नक्सल हिंसा से पीड़ित 29 आदिवासी परिवार 15 साल बाद लौटेंगे सुकमा
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नक्सल हिंसा से पीड़ित 29 आदिवासी परिवार 15 साल बाद लौटेंगे सुकमा
फाइल फोटो.

छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से मुकाबला करने के लिए शुरू किए गए सलवा जुडूम के दौरान बस्तर छोड़कर आंध्र प्रदेश में जा बसे आदिवासी परिवार अब वापस अपने गृह क्षेत्र में लौट रहे हैं.

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छत्तीसगढ़ में नक्‍सली हिंसा के खिलाफ शुरू किए गए सलवा जुडूम के दौरान बस्तर छोड़कर आंध्र प्रदेश में जा बसे आदिवासी परिवारों के अब वापस आने की कवायद शुरू हो गई है. घोर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के 29 परिवार गुरुवार (25 अप्रैल) को वापस अपनी जमीन पर लौट रहे हैं. दावा किया जाता है कि सलाव जुडूम के दौरान नक्सलियों ने इनके घर जला दिए थे. इसके बाद वे दहशत में आकर अपनी जमीन छोड़ पड़ोसी प्रांत आंध्र प्रदेश में निर्वासितों की तरह दिन गुजार रहे थे.

15 साल बाद गुरुवार को वे अपने गांव, अपने घर लौट रहे हैं. सुकमा जिले के एर्राबोर से 7 किमी दूर बसे गांव मरईगुड़ा से इन परिवारों के वापसी की शुरुआत हो रही है. बताया जा रहा है कि अपने गांव से करीब 75 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के कन्नापुरम गांव में इन्होंने ठिकाना ढूंढ़ा और मिर्च के खेतों में मजदूरी कर गुजर-बसर करने लगे. इन परिवारों को 15 साल तक आंध्र प्रदेश में न तो वोटर आईडी मिली और न वनभूमि का पट्‌टा.

इन परिवारों को वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे सामाजिक कार्यकर्ता शुभ्रांशु चौधरी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि जिन लोगों ने गांव छोड़ा उनके नाम कभी सैकड़ों एकड़ जमीन थी. सैकड़ों एकड़ जमीन के मालिक जिनके खेतों में पहले मजदूर काम करते थे वो मजबूरी में दूसरे के खेतों में दिहाड़ी पर काम करने को मजबूर थे. अब ये 29 परिवार लौट रहे हैं, उनमें से 24 परिवार के नाम पर जमीन यहां मिल चुकी है.
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