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BJP की किस रणनीति के तहत मोदी सरकार में मंत्री बनीं आदिवासी महिला रेणुका सिंह?

निलेश त्रिपाठी | News18Hindi
Updated: May 31, 2019, 4:04 PM IST
BJP की किस रणनीति के तहत मोदी सरकार में मंत्री बनीं आदिवासी महिला रेणुका सिंह?
Demo Pic.

क्या रेणुका सिंह को मंत्री बनाकर बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव 2023 की तैयारी शुरू कर दी है?

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लोकसभा चुनाव 2019 में छत्तीसगढ़ से सरगुजा फतेह करने वाली रेणुका सिंह (सुरता) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टीम इंडिया में शामिल किया गया है. रेणुका सिंह को जनजातीय (आदिवासी) मामलों के मंत्रालय में केन्द्रीय राज्य मंत्री का जिम्मा मिला है. आजादी के बाद ये दूसरा मौका है, जब भारत सरकार में छत्तीसगढ़ के सरगुजा से कोई मंत्री बना है. सांसद रेणुका से पहले मोरारजी देसाई की सरकार में सरगुजा से लरंग साय रेल राज्य मंत्री थे. इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद रेणुका सिंह पहली महिला सांसद हैं, जिन्हें केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया है.

मोदी-2 सरकार में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय और रामविचार नेताम जैसे दिग्गज नेताओं का नाम सबसे आगे चल रहा था. सरोज पांडेय भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव हैं और संगठन में काफी मजबूत मानी जाती हैं. रामविचार नेताम भारतीय जनता पार्टी के जनजातीय मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. इनकी भी संगठन में अच्छी पकड़ मानी जाती है.

इन दोनों के अलावा तीसरे नाम के जो कयास लगाए जा रहे थे, वो प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले विजय बघेल थे. विजय बघेल का नाम पर इसलिए अटकलें थीं, क्योंकि वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व तीन अन्य दिग्गज मंत्रियों के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र वाले दुर्ग संसदीय क्षेत्र 3 लाख 91 हजार से अधिक वोटों से जीते हैं.

रेणुका सिंह और सरोज पांडेय.


दिग्गजों को पछाड़ा
छत्तीसगढ़ के दिग्गज नेताओं की जगह नरेन्द्र मोदी सरकार की दूसरी पारी में आदिवासी नेत्री रेणुका सिंह को किस राजनीतिक समीकरण के तहत मौका दिया गया, ये समझने से पहले रेणुका सिंह की राजनीतिक हैसियत के बारे में जान लेते हैं.

लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी को 1 लाख 57 हजार से अधिक वोटों से हराने वाली रेणुका सिंह पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री रही चुकी हैं. वो अनुसूचित जनजाति की तेजतर्रार नेत्री के तौर पर भी जानी जाती हैं. रेणुका सिंह प्रेमनगर से दो बार विधायक निर्वाचित हुई हैं. 2003 से 2005 तक महिला बाल विकास मंत्री रही हैं. वे 2005 से 2013 तक सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष भी थीं.रेणुका सिंह वर्ष 2000-03 तक अविभाजित मध्यप्रदेश में भाजपा रामानुजनगर मंडल की प्रथम महिला अध्यक्ष बनी थीं. वर्ष 2000 से 2003 तक रामानुजनगर जनपद सदस्य निर्वाचित होने के अलावा 2001 से 2003 तक समाज कल्याण बोर्ड की सदस्य भी रह चुकी हैं. वर्ष 2002 से 2004 तक भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री रहीं. वर्तमान में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद भी है.

सांकेतिक फोटो.


आदिवासी महिला चेहरा और राजनीतिक समीकरण
आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में विधानसभा की कुल 90 में से 29 सीटें अनुसूचित जनजातीय वर्ग के​ लिए आरक्षित है. लगभग 32 फिसदी आदिवासी आबादी वाले इस राज्य की विधानसभा की आरक्षित सहित 45 से अधिक ऐसी सीटें हैं, जहां जीत और हार में इस वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. प्रदेश में करीब करीब 50 प्रतिशत जनसंख्या महिलाओं की है. रेणुका सिंह आदिवासी चेहरा भी हैं और महिला भी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रदेश में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी बीजेपी ने भी से शुरू कर दी है?

रेणुका सिंह.


डैमेज कंट्रोल करने की कवायद
अब बात अगर छत्तीसगढ़ में छह महीने पहले ही हुए विधानसभा चुनाव की करें तो बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था. सूबे में 15 साल तक सत्ता करने वाली बीजेपी इस चुनाव में 15 सीटों पर सिमट गई. अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित 29 में से 26 सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. आदिवासी बाहुल्य सरगुजा संभाग की सभी 14 और बस्तर संभाग की 12 में से 11 सीटें बीजेपी हार गई. बस्तर संभाग की एक जीती सीट दंतेवाड़ा सीट भी नक्सल ​हमले में विधायक भीमा मंडावी की हत्या के बाद खाली है.

लोकसभा चुनाव 2019 में भी पूर्ण रूप से आदिवासी प्रभाव वाली बस्तर सीट पर बीजेपी को हार मिली है. कांकेर में सूबे की सबसे कम अंतर की जीत बीजेपी को मिली. ऐसे में माना जा रहा है कि आदिवासी वर्ग को साधने के लिए बीजेपी ने लोकसभा चुनाव से ऐन पहले इसी वर्ग के विक्रम उसेंडी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया और अब इसी वर्ग महिला नेत्री को केन्द्र में मंत्री बनाया गया है.

जातीय समीकरण से ज्यादा छवि महत्वपूर्ण
बीजेपी नेता व सीएसआईडीसी के पूर्व अध्यक्ष छगन मूंदड़ा कहते हैं कि आदिवासी वर्ग को साधने जैसी कोई बात नहीं है. बीजेपी शुरू से ही आदिवासियों के साथ रही है. रेणुका सिंह को मंत्री बनाया जाने के पीछे उनकी अपनी छवि है. भले ही पहली बार सांसद बनी हों, लेकिन दो बार विधायक रह चुकी हैं और संगठन में भी महत्वपूर्ण पदों पर रही हैं.

पॉलिटिकल बैलेंस करने की कोशिश
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक मामलों में जानकार दिवाकर मुक्तिबोध का कहना है कि बीजेपी का पहले आदिवासी वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाना और इसके बाद अब इसी वर्ग की महिला नेत्री को केन्द्र में मंत्री बनाने से साफ है कि पार्टी आदिवासी और महिला दोनों वर्ग में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है. लेकिन अभी से चुनाव की तैयारी शुरू करने से इसे जोड़कर नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले तो निकाय व पंचायत के चुनाव होने हैं. ये भी हो सकता है कि पांच सालों में रणनीति बदले और प्रदेश से किसी और को केन्द्र में मंत्री बना दिया जाए.

फाइल फोटो.


प्रदेश से निकलने वाले कई राष्ट्रीय अखबारों में राज्य संपादक रह चुके दिवाकर मुक्तिबोध कहते हैं कि रेणुका सिंह को केन्द्र में मंत्री बनाया जाना प्रदेश में पॉलिटिकल बैलेंस बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है. इसमें भी दो तरह के बैलेंस एक विरोधी दल और दूसरा खुद की पार्टी के अंदर. विरोधी दल की बात करें तो कांग्रेस से दिग्गज नेता और वर्तमान राज्य सरकार में वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंहदेव सरगुजा से आते हैं. विधानसभा चुनाव के दौरान एक संदेश फैला कि यदि कांग्रेस की राज्य में सरकार बनेगी तो टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री होंगे. नतीजतन संभाग की सभी सीटें कांग्रेस जीत गई. लेकिन सिंहेदवे मुख्यमंत्री नहीं बने. अब बीजेपी ये संदेश देने की कोशिश करेगी कि उसने सरगुजा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व सौंपा है.

विक्रम उसेंडी और डॉ. रमन सिंह. फाइल फोटो.


खुद की पार्टी में पावर बैलेंस
दिवाकर ​मुक्तिबोध कहते हैं कि पार्टी के भीतर के बैलेंस की बात करें तो फिलहाल प्रदेश में बीजेपी दो खेमों में नजर आ रही है. एक खेमा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और दूसरा खेमा अन्य कुछ दिग्गज नेताओं का है. प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक डॉ. रमन के खेमे के माने जाते हैं. जबकि रेणुका सिंह की पहचान इस खेमे की नहीं है. ऐसे में पार्टी के अंदर पॉलिटिकल पावर बैलेंस करने के लिए रेणुका सिंह को केन्द्र में मंत्री बनाया गया है.

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First published: May 31, 2019, 4:04 PM IST
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