Exclusive: लालगढ़ में मतदाताओं को सुरक्षा देने के लिए इन चुनौतियों का सामना कर रही है फोर्स

छत्तीसगढ़ में लालतंत्र (नक्सलियों) का गढ़ माने जाने वाले बस्तर में लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व चुनाव होने वाला है. पूरे इलाके में सुरक्षा व शांतिपूर्ण मतदान कराना सुरक्षा बल के जवानों के लिए चुनौती बना हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2018, 9:34 PM IST
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छत्तीसगढ़ में लालतंत्र (नक्सलियों) का गढ़ माने जाने वाले बस्तर में लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व यानि चुनाव होने वाला है. पूरे इलाके में सुरक्षा व शांतिपूर्ण मतदान कराना सुरक्षा बल के जवानों के लिए चुनौती बना हुआ है. सुरक्षा बल के जवान हर पल सतर्क रहते हैं. किसी भी वक्त अनहोनी की आशांका के बीच एरिया डोमिनेशन पर जवान निकलते हैं. सुरक्षा के लिहाज से एरिया डोमिनेशन जितना जरूरी है, उतना ही खतरनाक और चुनौती भरा भी है. क्योंकि किसी भी वक्त नक्सलियों से मुठभेड़ और आईईडी ब्लास्ट की आशंका बनी रहती है.



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छत्तीसगढ़ के घोर नक्स्ल प्रभावित सुकमा में न्यूज 18 की टीम ने एरिया डोमिनेशन पर निकले सीआरपीएफ के जवानों के साथ समय बिताया. इस दौरान पता चला कि एरिया डोमिनेशन के दौरान सुरक्षा बल के जवान किन चुनौतियों का सामना करते हैं. बता दें कि छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान होने हैं. पहले चरण में नक्सल प्रभावित 18 विधानसभा सीटों पर 12 नवंबर को मतदान होंगे. दूसरे चरण में अन्य 72 सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होंगे.





पेड़ों पर भी करते हैं आईईडी प्लांट
लालतंत्र प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बल के जवानों के लिए नक्सलियों के प्लांट आईईडी को खोजना बड़ी चुनौती होती है. क्योंकि सुरक्षा बल के जवानों के पास ऐसे संसाधन नहीं है, जो चार फिट से अधिक गहराई में प्लांट आईईडी को ट्रेस कर सकें. इसके अलावा नक्सली पेड़ों पर भी आईईडी प्लांट करते हैं. इसे ढूंढना चुनौती भरा होता है. इसके लिए तकनीकी संसाधनों के अलावा स्नीफर डॉग की भी मदद ली जाती है.



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लालगढ़ में लगातार हो रहे हैं हमले

चुनावी समर में अपने प्रभाव वाले इलाकों में नक्सली लगातार सुरक्षा बल के जवानों को निशाना बना रहे हैं. पिछले एक महीने में बस्तर के अलग अलग इलाकों में नक्सल हिंसा में 15 से अधिक जवानों की शहादत हुई है. एक मीडिया पर्सन सहित पांच से अधिक आम नागरिक भी मारे गए हैं.



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सुरक्षित आवाजाही उद्देश्य

सीआरपीएफ के 226वीं बटालियन सहायक कमांडेंट सोमनारायण का कहना है कि एनएच की सुरक्षा के साथ ही खुद की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होती है. इसके लिए हम अलग अलग पार्टियां बनाने हैं. रुटिन डोमिनेशन के लिए हम कोई एक पैटर्न पर काम नहीं करते हैं. एनएच ही लोगों को गांव से जोड़ता है. ऐसे में गांव तक सुरक्षित आवाजाही कराना प्रमुख उद्देश्य होता है.



गांव वालों को सुरक्षा की गारेंटी देते हैं

चुनाव में हिस्सा नहीं लेने के लिए नक्सली आए दिन ग्रामीणों को धमकी देते हैं. बैनर पोस्टर भी फेंकते हैं. ऐसे में सुरक्षा बल के जवान एरिया डोमिनेश और लगातार सर्चिंग अभियान चलाकर ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव पैदा करने की कोशिश करते हैं. उन्हें इस बात का अहसास कराते हैं कि वे चुनाव में बेफिक्र होकर हिस्सा ले सकते हैं.



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