नगरीय निकाय चुनाव: सुकमा में सालों से बीजेपी का कब्जा, इस बार किसको मिलेगा ताज?
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नगरीय निकाय चुनाव: सुकमा में सालों से बीजेपी का कब्जा, इस बार किसको मिलेगा ताज?
नगरीय निकाय चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस व बीजेपी ने सुकमा में ताकत झोंक दी है.

सुकमा (Sukma) में बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों ही अपनी अपनी जीत का दावा कर रही है.

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सुकमा. नगरीय निकाय चुनाव (Urban Civic Elections) प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस (Congress) व बीजेपी (BJP) ने सुकमा (Sukma) में ताकत झोंक दी है. एक ओर जहां बीजेपी (BJP) अपने निकाय पर कब्जा को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस (Congress) अपने 15 साल के वनवास को खत्म करने का प्रयास कर रही है. प्रदेश के केबिनेट मंत्री कवासी लखमा (Cabinet Minister Kavasi Lakhma) ने प्रचार के अंतिम दिन मोर्चा संभाला तो बीजेपी भी प्रचार करने में पीछे नहीं रही. दोनों ही दलों के नेता वोटर्स को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं.

सुकमा (Sukma) में बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों ही अपनी अपनी जीत का दावा कर रही है. साल 1993 में बीजेपी से सरपंच बनी थी. उसके बाद लगातार बीजेपी के ही सरंपच रहे थे. जब नगर पंचायत बनाया गया था उस समय बीजेपी के स्व. बुधराम सोढ़ी पहले अध्यक्ष पद के लिए मनमोनित हुए. उसके बाद रमेश सोढ़ी रहे. 2004 से ठीक पहले ग्राम पंचायत से जिला मुख्यालय को नगर पंचायत बनाया गया था और 2004 में निकाय चुनाव पहली बार हुआ. इसमें बीजेपी और कांग्रेस के साथ-साथ सीपीआई ने भी अपना उम्मीदवार उतारा था, लेकिन भाजपा की अर्पणा देव ने बाजी मारी थी.

लगातार बीजेपी के अध्यक्ष
2004 के चुनाव के फिर निकाय चुनावों में बीजेपी के पीलूराम यादव ही अध्यक्ष बने. फिर राज्य की बीजेपी सरकार ने नगर पंचायत से नगर पालिका बना दिया गया. उसके बाद फिर हुए चुनाव में बीजेपी की लक्ष्मीबाई अध्यक्ष बनी. इस तरह निकाय चुनावों में अब तक कांग्रेस दूर रही. जबकि यहां से कोंटा विधानसभा से पिछले 20 सालों से कांग्रेस के कवासी लखमा विधायक बनते आऐं है, लेकिन इस बार कांग्रेस के लोग काफी मेहनत कर रहे हैं. नगरीय निकाय चुनाव के तहत 21 दिसंबर को वोटिंग होनी है. इसके बाद 24 दिसंबर को मतगणना हो जाएगी. बता दें कि नगर पालिका सुकमा में मतदाताओं की संख्या 12668 है. जिसमें पुरुष 6405 और महिलाएं 6263 हैं.
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