VIDEO: यह शख्स बल्ब पर नुकीले औजार से करता है कलाकारी !

राजनांदगांव जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर कन्हारपुरी गांव में रहने वाले गोपाल पटेल नुकीले औजार से बल्ब पर नाम लिखते हैं.

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छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर कन्हारपुरी गांव में रहने वाले गोपाल पटेल नुकीले औजार से बल्ब पर नाम लिखते हैं. इसके अलावा लकड़ी, पत्थर, सीमेंट और मिट्टी से आकर्षक मूर्तियां बनाते हैं. पुस्तक से मिली कला की विरासत को अपनी कारीगरी के जरिए लोगों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है. बिना तोड़े बल्ब पर वे नुकीले औजार से नाम लिखते हैं. शुरू से ही कारीगरी के प्रति गोपाल को लगाव रहा है, लेकिन घर की माली हालत खराब होने की वजह से संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में नहीं पढ़ पाए. वहीं आज अपनी कारीगरी और हुनर से लोगों को अचंभित कर रहे हैं.



विरासत में मिली कारीगरी



जिले से लगे कन्हारपुरी गांव में रहने वाले गोपाल के पिता स्व. मगनलाल पटेल भी कारीगरी का काम करते थे और कांच के टुकड़े में देवी देवताओं की मूर्ति बनाते थे. वहीं गोपाल के दादा भी कारीगरी का काम करते थे. ऐसे में कहा जा सकता है कि गोपाल को कारीगरी विरासत में मिली है. गोपाल अपने पिता को कारीगरी करते हुए देखता था और पिता से ही कारीगरी और शिल्पकारी करना सीखा है.





बचपन से ही अपने दादा और पिता को कांच के दुकड़ों और पत्थरों में मूर्ति को उकरते और नाम लिखते देखा है. गोपाल का कहना है कि बचपन में ही उसने अपने मन में कारीगरी करने की ठान ली थी और आज बिना बल्ब तोड़े बल्ब पर नाम और कलाकृतिया बनाकर चर्चा में आ गया है. गोपाल का कहना है कि विरासत में मिली इस कारीगरी को वो आने वाली पीढ़ियों को भी सिखाना चाहता है
गोपाल ने कहा कि वे नुकीले औजार से बल्ब में आकृतियां बनाते हैं. नुकीले औजार के बाद भी बल्ब कभी फ्यूज नहीं होता है. रोशनी में नाम की परछाई स्पष्ट नजर आती है. गोपाल का कहना है कि 8 साल की उम्र में अपने पिता से कला की बारीकियां सीखा करते थे. गोपाल ने कहा कि 12वी कक्षा तक पढ़ाई की है और पिता के निधन के बाद अपनी खुद की दुकान खोलकर कारीगरी कर रहे हैं. गोपाल ने कहा कि वे खैरागढ़ संगीत महाविद्यालय में पढ़ना चाहता था, लेकिन घर की माली हालत ठीक नहीं होने की वजह से नहीं पढ़ पाया. अपने बच्चों को आगे कला के क्षेत्र में पढ़ाना चाहता है.



गोपाल ने जिला प्रशासन और सरकार से कलाकारों की और ध्यान नहीं देने की बात कही और कहा कि स्वरोजगार और रोजगार के बेहतर साधन नहीं होने के कारण गांव में रहने वाले कलाकर हुनरमंद होने के बाद भी उभर नहीं पाते और सरकार से मदद करने की बात कही है.



 
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