हिंदू लड़की से शादी करने वाले मुस्लिम युवक से SC ने कहा- हम महिला का सुरक्षित भविष्य चाहते हैं

एहतेशाम खान | News18Hindi
Updated: September 11, 2019, 6:56 PM IST
हिंदू लड़की से शादी करने वाले मुस्लिम युवक से SC ने कहा- हम महिला का सुरक्षित भविष्य चाहते हैं
सुप्रीम कोर्ट ने इब्राहिम को इस बाबत हलफनामा देने को कहा कि उसने शादी के बाद से क्या किया है. (File Photo)

जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, 'कोर्ट (Supreme Court) अंतर धार्मिक शादी (Inter Religious Marriage) के विरोध में नहीं है. लेकिन वह चाहता है कि महिला का भविष्य सुरक्षित हो. कई बार ऐसी शादियां गलत मकसद से की जाती हैं. और महिला पीड़ित रह जाती है.'

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नई दिल्ली. एक अंतर धार्मिक विवाह (Inter Religious Marriage) के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पति को हिदायत देते हुए कहा कि आप सिर्फ एक अच्छे प्रेमी ही नहीं, एक वफादार पति भी बनें. ये मामला छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का है. यहां इब्राहिम सिद्दीक़ी नाम के एक मुस्लिम युवक ने हिंदू लड़की अंजलि से शादी कर ली. इसके लिए वो अपना धर्म बदलकर मुस्लिम से हिंदू बन गया. जिसके बाद आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी हुई. लड़के ने अपना नाम बदल लिया. पिछले साल लड़की के पिता ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) में याचिका दाखिल कर कहा कि उसकी लड़की गायब है और उसे हाज़िर किया जाए. कोर्ट में लड़की ने बयान दिया कि वो अपने मां-बाप के साथ रहना चाहती है. इस पर हाईकोर्ट ने लड़की को उसके मां-बाप को सौंप दिया.

हाईकोर्ट के फैसले के बाद पति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट में भी लड़की ने मां-बाप के साथ रहने की बात कही. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अपनी मुहर लगा दी.

इसके बाद इस साल फिर पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उसने अंजलि से शादी की है और वो उसे वापस चाहता है. इस बार अंजलि ने हाईकोर्ट में अपने बयान में कहा कि वो अपने पति के साथ रहना चाहती है. इस पर हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए अंजलि को इब्राहिम के साथ भेज दिया.

पिता ने याचिका दाखिल कर कहा ये धर्मांतरण का मामला है

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अंजलि के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि ये धर्मांतरण का मामला है. इब्राहिम फिर से मुसलमान हो गया है. इसलिए उन्हें उनकी बेटी वापस की जाए. इस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और इब्राहिम को इस बाबत हलफनामा देने को कहा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने शादी के बाद से क्या किया है. अगर वो हिंदू बन गया है तो क्या उसने अपना नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की है.

जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, 'कोर्ट अंतर धार्मिक शादी के विरोध में नहीं है. लेकिन वो चाहता है कि महिला का भविष्य सुरक्षित हो. कई बार ऐसी शादियां गलत मकसद से की जाती हैं और महिला पीड़ित बनकर रह जाती है.' अब इस मामले की सुनवाई अगले महीने होगी.

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First published: September 11, 2019, 4:21 PM IST
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