• Home
  • »
  • News
  • »
  • chhattisgarh
  • »
  • नक्सल हिंसा के बाद घर छोड़ने वाले ये आदिवासी वापसी से पहले नाराज देवताओं को मनाएंगे

नक्सल हिंसा के बाद घर छोड़ने वाले ये आदिवासी वापसी से पहले नाराज देवताओं को मनाएंगे

आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में आदिवासी आज भी जल-जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ रहे हैं. 
 Demo Pic.

आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में आदिवासी आज भी जल-जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ रहे हैं. Demo Pic.

छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम के दौरान नक्सल हिंसा से परेशान होकर कई आदिवासी परिवार अपनी जमीन छोड़कर पड़ोसी राज्यों में चले गए थे.

  • Share this:
छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम के दौरान नक्सल हिंसा से परेशान होकर कई आदिवासी परिवार अपनी जमीन छोड़कर पड़ोसी राज्यों में चले गए थे. ये आदिवासी परिवार अब फिर से अपनी जमीन पर वापसी की तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए प्रशासनिक कवायद तो की ही जा रही है. साथ ही परंपरा व संस्कृति के मुताबिक ये परिवार अपने कुलदेवताओं की पूजा भी जमीन पर वापसी से पहले करने की तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए 12 और 13 जून को सुकमा में पेन पंडूम (कुल देवी-देवताओं को मनाने के लिए सामूहिक​ पूजा) की जाएगी.

दरअसल घोर नक्सल हिंसा से पीड़ित छत्तीसगढ़ के बस्तर में साल 2005 में सलवा जुडूम की शुरुआत हुई. दावा किया गया कि आदिवासी नक्सल हिंसा के खिलाफ खुद ही एकजुट हो गए हैं और उनके खिलाफ शांति की लड़ाई लड़ रहे हैं. हालांकि सलावा जुडूम के सदस्यों द्वारा हिंसा करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई और शुरू होने के करीब पांच साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसपर रोक लगा दी. इस दौरान हिंसा से पीड़ित कई आदिवासी परिवार अपनी जमीन छोड़कर पड़ोसी राज्य चले गए. तेलंगाना में विस्थापित हुए ये परिवार अब वापस छत्तीसगढ़ आने की कवायद कर रहे हैं.

वनाधिकार कानून के तहत फार्म भरते ग्रामीण. फाइल फोटो.


केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा ऐसे परिवारों से वन अधिकार कानून के तहत विस्थापन के लिए सर्वे फार्म भी भराने की कवायद शुरू कर दी गई है. इसके तहत तेलंगाना के ग्राम कृष्णा सागर (देवगुंपु ) पंचायत कृष्णा सागर ब्लॉक भूरगुमफाड़ जिला बद्रादि के कुछ आदिवासी परिवारों के आवेदन लिए गए हैं. बताया जा रहा है कि ये परिवार सलवा जुडूम के दौरान छत्तीसगढ़ से तेलंगाना चले गए थे. अब वापसी की प्रक्रिया हो रही है.

ऐसे आदिवासी परिवारों की वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे समाजसेवी व सीजीनेट स्वर के संस्थापक शुभ्रांशु चौधरी का कहना है कि आदिवासी परिवारों का मानना है कि अपनी जमीन छोड़कर जाने के बाद उनके कुल देवता नाराज हो गए हैं. वापसी से पहले उन्हें मनाना जरूरी है. इसलिए ही पेन पंडुम का आयोजन किया जा रहा है. इसमें विस्थापित हुए आदिवासी अपने कुल देवता की नाराजगी दूर करने उनसे माफी मांगेंगे. इसके लिए 12 और 13 जून की तारीख तय की गई है. पेन पंडुम बस्तर संभाग के सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र में आयोजित होगा.

ये भी पढ़ें: खतरे में है देश की एकता-अखण्डता, सबको लड़ना होगा: सीएम भूपेश बघेल 

ये भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ की इस सीट पर जीत के आंकड़े से ज्यादा वोट नोटा को, जांच की मांग कर रही बीजेपी 

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स 

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज