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राजनांदगांव: 16 सालों में 42 नक्सलियों ने किया सरेंडर, बोले- अब हम जी रहे खुशहाल जिंदगी

राजनांदगांव में 16 साल में 42 नक्सलियों ने समर्पण किया है.

राजनांदगांव में 16 साल में 42 नक्सलियों ने समर्पण किया है.

छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव जिला मई 2009 में तब पूरे देश में सुर्खियों में आया, जब नक्सली हमले में जिला पुलिस कप्तान समेत 32 जवान शहीद हो गए थे. राजनंदगांव जिले को नक्सल गढ़ की संज्ञा दी जाने लगी. जिले के ज्यादातर वनांचल क्षेत्र नक्सल प्रभावित हैं. लेकिन राहत की बात है कि साल 2007  से 2022 अब तक 42 नक्सलियों ने समर्पण किया है.

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राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ के दुर्ग संभाग के राजनंदगांव जिले को नक्सल प्रभावित जिले के रूप में जाना जाता है. राजनांदगांव जिले के ज्यादातर वनांचल क्षेत्र नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आते हैं. यहां साल 2007  से 2022 अब तक 42 नक्सलियों ने समर्पण किया है, जिसमें महिलाएं और पुरुष शामिल हैं. प्रदेश सरकार का दावा है कि पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने समर्पण किया है. जंगलों की खाक छानने वाले और हाथों में बंदूक लिए घूमने वाले नक्सलि अब अपने परिवार के साथ शहर में रह रहे हैं.

अर्बन नेटवर्क में काम करने वाले समर्पित नक्सली नंदू बेहाड़े उर्फ बंटी ने बताया कि वह 2005 व 2006 से नक्सल संगठन से जुड़ा अर्बन नेटवर्क में काम किया. इसके बाद वह लगातार इस संगठन में काम करते हुए 2010 से जंगल में नक्सलियों के साथ संगठन में काम करने लगा. नरेंद्र तेल तुमडे जैसे बड़े नक्सली लीडर के साथ रहकर संगठन की गतिविधियों का आगे बढ़ाएं. शासन की नीति से प्रभावित होकर प्रदेश सरकार की पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर उसने 13 फरवरी 2019 को राजनांदगांव पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया. यह समर्पित नक्सली महाराष्ट्र का रहने वाला है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव पुलिस के समक्ष समर्पण किया. यहां अब खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं.

योजना से प्रभावित होने का दावा
समर्पित नक्सली सरिता मंडावी का कहना है कि जंगल में जब नक्सली थे. तब जंगल में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. बारिश के समय समस्या होती थी. पीने के पानी की समस्या होती थी. गर्मी में कई बार तो भूखे रहना पड़ता था. अब छत्तीसगढ़ शासन के पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर समर्पण करने के बाद जीवन में परिवर्तन आया है. नौकरी कर रही हूं और अपने परिवार के लोगों के साथ रह रहे हैं. शहर में रह रहे हैं और अच्छी सुविधाएं मिल रही हैं और अपने बच्चों को पढ़ा लिखा पा रहे हो सरिता ने 2011 में नक्सल संगठन में प्रवेश किया था और नक्सली बन गई थी, जिसके बाद शासन की योजनाओं से प्रभावित होकर सरिता ने 2019 में आत्मसमर्पण कर दिया और वह अब अच्छी जिंदगी जी रही है जंगल के जिंदगी का दर्द उसने बयां किया.

राजनांदगांव एसपी प्रफुल ठाकुर शासन की योजना से प्रभावित होकर 2007 से अब तक लगभग 42 से अधिक नक्सलियों ने समर्पित किया है, जिसमें नक्सली दंपत्ति शामिल है. ज्यादातर समर्पित नक्सलियों को जिला मुख्यालय में रखा गया है. बहरहाल जंगल और बीहड़ों में अपना जीवन बिताने वाले और जंगलों में कई समस्याओं से जूझते हुए नक्सली संगठन चलाते हैं और लोगों को बरगला कर संगठन में प्रवेश कराते हैं. लेकिन शासन की महती योजनाओ और इस लाल आतंक से मोहभंग होने के बाद बहुत से नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं.

Tags: Chhattisgarh news, Naxali attack, Rajnandgaon news

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