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जानें कौन है नान घोटाले की जांच करने वाले विवादित आईपीएस एसआरपी कल्लूरी

SRP kalluri (File Photo)

SRP kalluri (File Photo)

कांग्रेस सरकार ने आईपीएस अधिकारी शिवराम प्रसाद कल्लूरी को एंटी करप्शन ब्यूरो और इकनॉमिक ऑफ़ेंस विंग की भी जिम्मादारी सौंपी है.

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छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब विपक्ष में थे तक कई कई बार उन्होने आईपीएस ऑफिसर एसआरपी कल्लूरी को आड़े हाथों लिया. भूपेश बघेल ने कल्लूरी को जेल भेजने तक की मांग कर दी थी. अब सत्ता में आने के बाद जब विभागों का बंटवारा किया जा रहा था, तब उनके द्वारा लिए गए एक फैसले ने न सिर्फ रातों रात सुर्खियां बटोरी बल्कि राजनीतिक-प्रशासनिक गलियारें का गॉसिप सेंटर भी बन गई. कांग्रेस सरकार ने आईपीएस अधिकारी शिवराम प्रसाद कल्लूरी को एंटी करप्शन ब्यूरो और इकनॉमिक ऑफ़ेंस विंग की जिम्मादारी सौंपी.

कांग्रेस ने जिस अफसर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था उसी अफसर को करप्शन हटाने की जिम्मेदारी सौंपी है. सूत्रों की मानें तो एसआरपी कल्लूरी बीजेपी और आरएसएस के क़रीबी माने जाते है. इस वजह से कांग्रेस ने कई बार उन्हे बर्खास्त करने की भी मांग की थी. लेकिन अब ACB और EOW जैसे विभागों की जिम्मेदारी देकर सबकों हैरान करने वाला फैसला लिया. बता दें कि बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति निगम घोटला मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया गया है. एसआरपी कल्लूरी को नान घोटाले की जांच के लिए बनी एसआईटी का प्रभारी भी बनाया गया है.

जानें एसआरपी कल्लूरी से जुड़े मुख्य विवाद:

1994 बैच के आईपीएस अफसर शिवराम प्रसाद कल्लूरी की पोस्टिंग जब सरगुजा थी तब माओवादियों के खिलाफ उन्होने कई अभियान चलाए जिसके लिए वे काफी चर्चा में रहे. इस दौरान कई माओवादियों ने आत्मसमर्ण किया तो कई मुठभेड़ में मार गिराए गए. इसी दौरान उन पर फर्ज़ी मुठभेड़ और आदिवासी महिलाओं से बलात्कार के संगीन आरोप भी लगे. इसी दौरान उन्हे ये एलान कर दिया था कि सरगुजा माओवाद मुक्त हो गया है लेकिन राज्य और केंद्र सरकार ने इनके दावों के नकारते हुए सरगुजा को माओवाद प्रभावित इलाकों की लिस्ट में ही रखा.

2006 में एसआरपी कल्लूरी को भारत सरकार ने वीरता के लिए पुलिस मेडल से सम्मानित किया. माओवादियों के ख़िलाफ़ आक्रामक रणनीति और कई एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाने के कारण तत्कालीन भाजपा सरकार ने उन्हे नक्सल ऑपरेशन का डीआईजी बनाया था और पोस्टिंग दंतेवाड़ा में की थी. 2010 में हुए ताड़मेटला हमले में कल्लूरी की आलोचना भी हुई. इस हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे.

इसी दौरान ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुरम में सुरक्षाबलों के जवानों पर तीन महिलाओं की हत्या, बलात्कार और 252 घरों को जलाने का गंभीर आरोप लगा. इस घटना के लिए कल्लूरी ने माओवादियों को जिम्मेदार ठहराया था और फोर्स पर लगे आरोपों को गलत करार दिया था. लेकिन सीबीआई जांच में कल्लूरी के दावों के गलत पाया गया और इस घटना में जवानों की ही संलिप्तता बताई थी. दोरनापाल में सलवा जुड़ूम समर्थकों द्वारा स्वामी अग्निवेश पर हमले के मामले में भी कल्लूरी का ही नाम सामने आया था.

फ़रवरी 2017 में शिवराम प्रसाद कल्लूरी बस्तर से हटा दिया गया था. तब वे बस्तर में आईजी के पद पर थे. फ़र्ज़ी मुठभेड़, आत्मसमर्पण और मानवाधिकार हनन जैसे कई गंभीर आरोप उन पर लगे थे. इसके बाद उन्हे पुलिस मुख्यालय में अटैच कर दिया गया था. तत्कालीन भाजपा सरकार ने उन्हे लंबे समय तक कोई ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी थी. मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर भी तब एसआरपी कल्लूरी आ गए थे.

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