...यहां क्रिकेट को कहा जाएगा 'कंदुक क्रीड़ा' और फुटबॉल होगा 'पाद कंदुकम्'

संस्कृत को बढ़ावा देने छत्तीसगढ़ सरकार नई पहल कर रही है. इसके तहत खेलों के नाम संस्कृत में पढ़ाने का निर्णय लेने की तैयारी चल रही है.

News18 Chhattisgarh
Updated: June 12, 2019, 10:55 PM IST
...यहां क्रिकेट को कहा जाएगा 'कंदुक क्रीड़ा' और फुटबॉल होगा 'पाद कंदुकम्'
संस्कृत को बढ़ावा देने छत्तीसगढ़ शासन खेलों में नई पहल कर रहा है. सांकेतिक तस्वीर.
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Updated: June 12, 2019, 10:55 PM IST
संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ शासन नई पहल कर रहा है. इसके तहत खेलों के नाम संस्कृत में पढ़ाने का निर्णय सरकार लिया गया है. इसका सिलेबस भी तैयार किया जा चुका है. खेलों के संस्कृत नाम भी निकाल लिए गए हैं. जल्द ही शासन इसे अमलीजामा पहनाने जा रहा है. संस्कृत में तकनीकी शब्दावली होगी. संस्कृत विद्या मंडलम् व्यापक रिसर्च कर चरणबद्ध तरीके से इसे तैयार करेगा.

नए शिक्षा सत्र से राज्य के संस्कृत स्कूलों में खेलों को उनके प्रचलित नामों की जगह संस्कृत में पुकारने की तैयारी भी है. खेलकूद प्रतियोगिता में संस्कृत भाषा में ही कॉमेंट्री भी होगी. दरअसल, इसका मकसद प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देना है. साथ ही खेलों में भी संस्कृत के प्रयोग को प्रोत्साहित करना है. इसके तहत ही इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है.



क्रिकेट होगा कंदुक क्रीड़ा
तैयार शब्दावली के तहत क्रिकेट को कंदुक क्रीड़ा, फुटबॉल को पाद कंदुकम्, बॉस्केटबॉल को हस्तपाद कंदुकम्, वॉलीवाल को अपाद कंदुकम्, टेबल टेनिस को उत्पीठिका कंदुकम्, बैडमिंटन को खगक्षेपण क्रीड़ा, दौड़ को धावनम्, कबड्डी को कबड्डी ध्वनि क्रीड़ा, खोखो को खो ध्वनि क्रीड़ा, कुश्ती को मल्लयुद्धम्, लइका मड़ई को बाल मेलापक कहा जाएगा.

संस्‍कृत में नाम के लिए रिसर्च
स्थानीय स्तर पर प्रचलित खेलों के नियम-कायदों के अलावा पिट्ठू बिल्लस जैसे स्थानीय खेलों के नियम और नामों का भी संस्कृत में अनुवाद किया जाएगा. खेलों के नाम संस्कृत में कैसे बोले जाएंगे? इसके लिए भी रिसर्च की जाएगी. इसके तहत क्रिकेट में जोरदार चौके के लिए सिद्ध चतुष्कम्, रन के लिए धावनांक, आउट के लिए निर्गत, कैच के लिए ग्रहणम्, शानदार शॉट के लिए षुष्ठु प्रहार जैसे शब्‍दों का उपयोग किया जाएगा. गेंद के बाउंड्री पार करने पर कंदुक परिधि लंघनम् कहा जाएगा.

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