छत्तीसगढ़ में गजब का मामला: एक आयोग के दो अध्यक्ष, दफ्तर पहुंचे साहब तो मिला ताला

ओबीसी आयोग में अध्यक्ष पद को  लेकर विवाद.

ओबीसी आयोग में अध्यक्ष पद को लेकर विवाद.

Raipur News:  भाजपा शासन काल में डॉ. सियाराम साहू की नियुक्ति ओबीसी (OBC) आयोग के अध्यक्ष के पद पर हुई थी. कांग्रेस ने थानेश्वसर साहू को अध्यक्ष बना दिया. अब इसे लेकर विवाद हो रहा है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (Chhattisgarh State Backward Classes Commission) के अध्यक्ष  पद को लेकर अब विवाद की स्थिति एक बार फिर से निर्मित हो गई है. हाईकोर्ट में राज्य सरकार के नियुक्ति आदेश को चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने पद में डॉ. सियाराम साहू को यथावत बने रहने के आदेश दिए है. शुक्रवार को जब डॉ. सियाराम साहू दफ्तर कार्यभार लेने पहुंचे तो उनके चैम्बर में ताला लगा था. आयोग एक और अध्यक्ष दो की स्थिति में विभाग का कामकाज उलझ गया है. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पद एक और दो अध्यक्ष की स्थिति आ गई है. भाजपा शासन काल में डॉ. सियाराम साहू की नियुक्ति ओबीसी आयोग के अध्यक्ष के पद पर हुई थी.

कांग्रेस शासन आते ही आयोग के पद पर थानेश्वसर साहू को अध्यक्ष बनाया गया. इसे डॉ. सियाराम साहू ने हाईकोर्ट में चुनौती दी था. कोर्ट ने डॉ. सियाराम साहू के पक्ष में फैसला सुनाते हुए यथावत रहने का आदेश दिए है.

नियुक्ति को कोर्ट में दी थी चुनौती

डॉ. सियाराम साहू ने न्यूज-18 से बातचीत में कहा है कि आज से काम की शुरुआत करनी थी. चैम्बर में ताला लगाना गलत है. शासन ने तीन साल के लिए नियुक्ति की है. 2018 में मेरी नियुक्ति की गई है. 21 जुलाई 2021 को कार्यकाल खत्म होने वाला था. मगर एक वर्ष पूर्व ही दूसरे अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी गई जिसे में ने कोर्ट में चुनौती दिया था. पद में मुझे यथावत रहने आदेश दिया है.
वहीं इस पूरे मामले में नवनियुक्त आयोग के अध्यक्ष थानेश्वर साहू का कहना है कि कोर्ट का आदेश लेकर दफ्तर डॉ. सियाराम साहू आए है. उनके कहने पर पदभार नहीं दिया जाएग. मेरी नियुक्ति विधितवत रूप से राज्य सरकार ने की है .

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