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छत्तीसगढ़ी में व्यंग्य पढ़ें- सबे करत हें मंथन

सांकेतिक फोटो.

सांकेतिक फोटो.

भोलेनाथ संसार के भला करे बर कालकूट महा-विष अपन कंठ म धारण करिस अउ नीलकंठ होगे. हर बखत भोला-भाला मन ल ठगे जथे. ओमन ल ठगे के दर्शन अलग होथे. हर हाल म मंथन जरूरी है. मंथन करे ले मन मथा जथे.

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आजकल मंथन के जुग हे. हर कोई मंथन करत हे. एखर मंथन ओखर मंथन.‘मथत-मथत माखन रहे दही मही बिलगाय. जोंन मथही तोंन पाही. जोंन नइ मथही तोंन नदिया, नरवा, तरिया तिर बइठे रही जही. बइठागुर मन काला पाहीं ? बस ठेलहा अपने जांगर ल टोरहीं. मंथन तो हर जगा होथे. गाँव के चौपाल ल लेके, पान के दुकान तक अउ पान के दुकान ले लोकतंत्र के मन्दिर तक मंथन होते रहिथे. लोकतंत्र के मंदिर म मंथन करके देश चलाय जथे. हर हाल म मंथन जरूरी है. मंथन करे ले मन मथा जथे. मन ल मथे ले  नवा विचार आथे. पूर्व काल म देवता अउ राक्षस के बीच समुद्र-मंथन के कहानी प्रसिद्ध हे.

हर मंथन के परिणाम निकलथे. देवता अउ राक्षस के बीच समुद्र-मंथन से चौदह रतन निकलिस. अमरित निकलिस त हलाहल कालकूट महा-विष घलो निकलिस. देवता अमरित पान करिन. हलाहल महाविष भगवान भोलेनाथ ल मिलिस. भोलेनाथ संसार के भला करे बर कालकूट महा-विष अपन कंठ म धारण करिस   अउ नीलकंठ होगे. हर बखत भोला-भाला मन ल ठगे जथे.ओमन ल ठगे के दर्शन अलग होथे. अमरित के चाहत सब ल हे. सत्ता पाय बर उन सब कुछ बलिदान कर सकत हें. जहर तो राजनीति के सिधवा मनखे मन बर होथे. अमरित पाय बर छल जरूरी हें. अब तो छल म बल हे सब जगा आम बात होगे हे.

महाबली मोदी ल हराय बर उपाय  
समुद्र करा धीरज अउ मरजाद (मर्यादा) दुनो हे. धीर म खीर हे. फेर मंथन जरूरी हे. मंथन करे ले अमरित अउ विष दुनों निकलथे. आजकल अमरित म विष के, अउ विष म अमरित के भरम होथे. मंथन करे के बेरा कोनो ल थानेदार अउ कोनो ल हवलदार नई बनना चाही. आत्म-मंथन जरूरी हे. विचार-मंथन करइया मन जब देश के राजधानी ल अपन मंथन-स्थल बना लेय तब तो मंथन के महत्व अइसने बाढ़ जथे. चाहे चाय नाश्ता पार्टी म मंथन होय चाहे अउ कुछू बहाना मुख्य के होना हे. सार माने सत्ता. हर राजनीतिक पार्टी बर सत्ता महत्वपूर्ण  हे. मुख्य वस्तु सत्ता हे.,देश-सेवाके बहाना सत्ता सेवा हे. सत्ता म सब सुख होथे. सत्ता से हट के हर बात करना बेकार हे. बंगाल विजय के बाद मुख्यमंत्री ममता बेनजी ‘द ग्रेट-प्लेयर’ के रूप म आघू आइस. विपक्ष ल थोरकुन अंजोर दिखिस. अउ आशा के केंद्र बन गे हे.

विपक्षी पार्टी मन ल ममताजी के आसन कुछ उंच होय कस लगत हे.  चौदह राजनीतिक दल अगले चुनाव म सत्ता पाय बर मंथन करिन. निचोड़ निकलिस महाबली मोदी ल हराना हे. हमन ल सब ल एक होना हे. टांग खिंचो प्रतियोगिता बाद म होना हे,जो होना हे सो होना हे. मंथन जरूरी हे. मंथन करे ले मन मिलथे. एक दुसर के भीतरी ज्ञान के टार्च मार के भौतिक पहिचान ठीक से हो सकत हे. ओखर पहिली घेरी-बेरी बइठना,बोलना, घेरी-बेरी चिन्तन जरूरी है.सबके सपना के फोटू खींचे जा सकत हे.

सुवार्थ के सत्ता परेम  
सबके अपन अपन सुवारथ हे. भविष्य के चिंता हे. सबके अलग-अलग आवाज हे. हर आवाज के अपन सुवारथ-मंथन हे “.स्वारथ लागी करंय सब प्रीति” एक बार सन 1977 में सब राजनीतिक पारटी एकहोय रिहिन. एक कहावत सुरता आवत हे “चींटियाँ यदि एका कर लें तो शेर की खाल भी खिंच सकती हैं.” सब मंथन के बाद म विपक्षी एकता असंभव है, उनकर सुवारथ देश ले बड़े हे.!! हारे विपक्षी सेना अपन-अपन पराजय शिविर म गंभीर सांस लेवत हें. लगातार मंथन म भिड़े हें. झूठ बोल के मौसम बलाय से कोनो लाभ नइ होना हे. अनेकों मुंगेरीलाल एला जानत हें.

ओमन ल रात म सत्ता के सपना दिखथे है. सूतत-सूतत सपना देखे के मजा आन होथे. सपना सब ल बने सुहाथे. सब ले उंच सपना कुरसी के सपना होथे. बड़ सुघ्घर लगथे! नींद खुले ले न तो सत्ता दिखे, न सत्ता देवइया जनता. हर राज्य म  चुनाव के महीना-दु महीना पहिली चुनावी मंथन चलत हे. चुनावी रणनीति  अभी ले बनत हे. जनता अभी गुर्राव्त हे. हे. जनता सब देखत हे कभू-कभू मंथन घलो कर लेथे. संचार क्रांति के ये जुग सब के कान खुल्ला हे. आँखी म सही-गलत सब दिखत हे.

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