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इस विधानसभा के गर्भगृह में पहुंचते ही खुद निलंबित हो जाते हैं विधायक

इस विधानसभा के गर्भगृह में पहुंचते ही खुद निलंबित हो जाते हैं विधायक

छत्तीसगढ़ विधानसभा. (फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ विधानसभा. (फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ विधानसभा देश की पहली और एकमात्र ऐसी विधानसभा है, जहां गर्भगृह में जाने की हिम्मत जल्दी कोई विधायक नहीं करता. क्योंकि सभी को पता है कि वे जैसे ही गर्भगृह में पहुंचेंगे, स्वत: निलंबित हो जाएंगे.

    लोकसभा की नियम समिति ने सदन के वेल में प्रवेश करने वाले की सदस्यता स्वत: निलंबित होने की सिफारिश हाल ही में की है. इसको लेकर चर्चाओं का भी दौर भी है, लेकिन बता दें कि यह नियम छत्तीसगढ़ विधानसभा की स्थापना के बाद से ही लागू है. छत्तीसगढ़ विधानसभा देश की पहली और एकमात्र ऐसी विधानसभा है, जहां गर्भगृह में जाने की हिम्मत जल्दी कोई विधायक नहीं करता. क्योंकि सभी को पता है कि वे जैसे ही गर्भगृह में पहुंचेंगे, स्वत: निलंबित हो जाएंगे.

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    सदन में जनहित से जुड़े मुद्दों पर अधिक से अधिक चर्चा हो सके, इसीलिए यह नियम विधानसभा ने खुद ही बनाया है. यह नियम राज्य स्थापना के तुरंत बाद सन 2001 में सदन में सर्वसम्मति से बनाया गया, जो अब तक लागू है. इस नियम पर पक्ष हो या विपक्ष दोनों ही एकमत नजर आते हैं.

    जानिए क्या है नियम
    ''नियम-250 (1) के तहत छत्तीसगढ़ विधानसभा के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक- सभा की बैठक के चलते कोई सदस्य अपने स्थान को छोड़कर गर्भगृह में नहीं आएगा. ऐसे सदस्य की सदस्यता, जो गर्भगृह में प्रवेश करता है, सभा की कार्यवाही से स्वमेव उतनी अवधि के लिए निलंबित मानी जाएगी, जैसा कि अध्यक्ष विनिश्चय करें"

    बचती है पैसे की बर्बादी
    इस नियम के कारण (यदा-कदा छोड़कर) कभी भी विपक्षी सदस्य गर्भगृह में नहीं जाते. इससे सदन के समय और पैसे की बर्बादी रूकती है. दरअसल, विधायकों के वेतन-भत्ते आदि को जोड़ लिया जाए तो कई राज्यों में विधानसभाओं की कार्यवाही पर रोज लगभग एक करोड़ रुपये खर्च होता है. सत्र के दौरान सदन चले या न चले, यह राशि खर्च होनी ही है. यह पूरी रकम आम लोगों की है, जिसे सदन में उनके हितों और उनसे जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए खर्च होना चाहिए.

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    कुछ ही देर में खत्म हो जाता है निलंबन
    विधानसभा के गर्भगृह में प्रवेश की वजह से स्वमेव निलंबित होने वाले विधायकों का निलंबन ज्यादातर निलंबन की घोषणा के पांच मिनट के भीतर ही समाप्त कर दिया जाता है. नियम में निलंबन अवधि तय करने का अधिकार अध्यक्ष को दिया गया है.

    जब ये नियम बना तो नेता प्रतिपक्ष रहे नंदकुमार साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि सदन में मुद्दों पर चर्चा की मांग तो कहीं से भी की जा सकती है. इसके लिए गर्भगृह में जाना जरूरी नहीं है. हम चाहते थे कि जनहित के मुद्दों पर अधिक से अधिक चर्चा हो, सदन अकारण बाधित न हो और सदन की गरिमा भी बनी रहे. इसी सोच के साथ हमने इस नियम का खुला समर्थन किया था.

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    Tags: Chhattisgarh Assembly Profile, Chhattisgarh news, Raipur news

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