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नक्सली कमांडर रमन्ना की दिल का दौरा पड़ने से मौत, 2.40 करोड़ रुपये का था इनामी

नक्सली रमन्ना पूर्व में सुरक्षाबलों और पुलिस पर हुए 10 बड़े हमलों में शामिल था (फाइल फोटो)

नक्सली रमन्ना पूर्व में सुरक्षाबलों और पुलिस पर हुए 10 बड़े हमलों में शामिल था (फाइल फोटो)

तेलंगाना के वारंगल जिले का रहने वाला रमन्ना उर्फ रावलु श्रीनिवास नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था. उस पर तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सरकारों ने करीब दो करोड़ चालीस लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. अकेले बस्तर पुलिस ने उस पर 40 लाख रुपए का इनाम रखा था.

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    सुकमा. मोस्ट वॉन्टेड (Most Wanted) नक्सली कमांडर रमन्ना (Naxali Ramanna) की मौत हो गई है. रमन्ना की मौत हार्ट अटैक (Heart Attack) के कारण हुई है. सोमवार को बीजापुर जिले के पामेड़ और बासागुड़ा गांव के बीच जंगल में उसका अंतिम संस्कार किया गया. तेलंगाना के कोत्तागुड़म के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुनील दत्त ने रमन्ना की मौत की पुष्टि की है. वहीं मंगलवार को राज्य के आला पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलिस को विभिन्न सूत्रों से जानकारी मिली है कि पिछले सप्ताह दिल का दौरा पड़ने से नक्सली नेता रमन्ना की मौत हो गई है. हालांकि इस संबंध में अभी तक नक्सलियों की तरफ से कोई बयान जारी नहीं किया गया है. नक्सली अक्सर अपने बड़े नेताओं की मौत पर बयान जारी करते हैं.

    तेलंगाना के वारंगल जिले का रहने वाला रमन्ना उर्फ रावलु श्रीनिवास नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था. उस पर तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सरकारों ने करीब दो करोड़ चालीस लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. अकेले बस्तर पुलिस ने उस पर 40 लाख रुपए का इनाम रखा था.



    10 बड़े हमलों का मास्टर माइंड था
    बता दें कि रमन्ना बीते एक दशक के दौरान सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर किए गए दस बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था. इन हमलों में 55 जवान शहीद हुए थे. रमन्ना को क्षेत्र में होने वाले नक्सली वारदातों का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था. वो लंबे समय से बस्तर और पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सली आंदोलन की अगुवाई कर रहा था.

    पुलिस अधिकारी ने कहा कि रमन्ना पिछले लगभग 30 वर्ष से बस्तर क्षेत्र में सक्रिय था. उसे वर्ष 2011 में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव बनाया गया था. उसने बस्तर में जोनल कमेटी की स्थापना में और माओवादी आंदोलन को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. अप्रैल 2010 में ताड़मेटला के चिंतलनार गांव में सीआरपीएफ के 76 जवानों की शहादत की घटना, दरभा घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमले को अंजाम देने में उसका हाथ माना जाता है. बता दें कि रमन्ना की मौत की खबरें पहले भी आती रहीं हैं, जो बाद में गलत पाई जाती थीं.

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