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अनोखा संकल्प: शराबी दूल्हे संग और बिना शौचालय के ससुराल में नहीं ब्याहेंगे बेटियां

अनोखा संकल्प: शराबी दूल्हे संग और बिना शौचालय के ससुराल में नहीं ब्याहेंगे बेटियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है. इसी के तहत छत्तीसगढ़ के इस गांव में लोगों ने यज्ञ कुंड की अग्नि को साक्षी मानकर एक ऐसा संकल्प लिया, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है. इसी के तहत छत्तीसगढ़ के इस गांव में लोगों ने यज्ञ कुंड की अग्नि को साक्षी मानकर एक ऐसा संकल्प लिया, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है.

    छत्तीसगढ़ के धमतरी स्थित लीलर गांव में ग्रमीणों ने यज्ञ कुंड की अग्नि को साक्षी मानकर संकल्प लिया है कि उनकी बेटी ऐसे घर में नहीं ब्याही जाएगी जिस घर में शौचालय नहीं हो. साथ ही उन्होंने इस बात का भी प्रण लिया कि शराबी युवक के हाथ में अपनी लाडली का हाथ नहीं सौंपेंगे.

    प्रधानमंत्री ने सफाई के मामले में देश की आदत बदलने का संकल्प लिया है. उनके आह्वान पर देशभर में चल रहे इस जनआंदोलन में लोगों की सहभागिता भी बढ़ रही है. लगभग तीन साल बाद इसका असर दिखना भी शुरू हो गया है. धमतरी जिले के लीलर गांव के हर माता-पिता ने गायत्री यज्ञ कुंड की अग्नि को साक्षी मानकर यह संकल्प लिया है.

    साथ ही उन लोगों ने इस बात का भी संकल्प लिया कि जिस घर के युवक नशे के आदी नहीं हो उसी घर में अपनी बेटी की शादी करेंगे या बहु लाएंगे. इसके लिए ग्रामीणों ने एक प्रवधान किया है कि शादी से पहले नशे से दूरी और स्वच्छाता का प्रमाण पत्र देने पर ही दो परिवारों के बीच रिश्ता होगी.

    स्वच्छ और नशामुक्त समाज के इस संकल्प के साथ ही लीलर गांव ने खुद का दर्जा अन्य गांवों से ऊपर कर लिया है. मां-बाप चाहते हैं कि उनकी बेटी का जीवनसाथी शराबी न हो साथ ही उनकी बेटी को ससुराल में शौच के लिए सम्मान दांव पर न लगाना पड़े.

    दरअसल ये लीलर में लोगों की खुले में शौच की आदत बदलने का नतीजा है. स्वच्छता अभियान के बाद लीलर ओडीएफ हो गया है. यहां के लोग अब खुले में शौच के लिये नहीं जाते हैं. इसके बाद ही गांव के लोगों को अपनी बेटियों के सम्मान की कीमत का एहसास हुआ.

    वहां की बेटियों का मनना है कि लीलर की बेटियां शिक्षित हैं साथ ही वो नए जमाने का साथ चलना चाहती हैं. गांव के लकीर की फकीर वाली अनावश्यक प्रचलनों से मुक्त वो भी अब दुनिया की रेस में शामिल होना चाहती हैं. ये संकल्प इस रेस की शुरूआत है.

    जिले को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य जिला प्रशासन को हासिल करना है. लीलर के संकल्प ने जिला प्रशासन का उत्साह बढ़ाया है. अब इस आइडिया को अन्य गांवो में भी लागू किया जा सकता है. कुंवरबाई ने स्वच्छता अभियान की शुरूआत में जिले का नाम रोशन किया. अब लीलर गांव की ये पहल भी सारे देश के लिये एक मिसाल बन सकती है. इसमें कोई शक नहीं है कि अगर लीलर की तर्ज पर समाज ने स्वच्छता और नशे पर संकल्प लिया तो आने वाला भारत न सिर्फ नशा मुत्क होगा बल्कि स्वच्छ भी बनेगा.

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