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Success Story: पीएससी टॉपर नीरनिधि से जानिये सफलता का मंत्र, सोशल मीडिया को बनाया पढ़ाई का जरिया

अपने मां-पिता के साथ बैठे सीजी पीएससी टॉपर नीरनिधि नंदेहा.

अपने मां-पिता के साथ बैठे सीजी पीएससी टॉपर नीरनिधि नंदेहा.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) में रहने वाले नीरनिधि नंदेहा ने राज्य की सबसे बड़ी परीक्षा सीजी पीएससी (CG PSC) में टॉप किया है. इस सफलता के पीछे की मेहनत और रणनीति प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले हर परीक्षार्थी को जाननी चाहिए.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) पीएससी में राजधानी रायपुर (Raipur) के नीरनिधि नंदेहा (Neernidhi Nandeha) ने टॉप किया है. इसके नतीजे बीते 17 सितंबर की देर शाम नतीजे घोषित किए गए थे. नीरनिधि नंदेहा के पिता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के एग्रोनॉमी विभाग के प्रमुख थे. वहीं मां गृहणी. नीरनिधि उन सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं जो पीएससी की तैयारी कर रहे हैं. क्योकि नीरनिधि पहली बार में प्रीलिम्स भी नहीं क्लीयर कर पाए थे. नीरनिधि का कहना है कि जब उन्होंने पहली सूची में नाम नहीं देखा तो वो अपने कमरे में बंद हो गए थे. बाद में पिता ने बताया कि उनका सेलेक्शन हो गया है.

छत्तीसगढ़ पीएससी में टॉप करने वाले नीरनिधि नंदेहा के घर में नतीजे निकलने के बाद से ही बधाइयों का ताता लगा हुआ है. घर के सारे मोबाइल फोन के साथ लैंडलाइन फोन भी लगातार बज रहा है. नीरनिधि नंदेहा को जो यह बधाई मिल रही है उसके पीछे की मेहनत और रणनीति प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले हर परीक्षार्थी को जाननी चाहिए. दरअसल इससे यह भी सबक मिलता है कि आपकी असफलता कैसे आपके लिए अपने सपनों के सर्वोच्च जगह पर पहुंचा सकती है. नीरनिधि का यह दूसरा प्रयास था.

असफलता से निराशा हुई
नीरनिधि कहते हैं पहले प्रयास में वो प्रीलिम्स तक नहीं निकाल पाए थे. पहली बार की असफलता से उन्हें निराशा तो हुई, लेकिन उन्होंने इसे ही अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बना लिया. इससे उन्हें यह समझ आया कि मेन्स के लिए कितनी मेहनत की जरूरत पड़ेगी. यही वजह है कि उन्होंने दोबारा जब तैयारी शुरू कि तो प्रीलिम्स से कहीं अधिक मेन्स की तैयारी की. उनका कहना है कि ज्यादातर लोग पहली बार में प्रीलिम्स नहीं निकाल पाने पाने पर यही चूक करते हैं वो पूरे साल केवल प्रीलिम्स की तैयारी ही करते हैं. जिससे बाद में मेन्स के लिए समय नहीं मिलता. उनका कहना है कि उनके टॉप करने में इस रणनीति का महत्वपूर्ण स्थान रहा.

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सोशल मीडिया का सहारा
नीरनिधि कहते हैं कि सोशल मीडिया के लगाव को उन्होंने तैयारियों का माध्यम बनाया. इससे रोज के अपडेट में सहायता मिली. उनका कहना है कि आज उनकी सफलता में उनके माता पिता के साथ उनकी ग्रुप स्टडी और नालंदा परिसर के माहौल का भी हाथ रहा. उनके माता पिता भी उनकी इस सफलता से काफी खुश हैं.  उनकी मां चंपा नंदेहा का कहना है कि वह एक गृहणी हैं,  लेकिन आज उन्हें लगता है कि वह भी वर्किंग वुमेन हो गई हैं. घर संभालने के चलते समय ही नहीं मिला. उनके पिता डा. केएल नंदेहा का कहना है कि उनकी इच्छा थी कि बेटा पीएचडी करे, लेकिन बेटे ने जब कहा कि वो प्रशासनिक सेवा में जाना चाहते हैं तो उन्होंने रोका नहीं. अपनी पहली जॉब छोड़कर उन्होंने इसी शर्त में रायपुर आने दिया था कि वो दृढ़ता से अपना सपना पूरा करेंगे. नीरनिधि का कहना है कि रोज की छह घंटे की पढ़ाई पीएससी के लिए काफी है, लेकिन यह जरूर है कि यह नियमित होनी चाहिए.

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