राय हें अउ शहर आना कमती कर दे हें. किसान के अपन दुःख हे. निजी स्कूल के गुरूजी मन ल ले दे के महीना म आधा तनखा मिल पात हे. कोनो–कोनो स्कूल म त स्कूल बंद त तनखा बंद के हालत हे. ’कतको निजी सेक्टर के काम ठप्प होय ले वुहाँ के करमचारी घर बइठगे हें. हालत खराब हे. महंगाई सोंटा मारत हे. जिहां कोनो उद्योग धंधा हे तिहां ठीक-ठाक हे. बोनस अउ तनखा के ताकत म बाजार चमकत हे. जिहां तनखा तक के अकाल हे तिहां सुकाल कहाँ ले आय? ’मोटर ड्रायबर,कंडेक्टर मन के भूखों मरे के दिन आगे हे.
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