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धान खरीदी में बड़ी धांधली का आरोप, SDM ने दिए जांच के आदेश

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रायपुर में खरीदी केंद्रों पर धान खरीदी को लेकर बड़ी धांधली के आरोप लगे हैं. यहां तक के बंजर भूमि और कालोनाईजर के प्लांट कटे हुए जमीन पर भी धान खरीदी के आरोप लगाए गए हैं.

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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सत्ता में आते ही 2500 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य में धान खरीदने के ऐलान के बाद समितियों में धान की आवक अचानक बढ़ गई है. बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष 23 लाख 48 हजार 256 मीट्रिक टन अधिक धान की खरीदी हुई है. वहीं अब खरीदी केंद्रों पर धान खरीदी को लेकर बड़ी धांधली के आरोप लगे हैं. यहां तक के बंजर भूमि और कालोनाईजर के प्लांट कटे हुए जमीन पर भी धान खरीदी के आरोप लगाए गए हैं.

समिति के पदाधिकारियों का का कहना है कि जब बीजेपी ने धान खरीदी का लक्ष्य रखा तब किसानों का पंजीयन हो चुका था. वहीं कांग्रेस सरकार के घोषणा के बाद नए किसानों का न तो पंजीयन हुआ और ना ही रकबा बढ़ा, तो अधिक धान कहां से आए जो बड़ा सवाल है. बीजेपी सरकार में कुल किसानों की संख्या 16 लाख 92 हजार 61 किसान थे, यही संख्या कांग्रेस में भी रही.

बहरहाल, समिति के पदाधिकारियों ने घोटाले को लेकर लिखित रूप में शिकायत की है, लेकिन आरोप यह भी लगा रहे हैं कि मामले की जांच नहीं की गई. अब मामला सामने आने के बाद जांच की बात कही जा रही है. प्रदेश के अधिकांश जिलों और धान खरीदी केंद्रों में जनवरी के बाद अचानक धान की आवक बढ़ी, कई ऐसे किसान भी थे जिन्होंने कई सालों से धान नहीं बेचा लेकिन इस वर्ष जनवरी में धान बेच दिया. ऐसे में धान खरीदी की गंभीरता से जांच हो तो करोड़ों के घोटाले उजागर हो सकते हैं.



किसान नेता टिकेन्द्र ठाकुर ने कहा कि बिल्डरों और मारवाड़ियों ने जमीन खरीदकर रखी हुई है, लेकिन उस जमीन पर धान का पैदावार नहीं किया. ऐसे में उस धान को भी कोचियों के माध्यम से अपने खाते में धान का बिक्री किया गया है.
मामले में एसडीएम सूरज कुमार साहू ने कहा कि इसमें ये जांच किया जाएगा कि कितना रकबा रजिस्टर्ड था और उस हिसाब से कितने धान खरीदने की उनकी पात्रता बन रही थी. इसके लिए नायब तहसीलदार को जांच का दायित्व सौंपा गया है.

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