थैली में शहीद बेटे की अस्थि लेकर भटक रही एक मां, पूरी करना चाहती है एक 'सपना' 
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थैली में शहीद बेटे की अस्थि लेकर भटक रही एक मां, पूरी करना चाहती है एक 'सपना' 
तीन साल से शहीद की मां सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है.

एक थैले (Bag) में अपने शहीद सैनिक (Martyr soldier) बेटे की अस्थियां लेकर एक बार अब दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन इस बूढ़ी मां की पुकार कोई नहीं सुन रहा है.

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राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के राजनांदगांव (Rajnandgaon) जिले में पिछले 3 सालों से एक मां अपने शहीद बेटे की अस्थियों को अपने पास रखकर शासन-प्रशासन से गुहार लगा रही है कि उसके शहीद बेटे को सम्मान दिया जाए. मां शासन- प्रशासन सिर्फ इतना ही चाह रही है कि उसके गांव में संचालित स्कूल का नाम उसके शहीद बेटे के नाम कर दिया जाए और गांव में शहीद बेटे का एक स्मारक बना दिया जाए, जो की नियम में भी है. एक थैले (Bag) में अपने शहीद सैनिक (Martyr soldier) बेटे की अस्थियां लेकर एक बार अब दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन इस बूढ़ी मां की पुकार कोई नहीं सुन  रहा है.

नक्सली हमले में शहीद हो गया था बेटा

दरअसल, डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र के सोनेसरार गांव का एक जवान हेमन्त महिलकर (Hemant Mahilkar) 2013 में 10 वीं बटालियन जिला बल में भर्ती हुआ था. इसके बाद उसकी पदस्थापना प्रदेश के बीजापुर (Bijapur) जिले के मिरतूर थाने में हो गई. 03 मार्च 2017 में चेटली चितौडीपारा इलाके में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था, जिसमें सड़क निर्माण कार्य में लगे लोगों को सुरक्षा देने फोर्स की टीम निकली जिसमें हेमंत भी शामिल था. इस दौरान जंगल में घात लगाकर बैठक नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया. मुठभेड़ (Naxalite Attack) में हेमन्त महिलकर शहीद हो गए.



शहीद की मां पिछले तीन साल से बेटे की अस्थियां लेकर भटक रही है.

शासन- प्रशासन के नियमों के मुताबिक जिस गांव का जवान शहीद होता है, उस गांव के स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखा जाता है. साथ ही गांव में शहीद का एक स्मारक भी बनाया जाता है. लेकिन घटना को 3 साल बीत गए, लेकिन सोनेसरार गांव में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला. शहीद की मां सवली बाई ने बताया कि पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों ने उसे बताया था कि जिस दिन भी शहीद के नाम का स्मारक गांव में बनाया जाएगा, उसी स्मारक में शहीद की अस्थियों को डाल देना. तब से लेकर आज तक मां इसका इंतजार कर रही है.

हेमन्त महितकर नक्सली हमले में शहीद हो गए थे.


3 साल से इंतजार कर रही मां

 

शासन- प्रशासन ने नियमानुसार शहीद के स्मारक के लिए गांव के हाई स्कूल में जगह को चिन्हित किया और स्कूल के नामकरण के लिए स्कूल विभाग द्वारा प्रस्ताव भी बनाया गया. लेकिन जिस जगह का चयन किया गया प्रशासन ने शहीद के परिजनों को जानकारी नहीं दी और पंचायत ने अधूरा निर्माण कर डाला. स्कूल के प्राचार्य एडी मानिकपुरी की मानें तो स्कूल का नाम शहीद के नाम पर करने के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर भेजा गया, लेकिन गांव की पंचायत में सहमति नहीं बनने के कारण नामकरण नहीं हुआ.  पूरे मामले में एएसपी गोरखनाथ बघेल का कहना है कि विभाग ने स्मारक और स्कूल के नामकरण के लिए जिला कलेक्टर को एक पत्र लिखा गया है.

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