Exclusive: नक्सलियों के डर से अब तक वोट मांगने नहीं आया कोई प्रत्याशी

छत्तीसगढ़ में युवाओं की सोच अब बदल रही है. एसे ही कुछ प्रगतिशील युवाओं से खास बातचीत की न्यूज18 के संवाददाता रवि दुबे ने.

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छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों के लिए जल्द ही दो चरणों में चुनाव होने जा रहे हैं. नक्सलवाद का दंश झेल रहे इस राज्य में अभी भी कुछ इलाकों में नक्सलियों का इतना खौफ है कि, राजनीतिक पार्टियों के नेता यहां वोट मांगने भी नहीं आए. कुछ ऐसा ही हाल बस्तर संभाग के सुकमा जिले का भी है. हालांकि यहां के युवाओं की सोच अब बदल रही है. ऐसे ही कुछ प्रगतिशील युवाओं से खास बातचीत की न्यूज18 के संवाददाता रवि दुबे ने.

चुनाव के बारे में पूछे जाने पर गांव के युवकों ने बताया कि अभी तक उनके यहां कोई भी प्रत्याशी प्रचार के लिए नहीं आया है. पर वो वोट जरूर देंगे, वो भी सोच-विचार के बाद. आगे उनसे पूछा कि जगह-जगह जाकर नक्सली इन चुनावों के बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं. साथ ही वो गांव वालों को वोट ना डालने की धमकी भी दे रहे हैं. तो ऐसे में आप लोगों का फैसला क्या होगा?

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इस सवाल के जवाब में सुकमा के नवयुवकों का साफ तौर पर कहना था कि चाहे जो हो जाए हम तो वोट डालेंगे. युवाओं का मानना है कि नक्सली विकास विरोधी हैं और अगर हमने इनकी बात मानी तो हमारा गांव भी पिछड़ जाएगा.
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वहीं कुंदनपारा गांव के मरकाम ने न्यूज18 को बताया कि पहले उनके गांव में नक्सली आते थे और गांव के लोगों को सड़क खोदने के लिए मजबूर करते थे. छत्तीसगढ़ में एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि जहां गांव के कुछ युवा स्कूल में इसलिए पढ़ते हैं ताकि उनके गांव के बच्चों का भविष्य बेहतर बन सके. वहीं कुछ भटके हुए नौजवान भी हैं, जो नक्सली ग्रुप ज्वाइन कर रहे हैं. पर इसमें कोई शक नहीं कि मूलभूत सुविधाओं के लिए जद्दोजहद कर रहे गांव के युवक बिजली, पानी, सड़क और अस्पताल जैसी सुविधा चाहते हैं.

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