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दिवाली पर महुआ के लड्डू बना महिलाओं ने कमाए 12 लाख रुपये, Amazon-फ्लिपकार्ट से मिल रहा ऑर्डर

दिवाली पर महुआ के लड्डू बना महिलाओं ने कमाए 12 लाख रुपये, Amazon-फ्लिपकार्ट से मिल रहा ऑर्डर

राजनांदगांव की महिलाओं ने महुआ का लड्डू बेचकर अच्छी कमाई की है.

राजनांदगांव की महिलाओं ने महुआ का लड्डू बेचकर अच्छी कमाई की है.

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव (Rajandgaon) जिले में संचालित जय मां फिरन्तिन महिला स्वयं सहायता समूह ने दिवाली (Diwali) के लिए खास महुआ का लड्डू (Mahua Laddu) बनाया है. दीपावली में विक्रय के लिए महिलाओं द्वारा तैयार इस लड्डू की मांग ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स से भी हो रही है. दावा किया जा रहा है कि इस लड्डू को बेच कर महिलाओं की आय 12 लाख रुपये तक हुई है. छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से भी लड्डू की मांग की जा रही है.

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राजनांदगांव. दीपावली (Deepawali) पर्व पर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के राजनांदगांव (Rajanandgaon) जिले के वनांचल क्षेत्र की मिठास महुआ लड्डू (Mahua Laddu) के रूप में पूरे देशभर में घुल रही है. इस महुआ लड्डू की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के कैबिनेट सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों और ऑनालाइन शॉपिंग साइट अमेजॉन व फ्लिपकार्ट (Amazon, Flipkart) पर भी हो रही है. राजनांदगांव वन विभाग के महुआ प्रसंस्करण केंद्र में इन दिनों दीपावली की मिठास को दोगुनी करने जय मां फिरन्तीन महिला समूह द्वारा 1000 किलो महुआ लड्डू, चिल, गुड़, फल्ली और महुआ के फूल की सहायता से तैयार किया जा रहा है.

इन महिलाओं ने माहुआ के लड्डू तैयार कर प्रधानमंत्री कैबिनेट के लिए इस दीपावली की मिठास को बढ़ाने दिल्ली भेजा है. वन विभाग की वनधन विकास योजना के माध्यम से वनांचल क्षेत्र की महिलाएं महुआ के फूल एकत्रित करती हैं और फिर इन फूलों को राजनांदगांव महुआ प्रसंस्करण केंद्र में लाया जाता है, जहां महिलाएं महुआ से महुआ अचार, महुआ कुकिज, महुआ चटनी, महुआ शरबत, महुआ चक्की तैयार कर रही हैं. इसके अलावा इस प्रसंस्करण केंद्र में जामुन चिप्स भी बनाया जा रहा है. इस बार दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से तैयार किए गए महुआ के लड्डू 500 रुपये प्रति किलो की दर से विक्रय हो रहे हैं, जो स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ ही अपने विशेष स्वाद के लिए पहचाना जाने लगा है.

12 लाख रुपये तक की आय
जय मां फिरन्तिन महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष शीतल यादव ने बताया कि लगभग 1000 किलो तैयार किए गए इस महुआ लड्डू से महिलाओं को 10 से 12 लाख  रुपए की आय हुई है. पहले परिवार की आर्थिक स्थिति के लिए संघर्ष कर रही इन महिलाओं ने अपनी मेहनत के बल पर और वन विभाग की योजनाओं से जुड़कर आज वनोपज महुआ से आर्थिक तरक्की की राह तय की है. जिसके लिए इन महिलाओं को प्रतिमाह 8 से 10 हजार की आर्थिक सहायता हो रही है. महुआ के उत्पादों को बनाने के लिए इन महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया. वहीं इन उत्पादों को बनाने के बाद महुआ प्रसंस्करण केंद्र में बने लैब में इसकी गुणवत्ता की जांच भी की जाती है.
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महुआ प्रसंस्करण केंद्र के टेक्नीशियन देवेश जंघेल ने कहा कि समय-समय पर महिलाओं को महुआ के विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें हाल ही में महुआ कुकीज और महुआ लड्डू काफी बेहतर उत्पाद साबित हुआ है. वहीं महुआ से निर्मित इन उत्पादों के सेवन से बेहतर स्वास्थ्य का निर्माण भी होता है. वनांचल क्षेत्र में अब तक महुआ को ज्यादातर शराब बनाने में उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन महुआ से बनने वाले बिस्किट, अचार, चटनी, शरबत लड्डू जैसे उत्पादों को देखकर अब इस महुआ का सदुपयोग कर अधिक लाभ अर्जित किया जा रहा है. वनधन विकास योजना के तहत वनांचल क्षेत्र के लोग महुआ एकत्रित करने में लगे हुए हैं और इन महुआ को अब शराब के लिए नहीं बल्कि बेहतर सेहत के लिए उपयोग किया जा रहा है.

Tags: Chhattisagrh news, Diwali 2021

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