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भाई को राखी बांधने हर साल जेल की दहलीज तक आती है बहनें, फिर भी...

भाई को राखी बांधने हर साल जेल की दहलीज तक आती है बहनें, फिर भी...

कुछ बहनें ऐसी भी होती है जिन्हें अपने भाई को राखी बांधने के लिए जेल की दहलीज तक आना पड़ता है.

कुछ बहनें ऐसी भी होती है जिन्हें अपने भाई को राखी बांधने के लिए जेल की दहलीज तक आना पड़ता है.

फिर ऐसा क्या होता है कि अपराध(Crime) नहीं थमता और जेल की कालकोठरी (Jail) में फिर कोई नया भाई (Brother) पहुंच जाता है और एक और बहन (Sister) लग जाती है कतार में राखी (Rakhi)बांधने जेल के बाहर.

राखी (RakshaBandhan) का त्यौहार इसलिए सब त्यौहारों में खास होता है क्योंकि ये रक्षा के वचन का त्यौहार होता है. इस दिन भाई (Brother) अपनी बहनों (Sisters) को रक्षा का वचन देते हैं. बहनें चाहे परदेश में ही हो लेकिन इस दिन अपने घर पहुंचकर अपने भाई को राखी बांधना चाहती है या भाई बहनों के पास आते हैं. लेकिन कुछ बहनें ऐसी भी होती है जिन्हें अपने भाई को राखी बांधने के लिए जेल (Jail) की दहलीज तक आना पड़ता है. हर साल इन बहनों  का दर्द अलग-अलग माध्यमों से समाज के बीच पहुंचता है. फिर ऐसा क्या होता है कि अपराध नहीं थमता और जेल की कालकोठरी में फिर कोई नया भाई पहुंच जाता है और एक और बहन लग जाती है कतार में राखी बांधने जेल के बाहर.

हर साल रहती है ये तस्वीर:

हाथ में अपने भाईयों के लिए राखी और मिठाई लिए बहनों का भीड़ रक्षाबंधन के दिन जेल के बाहर हर साल नज़र आती है. जेल में बंद कैदी भाई की एक झलक पाने के लिए बहनों को इस दिन का इंतज़ार करना होता है. और जब मुलाकात होती है, तब कहने के लिए इनके पास शब्द नहीं होते. भाई की आंखों में पश्चाताप के आंसू और सिसकती बहनों को जेल में आकर राखी बांधने का दुख. हर साल बहने भाईयों से वादा लेती है कि फिर ऐसा दिन ना देखना पड़े कि जेल में आकर उन्हे ये त्यौहार मनाना पड़े.

हर साल बहने भाईयों से वादा लेती है कि फिर ऐसा दिन ना देखना पड़े कि जेल में आकर उन्हे ये त्यौहार मनाना पड़े.


राखी पर सूने रहने लगी इन भाईयों की कलाई:

इधर अपराध से दूरी नहीं बनाने वाले आदतन अपराधियों से उनका परिवार और बहने दूरी बनाने लगी है. इसलिए जेलों में बड़ी संख्या में बंद आदतन बदमाशों की कलाई में राखी बांधने रक्षाबंधन के दिन उनकी बहनें नहीं पहुंचती. लेकिन ये भी सच है कि जेल की ये दुखद तस्वीर हर साल कम भी नहीं होती. ये बात सोचने पर मजबूर करती है कि इन तस्वीरों को देखकर भी समाज सबक क्यूं नहीं लेता. इन बहनों की पीड़ा देखकर समाज में मौजूद और भाई क्यों सबक नहीं लेते कि उनका एक गलत कदम उनकी बहनों को ना जाने कितने सालों तक खून के आंसू रूलाए. वो भी इन बहनों की कतार में भाई को जेल में राखी बांधने के लिए खड़ी हो जाती है. अपराध का अपना मनौविज्ञान होता है लेकिन इन बहनों की पीड़ा से क्यों कोई सबक लेता ये सोचने की बात है.



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Tags: Chhattisgarh news, Raipur news, Rakhi festival

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