राजनांदगांव में गिरता जा रहा शिक्षा का स्तर, ये है वजह
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राजनांदगांव में गिरता जा रहा शिक्षा का स्तर, ये है वजह
प्रतिकात्मक तस्वीर.

राजनांदगांव के वनांचल इलाकों में कई ऐसे स्कूल है जहां 10 सालों से सिर्फ एक शिक्षक की नियुक्ति है. एकल शिक्षकीय व्यवस्था में बदलाव नहीं होने से इन स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई भी चौपट है.

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छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग हमेशा से ही सुर्खियों में रहा है. कभी अपनी लचर व्यवस्था तो कभी शिक्षकों की कमी के कारण हमेशा से ही शिक्षा विभाग चर्चाओं में रहा है. सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद अब नई सरकार शिक्षा के स्तर को ठीक करने की बात कह रही है. वहीं पिछली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य की बात कहकर कई बात वाह-वाही भी लूटी है. बात अगर राजनांदगांव जिले की करें तो यहां शिक्षा विभाग की स्थिति कुछ बेहतर नहीं है. स्कूलों में संसाधनों की कमी और शिक्षक नहीं होने से लगातार जिले में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है.

राजनांदगांव जिले में शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षा गुणवत्ता को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है. विभाग नए-नए प्रयोग भी कर रहा रहा है. लेकिन जिले के वनांचल इलाकों में कई ऐसे स्कूल है जहां 10 सालों से सिर्फ एक शिक्षक की नियुक्ति है. एकल शिक्षकीय व्यवस्था में बदलाव नहीं होने से इन स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई भी चौपट है. जिले के कई ऐसे ब्लॉक है जहां शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

मानपुर और छुईखदान ब्लॉक में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति बदतर है. इन क्षेत्रों के 41 प्राइमरी और 12 मिडिल स्कूल लंबे समय से एकल शिक्षकीय संचालित हो रहे है. वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की भरमार है. शिक्षा विभाग के अफसरों को इन स्कूलों की स्थिति के बारे में भी पता है. हर साल आस-पास के दूसरे स्कूल के शिक्षकों को एकल शिक्षकीय की स्कूल में अटैच किया जाता है ताकि वे कोर्स पूरा कर सके. पर ये शिक्षक 4 दिन ड्यूटी करने के बाद फिर अपनी मूल शाला में व्यस्त हो जाते है.



जंगली क्षेत्र होने की वजह से अफसर भी इन स्कूलों में लगातार निगरानी नहीं कर पाते. वहीं पूरे मामले पर कलेक्टर भीम सिंह का कहना है कि जिन जगहों पर शिक्षक नहीं है उन जगहों पर मानदेय में शिक्षक रखे गए है. जल्दी इन जगहों पर शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी.
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