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सुकमा में यहां भगवान राम ने की थी भू-देवी की पूजा, इसलिए 600 साल से निभाई जा रही ये खास परंपरा

News18 Chhattisgarh
Updated: February 11, 2020, 4:18 PM IST
सुकमा में यहां भगवान राम ने की थी भू-देवी की पूजा, इसलिए 600 साल से निभाई जा रही ये खास परंपरा
सुकमा में हर साल मेले का आयोजन होता है.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दक्षिण बस्तर (South Bastar) का सबसे बड़ा मेले का आयोजन सुकमा (Sukma) के रामाराम में मंगलवार को हुआ.

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सुकमा. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दक्षिण बस्तर (South Bastar) का सबसे बड़ा मेले का आयोजन सुकमा (Sukma) के रामाराम में मंगलवार को हुआ. यहां हर साल मेले का आयोजन होता है, जहां पूरे बस्तर समेत ओडिशा (Odisha), तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश से भक्त पहुंचते हैं. रामाराम मेले का इतिहास 600 साल से भी अधिक पुराना है. प्रचलित कथाओं के मुताबिक यहा पर भगवान श्रीराम (Shri Ram) ने भू-देवी की पूजा-अर्चना की थीख् जिसके बाद यहा का नाम रामाराम पड़ा था. इस मेले के बाद पूरे इलाके में मेले भरने का दौर जारी हो जाएगा. इसके अलावा यहां पर आसपास के 100 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है.

मान्यता है कि रामाराम में तीन देवीयों का मिलन होता है, जो बहनें रहती हैं. मान्यता के मुताबिक माता चिटमिटिन, रामारामिन और मुजरिया छिन्दगढ़ का मिलन यहां होता है. इन सभी का स्वागत आदिवासी परम्पराओं के साथ होता है. इस मेले के आयोजन के बाद से जिले में जगह-जगह मेलो का आयोजन शुरू हो जाता है. सुकमा जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित रामाराम में भव्य मेले का आयोजन किया गया है.

निकाली गई मां की डोली
मेले से एक दिन पहले सुकमा स्थिज राजबाड़ा से मां की डोली रामाराम के लिए निकली थी. आज मेले के बाद देर शाम को माता की डोली वापस राजबाड़ा जाएगी और फिर सुकमा मेले का आयोजन किया जाएगा. वहीं आज सुबह करीब 11 बजे मंदिर के पट खोले गए. राजपरिवार के सदस्यों ने क्षेत्र की शांति और उन्नति की प्रार्थना करते हुए पूजा-अर्चना की. ठीक उसके बाद दिनभर भक्तो का तांता लगा रहा जो देर शाम तक सिलसिला चला. मेला स्थल पर दूर-दराज से व्यापारी दुकाने लगाने पहुंचे थे.

Sukma
देवी के दर्शन के लिए लगी भक्तों की लाइन.


यह है मान्यता
मंदिर के पुजारी दुर्गा प्रसाद ठाकुर की मानें तो यहां पर पहाड़ी में देवी मां पूजा-अर्चना करती थी. यहां पुजारी हर रोज आया करता था और वापस जाते वक्त कलश लेकर राजबाड़ा जाया करता था, लेकिन एक दिन पुजारी कलश ले जाना भूल गया और फिर वो वापस लौटा तो रात हो चुकी थी और मां देवी सभी देवताओं को भोग लगा रही थी. पुजारी को वापस देख देवी नाराज हुई और कलश को फेंक दीं. उसके बाद कलश लुड़कर आया जहां कलश रूका वहां मंदिर का निर्माण कराया गया.यहां भगवान श्रीराम कर चुके भू-देवी की पूजा
छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनगमन के अनुसार कुटमसर होते हुए भगवान श्रीराम शबरी नदी के तट पर स्थित रामाराम पहुंचे. यहां पर माता सीता संग भगवान श्रीराम ने भू-देवी की पूजा की थी. ठीक उसके बाद वो इंजराम पहुंचे थे. इसलिए यहां स्थानीय देवी-देवताओं के साथ भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना भी करते है.

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First published: February 11, 2020, 4:18 PM IST
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