सुकमा में पुलिस कैंप के खिलाफ आंदोलन को हवा दे रहे नक्सली, हिंसक लड़ाई के लिए आदिवासियों को उकसा रहे

सुकमा में पुलिस कैंप के खिलाफ आदिवासियों की मीटिंग.

Naxal vs Security Forces: सुकमा के सिलगेर में पुलिस कैम्प का विरोध कर रहे ग्रामीण. नक्सलियों की अपील पर 7000 से ज्यादा आदिवासियों की हुई मीटिंग. हिंसक लड़ाई के लिए ग्रामीणों को भड़का रहे नक्सली.

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    रिपोर्ट - आदित्य राय

    सुकमा. कोरोना की रोकथाम के लिए छत्तीसगढ़ में जहां लॉकडाउन लगाया गया है, वहीं इस कठिन समय में भी नक्सली, ग्रामीण आदिवासियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं. दरअसल, सुकमा में नक्सलियों के गढ़ सिलगेर के जंगल में पुलिस कैम्प खुलने के विरोध में ग्रामीण आदिवासी पिछले 14 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि इन आदिवासियों को इलाके के नक्सली हिंसक लड़ाई के लिए उकसा रहे हैं. बीते दिनों 7000 से ज्यादा आदिवासी पुलिस कैंप के विरोध में इकट्ठा हुए. इन्हें नक्सलियों ने मीटिंग के लिए इकट्ठा किया था. कोरोनाकाल में इतनी बड़ी भीड़ जुटी, जिसमें न तो किसी ने मास्क पहना था और न सोशल डिस्टेंसिंग जैसी चीज दिखी.

    आपको बता दें कि इसी महीने 5 मई को सुकमा के घोर नक्सल प्रभावित इलाके में पुलिस का कैम्प खोला गया, जिससे नक्सली भयभीत हो गए हैं. यही वजह है कि नक्सलियों ने पुलिस कैंप के खिलाफ आदिवासियों को आगे रखकर आंदोलन खड़ा कर दिया है. पुलिस ने आदिवासियों को समझा-बुझाकर वापस लौटाने की कोशिश की. कुछ लोग लौट भी गए, लेकिन 17 मई को नक्सलियों ने आदिवासियों को फिर से इकट्ठा किया. उसी दिन पुलिस कैंप पर पत्थर फेंके गए और एक थाने को जलाने की कोशिश की गई. पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में आंसू गैस के गोले दागे, तो नक्सलियों ने फायरिंग भी की.

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    आदिवासियों के नाम नक्सलियों का पत्र.


    बाद में सुरक्षाबलों को इस स्थान से कई रॉकेट भी मिले, जिन्हें नक्सली हमले के लिए लाए थे. इस मुठभेड़ में 3 लोगों की जान गई. इस घटना की मजिस्ट्रियल जांच चल रही है. इसके बाद आंदोलन को कमजोर पड़ता देख नक्सली फिर से आदिवासियों को सुरक्षाबलों के खिलाफ गुमराह करते हुए आंदोलन को बड़ा स्वरूप देने की योजना बना रहे हैं. इसी क्रम में 7000 आदिवासियों को जुटाकर नक्सलियों ने मीटिंग की थी. आदिवासियों की इस मीटिंग को लेकर प्रशासन का कहना है कि कोरोना महामारी के दौर में जब सरकार ने संक्रमण की रोकथाम के लिए भीड़ जुटाने पर पाबंदी लगा रखी है, नक्सली ऐसी बैठकें कर आदिवासियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं.