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ये हैं बस्तर के गांधी, जरूरतमंदों के लिए हर वक्त रहते हैं उपलब्ध

बस्तर.. जो बीते तीन दशक से नक्सलवाद जैसी समस्या से ग्रस्त है. नरसंहार रक्तपात से रंजित इस धरा पर कुछ ऐसे गांधी भी हैं, ...अधिक पढ़ें

    बस्तर.. जो बीते तीन दशक से नक्सलवाद जैसी समस्या से ग्रस्त है. नरसंहार रक्तपात से रंजित इस धरा पर कुछ ऐसे गांधी भी हैं, जिन्होंने परोपकार और सेवा भाव से मानव कल्याण की भावना को बल दिया. हम बात कर रहे हैं बीजापुर जिले के रहने वाले एक साधारण से व्यापारी की, जिनका पूरा परिवार व्यापारोन्नति की बजाए मानव सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर चुका है.

    मूलतः राजस्थान के रहने वाले राजू गांधी और उनका परिवार कभी गुजर-बसर की जद्दोजहद में रेगिस्तान से कोसों दूर बस्तर की हरी-भरी धरा में आकर बस गया था. किराए पर दुकान लेकर जैसे तैसे राजू ने अपना व्यापार बढ़ाया. आज कपड़े के व्यापार से भलीभांति आमदनी तो हो जाती है, लेकिन लोगों का ध्यानाकर्षण तो राजू गांधी की सेवा के प्रति है.

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    दरअसल राजू पूरे क्षेत्र में रक्तदाता के रूप के चर्चित है. राजू ने अब तक 437 जरूरतमदों के लिए रक्तदान तथा रक्त का प्रबंध कराया है. उनके इस प्रयास ने उन्हें एक नई पहचान भी दी है. राजू बीजापुर जिले में उस मोबाइल ब्लड बैंक की तरह है, जो जरूरतमदों के लिए आपात स्थिति में भी ब्लड डोनेट करवाने में सक्षम हैं. इनके प्रयासों और सोच का नतीजा कि आज सैकड़ों लोग रक्तदान के लिए हमेशा तत्पर होते हैं.

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    एक समाज सेवक के रूप में आज राजू को बीजापुर जिला अस्पताल के सभी स्टाफ ही नहीं बीजापुर के क्षेत्रवासी वाकीफ हैं. जरूरतमंदों के लिए रक्त की व्यवस्था या अन्य आवश्यकता के लिए अस्पताल के प्रत्येक स्टाफ के मोबाइल पर राजू का नंबर आपको उपलब्ध मिलेगा. दरअसल राजू की दिनचर्या भी कुछ ऐसी ही है. रोगियों की सेवा भावना के चलते वे अपना अधिकांश समय अस्पताल में मरीजों के बीच ही बीताते हैं.

    स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आकृति शुक्ला का कहना है कि राजू गांधी जरूरत पड़ने पर किसी भी समय उपलब्ध रहते हैं. राजू और उनकी पत्नी निर्मला गांधी में परोपकार की भावना ऐसी है कि वे अपने कश्टों को भूलकर जनसेवा में तल्लीन होते हैं. एक ऐसी ह्दयविदारक दास्ता भी इनसे जुड़ी है. छह महीने पहले निर्मला गांधी को माइनर अटैक (दिल का दौरा) आया था. वे अस्पताल के आई सी यूं में भर्ती थी. नाजूक परिस्थितियों के बावजूद एक जरूरतमंद को रक्त देने के लिए निर्मला ने ही राजू को प्रेरित किया था. पत्नी की प्रोत्साहना ने ही राजू को समाजसेवा के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. पत्नी निर्मला आईसीयू में बेड पर पड़ी हुयीं थी और देर रात 2 बजे पत्नी के प्रोत्साहन के बाद राजू गांधी खुद रक्तदान कर आये.

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    Tags: Bastar news, Bijapur news, Chhattisgarh news

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