पुलिस के सामने सरेंडर नक्सली ने प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश को लेकर किया ये खुलासा

पुलिस के समक्ष सरेंडर के बाद सुधाकरण ने कहा कि 'प्रधानमंत्री को मारना है तो बाहर वाले क्या करेंगे, अगर ऐसा करना होता तो पार्टी करती, लेकिन पार्टी की इतनी हैसियत ही नहीं बची है.

Sanjay Tiwari | News18 Chhattisgarh
Updated: February 14, 2019, 12:58 PM IST
पुलिस के सामने सरेंडर नक्सली ने प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश को लेकर किया ये खुलासा
नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
Sanjay Tiwari | News18 Chhattisgarh
Updated: February 14, 2019, 12:58 PM IST
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले के नामजद आरोपियों को भले बीते बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली हो, लेकिन हैदराबाद में सरेंडर करने वाले सवा करोड़ के इनामी दुर्दांत नक्सली सुधाकरण ने जरूर दावा किया है कि कथित शहरी नक्सलियों पर प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचने का आरोप गलत और बेबुनियाद है. प्रतिबंधित सीपीआई माओवादी पार्टी के बारे में अहम खुलासा करते हुए सुधाकरण ने दावा किया कि पार्टी की इतनी हैसियत ही नहीं बची है कि वो प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रच सके. सुधाकरण के मुताबिक, शहरों में रहने वाले वामपंथी विचारधारा के कुछ लोग प्रतिबंधित सीपीआई माओवादी का समर्थन जरूर करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि वो पार्टी में आकर कुछ मदद कर रहे हैं.

पुलिस के समक्ष सरेंडर के बाद सुधाकरण ने कहा कि 'प्रधानमंत्री को मारना है तो बाहर वाले क्या करेंगे, अगर ऐसा करना होता तो पार्टी करती, लेकिन पार्टी की इतनी हैसियत ही नहीं बची है. इस समय एक छोटे से नेता को मारने की तो हालत नहीं है, प्रधानमंत्री को क्या मारेंगे. पार्टी की हालत सभी जगह कमजोर हो गई है. केवल छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य में पार्टी की हालत बाकी जगहों के मुकाबले कुछ मजबूत है. वो लोग काम कर रहे हैं. लेकिन बाकी जगह पार्टी बहुत कमजोर पड़ गई है'.


सरेंडर नक्सली सुधाकरण और नीलिमा.

सुधाकरण ने भीमा कोरेगांव साजिश की जानकारी होने से भी इनकार किया है. हैदराबाद में रहने वाले वामपंथ समर्थक प्रोफेसर वरवर राव से सम्पर्क के बारे में सुधाकरण ने कहा कि वो वरवर राव को जानता है और 2010 में रामनगर षड़यंत्र केस में वरवर राव भी उसके साथ आरोपी थे, लेकिन उसके बाद से वरवर राव के संपर्क में नहीं रहा है. सुधाकरण का दावा है कि भीमा कोरेगांव साजिश के बारे में उसे अखबारों के जरिए जानकारी मिली.



तेलंगाना के निर्मल जिले का रहने वाला सुधाकरण साल 2001 से छत्तीसगढ़ और झारखंड में संगठन ऑपरेट कर रहा था. सेंट्रल कमेटी के सदस्य सुधाकरण के सिर पर झारखंड में 1 करोड़ और तेलंगाना में 25 लाख रुपये का इनाम था. तेलंगाना में नीलिमा के सिर पर 10 लाख का इनाम था. पिछले कुछ महीनों से सुधाकरण और उसकी पत्नी नीलिमा तेलंगाना पुलिस के सम्पर्क में थे और आत्मसमर्पण करना चाहते थे. सरेंडर के बाद तेलंगाना पुलिस ने दोनों के सिर पर घोषित इनाम की रकम उन्हें देने का वादा किया है. सुधाकरण ने बताया कि उसने सरेंडर के लिए कोई शर्त नहीं रखी थी और वो अब तेलंगाना में रहकर शांति की जिंदगी जीना चाहता है.

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