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काले चावल का शुगर फ्री केक बनाकर फेमस हुईं महिलाएं, मिठाइयों ने बढ़ाई कमाई, जानें इनकम

काले चावल का शुगर फ्री केक बनाकर फेमस हुईं महिलाएं, मिठाइयों ने बढ़ाई कमाई, जानें इनकम

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की महिलाएं शुगर फ्री केक बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की महिलाएं शुगर फ्री केक बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में संचालित स्वसहायता समूह की महिलाएं शुग्रर फ्री केक और मिठाइयां बनाकर फेमश हो गई हैं. कोरोनाकाल में अपने पति को खोने वाली ये महिलाएं काले चावल, कोदो व कुटकी से शुग्रर फ्री केक और मिठाइयां बनाती हैं. इनकी बनाई मिठाइयों की मांग छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों में भी हो रही है. इस बिजनेस में इन्हें महीने में एक लाख रुपये से ज्यादा की इनकम हो रही है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ की स्व सहायता समूह की महिलाएं केक और पेस्ट्री बनाकर महीने में एक से डेढ़ लाख रुपए तक कमा रही हैं. महिलाओं की यह केक और पेस्ट्री मार्केट में मिलने वाले इस तरह के उत्पादों से काफी अलग है. स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए यह उत्पाद शुगर फ्री होने के साथ-साथ सेहत से भरपूर भी हैं. सेहत से भरपूर केक और पेस्ट्री तैयार करने वाली है महिलाएं जागृति महामाया स्व सहायता समूह रायपुर की हैं. इन महिलाओं ने  ‘वाव नेचर’ के नाम से अपना स्टार्टअप तैयार किया है, जिसमें स्व सहायता समूह की महिलाएं हेल्थ कॉन्शियस फूड प्रोडक्ट और डेजर्ट तैयार कर रही हैं. इनके प्रोडक्ट की मांग छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों में भी हो रही है.

महिलाओं का यह उत्पाद शुगर फ्री और सेहत को लिए फायदेमंद कोदो, कुटकी, ब्लैक राइस और रागी से तैयार किया जा रहा है. महिला स्व सहायता समूह के अध्यक्ष टिकेश्वरी सिन्हा ने बताया कि पहले मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत उन्होंने रागी बिस्किट तैयार किया था, लेकिन इसके बाद कोदो कुटकी रागी और ब्लैक राइस के औषधीय गुण को स्वादिष्ट डेज़र्ट में तैयार करने की सोची और महिला स्व सहायता समूह को बकायदा इसका प्रशिक्षण दिया गया और लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए प्रोडक्ट तैयार किए गए.

महिलाओं ने शुरू किया स्टार्टअप
टिकेश्वरी सिन्हा ने बताया कि उनके स्व सहायता समूह में अभी 12 महिलाएं हैं और उनके अंडर में 40 और महिलाएं इस स्टार्टअप से जुड़ चुकी है. ऐसी महिलाएं जिन्होंने कोरोना काल के दौरान अपने पति को खोया है, उन्हें समूह में शामिल कर हुनरमंद बनाने के साथ रोजगार भी दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि वह अपना प्रोडक्ट आम ग्राहकों को तो भेजते ही हैं. साथ ही सहकारी दुग्ध संघ के अंतर्गत आने वाले देवभोग को भी वह अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए सप्लाई करते हैं. इससे उनका समूह हर महीने एक से डेढ़ लाख रुपये कमा रहा है.

Tags: Food business, Raipur news

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