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महीने के 5 दिन ये महिलाएं क्यों हो जाती हैं 'अछूत'

Rakesh Kumar Yadav | News18 Chhattisgarh
Updated: June 19, 2018, 2:21 PM IST

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के मानपुर ब्लाक के सीतगांव व आस-पास के इलाकों में समाज की एक विशेष परंपरा है.

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आधुनिकता और जागरुकता के इस दौर में विकास रथ जिस छत्तीसगढ़ में दौड़ रहे हैं, वहीं एक इलाका ऐसा भी है, जहां रूढ़िवादी परंपराएं न सिर्फ हैरान करती हैं. बल्की नारियों के लिए एक अभिशाप भी साबित हो रही हैं. ऐसी ही एक परंपरा के बारे में हम आपको बता रहे हैं.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के मानपुर ब्लाक के सीतगांव व आस-पास के इलाकों में समाज की एक विशेष परंपरा है. इस परंपरा के तहत जब स्त्री माहवारी (मेंस्ट्रुअल साइकल) के दौर से गुजरती है तो उन्हें घर से बाहर रहना पड़ता है. महीने के इन पांच से सात दिनों तक महिलाओं के साथ एक तरह से अछूतों जैसा व्यवहार किया जाता है.

राजनांदगांव जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर बसे इन गांवों में समाजिक कुरुतियां हावी हैं.
माहवारी के दौरान इस गांव की महिलाएं और बालिकाएं एक छोटे से झोपड़े में रहती हैं. यह सिससीला एक दिन से लेकर 5 दिनों तक रहता है. इस दौरान महिलाएं और बालिकाएं झोपड़ी में रहते हुए दिन रात रात गुजारती है. साथ ही इनके लिए घर से खाना बनाकर परिजन भेजते हैं, अगर खाना नहीं आया तो मजबूरी मे इन्हें खाना भी इसी झोपड़ी मे बनाना पड़ता है.

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यह झोपड़ी ऐसी जगह है, जहां सुअर और जानवर घुमते फिरते नजर आते है. जिससे इनको गंभीर बिमारी हो सकती है. महिलाएं और बालिकाएं नर्क की जिंदगी जीने मजबूर रहती हैं. इस गांव की महिला आशो बाई कहती हैं कि हमारी परंपरा है, जो सालों से चली आ रही है. इस कारण हमें झोपड़ी में रहना पड़ता है.

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राजनांदगांव के के मुख्य स्वास्थ्य एंव चिकित्सा अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी का कहना है कि अगर माहवारी के दौरान कोई भी महिला या बालिका अगर ऐसी गंदी जगह रहती है और खराब कपड़े का उपयोग करती है तो गंभीर बीमारी की शिकार हो सकती है, जिससे आने वाले समय में बच्चा दानी और बच्चे होने के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

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First published: June 19, 2018, 1:25 PM IST
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