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लोकसभा चुनाव 2019: राजनांदगांव में बीजेपी-कांग्रेस प्रत्याशियों से ज्यादा डॉ. रमन सिंह की दांव पर साख

पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह (फाइल फोटो)

पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह (फाइल फोटो)

राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र में कुल 17 लाख 10 हजार 682 मतदाता हैं. इनमें 8 लाख 55 हजार 739 पुरुष, 8 लाख 54 हजार 934 महिला और 9 अन्य वर्ग के मतदाता हैं.

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लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण में छत्तीसगढ़ की तीन सीटों पर मतदान 18 अप्रैल को हो रहा है. इनमें से एक हाई प्रोफाइल सीट राजनांदगांव भी है. राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र भी है. ऐसे में इस सीट पर प्रत्याशी से ज्यादा डॉ. रमन सिंह की साख दांव पर है. राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र में कुल 17 लाख 10 हजार 682 मतदाता हैं. इनमें 8 लाख 55 हजार 739 पुरुष, 8 लाख 54 हजार 934 महिला और 9 अन्य वर्ग के मतदाता हैं. 2019 के चुनावी संग्राम में इस सीट से कुल 14 प्रत्याशी मैदान में हैं.

राजनांदगांव विद्वानों, बुद्धिमानों और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध लोगों से जुड़े लोगों के लिए जाना जाता है. इस शहर का वैभव और विरासत अब भी देखे जा सकते हैं. यह लोकसभा सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है. राजनांदगांव का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम मोतीलाल वोरा जैसे कुछ महत्वपूर्ण नेताओं द्वारा किया जा चुका है. इस सीट से सांसद छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का टिकट काटकर बीजेपी ने संतोष पांडे को इस बार मैदान में उतारा है. बीजेपी प्रत्याशी का सीधा मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी भोलाराम साहू से है.


इस लोकसभा सीट पर आजादी के बाद से अब तक कुल 16 चुनाव हो चुके हैं. राजनांदगांव निर्वाचन क्षेत्र में 1952 से लेकर 1999 तक 13 बार चुनाव हुए. जिनमें से ज्यादातर नतीजे कांग्रेस के ही पक्ष में रहे हैं. साल 2000 में मध्य प्रदेश के विभाजन से बने छत्तीसगढ़ के अस्तित्व में आने के बाद से यहां 2007 में एक उपचुनाव के अलावा तीन लोकसभा चुनाव हुए हैं. 1999 के बाद से 2007 के उपचुनावों के अलावा सभी चुनावों (1999, 2004, 2009, 2014) में बीजेपी ने सीट पर कब्जा करने में कामयाब रही है.
इस शहर पर सोमवंशियों, कलचुरियों राजवंशों और बाद में मराठा जैसे मशहूर राजवंशों द्वारा शासन किया गया. शुरुआती दिनों में शहर को नंदग्राम कहा जाता था. राजनांदगांव राज्य असल में 1830 में अस्तित्व में आया. बैरागी वैष्णव महंत ने अपनी राजधानी को वर्तमान राजनांदगांव स्थानांतरित किया. भगवान कृष्ण, नंद, नंदग्राम के वंशजों के नाम पर इस शहर का नाम रखा गया. हालांकि, इसके तुरंत बाद नाम बदलकर राजनांदगांव कर दिया गया. राज्य के आकार के कारण नंदग्राम ज्यादातर हिंदू का हिंदू राजाओं और राजवंशों के अधीन रहा.



इस लोकसभा सीट पर 2014 में पुरुष मतदाताओं की संख्या 794,427 थी, जिनमें से 601,874 ने वोटिंग में भाग लिया. वहीं पंजीकृत 793,668 महिला वोटर्स में से 576,422 महिला वोटर्स ने भाग लिया था. इस तरह कुल 1,588,095 मतदाताओं में से कुल 1,178,296 ने चुनाव में अपनी हिस्सेदारी तय की. 2019 में के सांसद की किस्मत 17 लाख 10 हजार 682 मतदाता तय करेंगे.

राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत में विधानसभा की 8 सीटों में से एक सीटें अनुसूचित जनजाति, एक सीट अनूसूचित जाति और छह सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हैं. जिनमें पंढरिया, कवर्धा, खैरागढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, डोंगरगढ़ (एससी), खुज्जी, मोहला-मानपुर(एसटी) शामिल हैं. 2014 के चुनाव में बीजेपी के अभिषेक सिंह ने कांग्रेस कमलेश्वर वर्मा, 2009 में बीजेपी के मधुसूदन यादव ने कांग्रेस के देवव्रत सिंह और साल 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदीप गांधी ने कांग्रेस के देवव्रत सिंह को हराया था.

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