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Valentine's Day Special: यूक्रेन के प्रेमियों की कहानी, जिनकी 'LOVE-यात्रा' का गवाह रहा है भिलाई
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निलेश त्रिपाठी | News18 Chhattisgarh
Updated: February 14, 2020, 12:46 PM IST
Valentine's Day Special: यूक्रेन के प्रेमियों की कहानी, जिनकी 'LOVE-यात्रा' का गवाह रहा है भिलाई
दिसंबर 2003 में सपनों की दुनिया देखने यूक्रेन से एक कपल भिलाई पहुंचा था.

Valentine's Day पर न्यूज 18 यूक्रेन के ऐसे लव-कपल की कहानी बता रहा है, जो शादी से पहले बचपन के लम्हों को फिर से जीने की तमन्ना लिए छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मिनी इंडिया (India) कहे जाने वाले भिलाई (Bhilai) पहुंचा था.

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रायपुर. कहते हैं जोड़ियां भगवान बनाता है और नियति तय समय पर ऐसा संयोग लाती है कि लोग मिल ही जाते हैं. उस रोज यूक्रेन (Ukraine) के एक कैफे में ऐसे ही दो दिलों को मिलना था. कैफे में युवाओं का दो ग्रुप आमने-सामने बैठा था. संयोग ही था कि दोनों ग्रुप में बचपन की यादें ताजा हो रहीं थीं. अचानक ही अब तक अजनबी यूली और ओलेक्सी ने एक साथ एक ही नाम लिया भिलाई. जी हां, मिनी-इंडिया (Mini India) कहा जाने वाला छत्तीसगढ़ का भिलाई (Bhilai). जहां दोनों का ही बचपन बीता था. बात बढ़ी और मुलाकातें भी. फिर मुलाकातें प्यार में बदलीं और उसके बाद दोनों ने शादी का निर्णय लिया. कहानी फिल्मी सी है, लेकिन है हकीकत.

Valentine's Day पर न्यूज 18 आपको यूक्रेन के ऐसे ही एक लव कपल की कहानी बता रहा है, जो शादी से पहले अपनी बचपन के लम्हों को फिर से जीने भिलाई पहुंचा था. शादी से पहले इस लव यात्रा (Love Yatra) को नाम दिया प्री-हनीमून. बात पुरानी है, लेकिन प्यार की कहानियों की जब भी बात होती है, भिलाई में इस प्रेमी जोड़े का जिक्र जरूर होता है.

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यूक्रेन से भिलाई पहुंचे यूली और ओलेक्सी की ये तस्वीर मो. जाकिर हुसैन ने ली थी, उन्होंने न्यूज 18 को नि:शर्त ये तस्वीर उपलब्ध कराई.


भिलाई का जिक्र और मिल गए दो दिल

भिलाई के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मो. जाकिर हुसैन ने 3 दिसंबर 2003 को यूक्रेन से भिलाई पहुंचे प्रेमी जोड़े से खास बातचीत की थी. मो. जाकिर ने भिलाई के इतिहास पर लिखी गई अपनी किताब 'वोल्गा से शिवनाथ तक' में इस स्टोरी को खास जगह दी है. जाकिर बताते हैं- भिलाई में बिताए बचपन की यादों ने फिर से दो दिलों को मिला दिया. सात समंदर पार दो अंजान चेहरे अपने-अपने दोस्तों के साथ एक कैफे में आमने-सामने थे और न जाने कहां से भिलाई का जिक्र आ गया. बात बढ़ती गई और पता चला कि दोनों 'अजनबी' तो बचपन में एक-दूसरे से वाकिफ थे. बस फिर क्या था, मुलाकातें बढ़ती गईं और एक दूसरे का जीवन साथी बनने का फैसला कर लिया. इसके साथ ही तय हुआ कि फिर एक बार अपनी बचपन की यादों को ताजा करने भिलाई चलें.

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यूक्रेन के एक कैफे में दोनों की मुलाकात हुई थी.


..तो शुरू हुआ बातचीत का सिलसिलाजाकिर बताते हैं- यूक्रेन के ओलेक्सी और यूली अपनी ढेर सारी यादें लेकर 3 दिसंबर 2003 को भिलाई पहुंचे. दिनभर भिलाई घूमने के बाद थके-मांदे लौटे यूली-ओलेक्सी से मेरी यादगार मुलाकात हुई. इस मुलाकात का जरिया बने बीएसपी के रिटायर अफसर वीएन मजुमदार. मजुमदार की पत्नी लुद्मिला (उमा) भी रशिया मूल की हैं. ओलेस्की और यूली भिलाई आने के बाद सबसे पहले मजुमदार के आमदी नगर हुडको स्थित घर पहुंचे थे. कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे और अब एक स्वतंत्र देश यूक्रेन से भिलाई पहुंचे शेवचेंको ओलेस्की और फिनोगेंतोवा यूली के लिए यहां उनके सपनों की दुनिया थी, लिहाजा यहां पहुंच कर दोनों अपनी इस दुनिया में जीभर कर घूमे.

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बचपन के दो बरस दोनों ने भिलाई में बिताए थे.


सपने की दुनिया
जाकिर बताते हैं कि बातचीत यूली ने कहा- हमने अपने बचपन के दो बरस इस शहर में बिताए हैं, इसलिए 25 बरस बाद यहां आना एक सपने के सच होने जैसे लगा. ओलेस्की ने भी कहा- यहां आने पर ऐसा लगा जैसा हमारा बचपन लौट आया. यूली ने बताया कि मेरे पिता यूरी पेत्रेंको यहां भिलाई स्टील प्लांट के प्लेट मिल और ओलेस्की के पिता वसीली शेफचेको स्टील मेल्टिंग शॉप-2 निर्माण के दौरान सोवियत इंजीनियर के रूप में सेवारत थे. 1976 से 1978 तक हम लोग दूसरे अन्य रशियन परिवारों के साथ भिलाई होटल (अब भिलाई निवास) में रहते थे. लेकिन यहां से अपने मुल्क लौटने के बाद सब कुछ पीछे छूट गया. फिर अचानक एक दिन सारी यादें जीवंत हो उठी.

कैफे में मुलाकात
मो. जाकिर के मुताबिक हंसते हुए ओलेस्की ने कहा- इस साल (2003) मई महीने की बात है एक दूसरे से अंजान हम लोग मरियोपुल (पूर्व नाम ज्दानो) शहर के एक कैफे में दोस्तों के साथ बैठे थे. अचानक बचपन की यादें और दुनिया के अलग-अलग शहरों के बारे में कुछ बातें निकली तो हम दोनों के मुंह से 'भिलाई' का नाम निकला. हैरत भरी नजरों से हमने एक-दूसरे को देखते हुए सवाल किया कि तुम भिलाई को कैसे जानते हो? बस फिर क्या था बातें निकली और भिलाई, दुर्ग, सिविक सेंटर, प्लेटमिल, खरखरा डैम, भिलाई होटल, मैत्रीबाग, भिलाई क्लब..., न जाने और क्या-क्या.  कैफे तो अपने वक्त पर बंद हो गया, लेकिन 25 साल पुरानी बचपन की बातें हम दोनों को सारी रात रोमांचित करती रहीं.

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भिलाई के एक घर में अपनी मां के साथ यूली.


बचपन की तस्वीरों ने बढ़ाया प्यार
मो. जाकिर के मुताबिक हंसते हुए ओलेस्की ने बताया- अगली सुबह यूली मुझे अपने घर ले गईं और भिलाई में बचपन की कई तस्वीरें दिखाईं. इसके बाद भिलाई की बातें रोज होने लगी और हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई. अब हम लोगों ने घर बसाने का फैसला कर लिया था तभी हमने यह भी तय कर लिया था कि शादी से पहले एक बार भिलाई-दुर्ग जरूर जाएंगे. इसलिए आज हम लोग पर्यटक वीजा पर यहां आए है. यूली बताती है- भिलाई होटल के कमरा नं. 20 में हम लोग रहते है. हमारे और भी रशियन दोस्त थे. सारा दिन हम लोग धमा-चौकड़ी मचाते थे. अक्सर मम्मी-पापा के साथ हम लोग मैत्रीबाग, बोरिया बाजार, चित्रमंदिर जैसे जगहों पर जाते थे. दो दशक बाद बाद भिलाई में आकर कैसा महसूस हुआ? यह पूछने पर यूली थोड़ा सा भावुक होते हुए बोली- मैं तो कमरा नं. 20 को काफी देर निहारती रही फिर हम दोनों खरखरा डेम चले गए. क्योंकि यहां अक्सर हम लोग पिकनिक के लिए आते थे.

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भिलाई में रशियन बच्चों के बचपन की तस्वीर.


..तो बनाया भिलाई यूनियन
जाकिर ने बताया कि बचपन की फोटो दिखाते हुए यूली बताने लगी यह सारे-सारे के बच्चे आज भी एक ही शहर मरियोपोल में है और हम लोगों ने सबको खोज निकाला है. वह बताने लगी कि इनमें नजर आ रही आन्या, मार्तिनोवा, तुचियाना-क्रिवाको बलीस्का, ओलेग बेलाकोन और आन्या रस्तोव्यस्का, अब हमारे पक्के दोस्त हैं. इस फोटो में हिंदुस्तानी नृत्य के लिबास में नजर आ रही यूली हंसते हुए बोली- मुझे इंडियन कल्चर अच्छा लगता है. अब एक बड़े वाणिज्यिक संस्थान में बतौर प्रतिनिधि कार्यरत यूली और युक्रेन की ही एक फैक्स कंपनी में प्रतिनिधि ओलिस्की ने बताया कि वे भिलाई से अपने बचपन की खुशनुमा यादों को लेकर लौट रहे हैं. फिर अगली बार भिलाई कब आना होगा? यह पूछने पर दोनों हंसते हुए बोले- अभी तो हम यूक्रेन जाकर शादी करेंगे फिर आने वाले कुछ सालों बाद हम जरूर आएंगे, अपने बच्चों के साथ. इसके बाद दोनों युगल सिविक सेंटर की ओर तफरीह के लिए निकल पड़े.

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First published: February 14, 2020, 11:42 AM IST
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