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Chhattisgarh Election Result 2018: 18 के अखाड़े में क्यों बार-बार अजीत जोगी ने रणनीति बदली
Raipur News in Hindi

निलेश त्रिपाठी | News18Hindi
Updated: December 11, 2018, 8:47 AM IST
Chhattisgarh Election Result 2018: 18 के अखाड़े में क्यों बार-बार अजीत जोगी ने रणनीति बदली
अजीत जोगी. फाइल फोटो.

Chhattisgarh Election Result 2018 (छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव परिणाम): साल 2018 के चुनावी अखाड़े में अजीत जोगी ने कब-कब अपनी घोषणा के बाद भी रणनीति में बड़ा बदलाव कर लोगों को चौंकाया. यहां जानें

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  • Last Updated: December 11, 2018, 8:47 AM IST
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राजनीति के महारथी माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री व जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के सुप्रीमो अजीत जोगी के विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान ने सबको चौंका दिया था. अजीत जोगी के इस निर्णय के राजनीतिक गलियारों में अपने-अपने मायने निकाले जा रहे थे. अजीत जोगी की बदलती रणनीती के मायनों को समझने की कोशिश करें, इससे पहले जान लेते हैं कि साल 2018 के चुनावी अखाड़े में अजीत जोगी ने कब-कब अपनी घोषणा के बाद भी रणनीति में बड़ा बदलाव कर लोगों को चौंकाया.

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कांग्रेस से बागी होकर अपनी अलग पार्टी बनाने वाले अजीत जोगी ने इसी साल 4 फरवरी को ऐलान किया था कि वे प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह के खिलाफ उनकी सीट राजनांदगांव से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. इस घोषणा की आधिकारिक जानकारी देते हुए जोगी की पार्टी के दो-दो प्रवक्ता सुब्रत डे और संजीव अग्रवाल ने कहा था कि-
''अजीत जोगी 14 सालों के कुशासन, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन से काफी आहत हैं. इसलिए उन्होंने अगला चुनाव रमन सिंह के खिलाफ लड़ने की घोषणा की है.''


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बता दें कि इससे पहले अजीत जोगी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के खिलाफ कसडोल सीट से चुनाव लड़ने और बाद में अपनी पारंपरिक सीट मानी जाने वाली मरवाही से भी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. लेकिन अब अजीत जोगी ने चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया है. चुनाव लड़ना ही नहीं 18 के अखाड़े में अपनी पार्टी का राष्ट्रीय दल से गठंधन को लेकर भी अजीत जोगी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है.


दिल्ली में अजीत जोगी से मिलने पहुंची मायावती. फाइल फोटो.

गंभीर बीमारी का इलाज कराकर दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ले रहे अजीत जोगी से 4 जुलाई 2018 को मायावती मिलने पहुंची. करीब दो घंटे की इस मुलाकात के बाद इस विधानसभा चुनाव में अजीत जोगी की पार्टी और बसपा के बीच गठबंधन की अटकलें लगाई जाने लगीं. इसके बाद 6 जुलाई को मीडिया से चर्चा में अजीत जोगी ने साफ किया कि मायवती से मुलाकात में गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई.
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दिल्ली से रायपुर लौटने के बाद 7 अगस्त को अजीत जोगी ने एक प्रेसवार्ता में कहा-
''राष्ट्रीय पार्टी से गठबंधन क्षेत्रीय पार्टी की नीति के खिलाफ है. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ आने वाले विधानसभा चुनाव में किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी. पार्टी सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.''
इस ऐलान के बाद 20 सितंबर को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में अजीत जोगी के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में बसपा प्रमुख मायावती ने अजीत जोगी की पार्टी से गठबंधन में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. दोनों पार्टियाें की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा अजीत जोगी को बनाया गया.

इतना ही नहीं बसपा के बाद बस्तर की दो सीटों के लिए सीपीआई से गठबंधन और बहू ऋचा जोगी को बसपा की सदस्यता लेने को भी इस चुनाव में अजीत जोगी की रणनीति में बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है. बहरहाल अजीत जोगी द्वारा बार-बार रणनीति में परिवर्तन को लेकर बयान और अटकलों का दौर है. कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जोगी-माया गठबंधन को ठीक-ठाक सफलता मिलती है, तो भविष्य में अजीत जोगी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बसपा का प्रमुख चेहरा हो सकते हैं. इसलिए ही उन्होंने गठबंधन के सभी वरिष्ठ नेताओं एवं पदाधिकारियों का सुझाव मान लिया और चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया.


वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन.
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन कहते हैं कि अजीत जोगी कब क्या कहेंगे और क्या करेंगे इस पर अनुमान लगा पाना मुश्किल है. हालांकि ललित सुरजन इससे सहमत नहीं हैं कि अजीत जोगी ने भविष्य में बसपा का प्रमुख चेहरा बनने की उम्मीद में चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया हो. वे कहते हैं कि अजीत जोगी की अधिक रुचि अब राजनीति में नहीं रही. जोगी जी का एकमात्र लक्ष्य नजर आता है कि कांग्रेस हारे और उनके परिवार के सदस्यों को राजनीति में जल्द से जल्द कोई ऊंचा मुकाम मिले. चुनाव के बाद में यदि कुछ सीटें जोगी-माया गठबंधन के पास आती हैं तो इस बात की प्रबल संभावना है कि अजीत जोगी नए सिरे से कोई समीकरण बनाएं और बसपा को अधर में छोड़ दें.

राजनीतिक मामलों के जानकार और पेशे से चिकित्सक डॉ. विक्रम सिंघल कहते हैं कि अजीत जोगी का चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय चौंकाने वाला है. क्योंकि जोगी-माया गठबंधन में वे खुद मुख्यमंत्री का चेहरा हैं. ऐसे में यदि उनके गठबंधन की सरकार बनती है तो उन्हें मुख्यमंत्री बनने के लिए चुनाव तो लड़ना ही पड़ेगा, क्योंकि विधानपरिषद की व्यवस्था नहीं है.

अजीत जोगी के चुनाव न लड़ने के निर्णय के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने भी बयान दिया है. मीडिया से चर्चा में भूपेश बघेल ने अजीत जोगी पर निशाना साधते हुए कहा कि- कहीं जोगी का समझौता रामदयाल उइके की तरह बीजेपी से तो नहीं हो गया? बता दें कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल उइके कुछ दिन पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे.

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भातरीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का कहना है कि अजीत जोगी ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने का सगूफा छोड़ा था. कांग्रेस के भूपेश बघेल हों या अजीत जोगी दोनों का काम सनसनी फैलान ही रह गया है. बहरहाल चुनावी अखाड़े में अजीत जोगी की बदलती रणनीति का लाभ उनकी पार्टी को कितना मिलता है, ये तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे, लेकिन अहम वक्त पर रणनीति में बदलाव कर उन्होंने सबको चौंक जरूर दिया है.

जानिए कैसे राजनीति में आए अजीत जोगी 

बता दें कि अजीत जोगी भोपाल के एमएसीटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके कुछ दिन अध्यापन कार्य भी किया. इसके बाद साल 1968 में यूपीएससी में सफल हुए और आईपीएस बने. इसके बाद दो साल बाद ही वे फिर यूपीएससी में शामिल हुए और आईपीएस बन गए. फिर मध्यप्रदेश शासन काल में 14 साल तक अलग अलग जिलों में कलेक्टर रहे. कहा जाता है कि कलेक्टर रहते हुए उनकी नजदिकियां कांग्रेस के बड़े नेताओं से रही. साल 1998 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव रायगढ़ से चुनाव लड़े और जीत मिली. ये उनके राजनीतिक कॅरियर का आगाज था. साल 2000 में छत्तीसगढ़ गठन के बाद उन्हें प्रदेश का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया.

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First published: December 11, 2018, 8:40 AM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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