किसानों पर कोरोना की दोहरी मार, फसल कटाई के लिए नहीं मिल रहा डीज़ल

प्रतीकात्मक तस्वीर

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सूरजपुर ज़िले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में लॉकडाउन के नियमों का पालन किसान पूरी शिद्दत से कर रहे हैं, लेकिन उनकी परेशानी की वजह गाइडलाइन ही है. एक तरफ मौसम की मार है तो दूसरी तरफ प्रशासन से किसान आस लगाए बैठे हैं.

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सूरजपुर. बढ़ते कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सूरजपुर ज़िले को 13 अप्रैल से कंटेन्मेंट जोन बनाकर 5 मई तक के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है. गाइडलाइन के मुताबिक ज़िले में अति आवश्यक व कुछ सेवाओं को छोड़कर पेट्रोल पंप से डीजल या पेट्रोल लेने की इजाज़त नहीं है. इन हालात में, ज़िले के किसान अब परेशान होते नज़र आ रहे हैं.

सूरजपुर ज़िले में 13 अप्रैल से लेकर 5 मई तक लगे लॉकडाउन में प्रशासन ने तो कई अति आवश्यक सेवाओं के तहत पेट्रोल पंपों से वाहनों में पेट्रोल व डीजल लेने की अनुमति प्रदान की है, तो वहीं किसानों की परेशानी का कारण कुछ और है. दरअसल बीते 1 साल से कोरोना काल के दौरान ही किसान परेशान हो चुके थे. वहीं, कोरोना संक्रमण का खतरा अब गांव में भी नज़र आने लगा है और छोटे से ज़िले में लॉकडाउन की नौबत आ गई.

ऐसे में, जहां ग्रामीण अंचल के किसान भी लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं. एक तरफ, अब गेहूं जैसी फसलें पककर तैयार हो हैं लेकिन फसल को काटना और मिसाई करना टेढ़ी खीर बन रहा है. एक तरफ, मौसम में आ रहे बदलाव के चलते यह डर बढ़ गया है कि कहीं गेहूं की फसल खराब न हो जाए, तो वहीं किसानों को गेहूं की कटाई के लिए लगने वाली मशीनों के लिए पेट्रोल पंप से डीजल नहीं मिल रहा.

रविंद्रनगर गांव के किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि फसलों की कटाई व मिसाई के लिए काम आने वाली मशीनों के लिए डीज़ल की छूट दी जाए. गौरतलब है कि पेट्रोल पंप से केवल अति आवश्यक सेवा वाले वाहनों को ही पेट्रोल व डीज़ल की छूट है. थोक सब्जी, किराना जैसे वाहनों को पेट्रोल पंप से डीजल व पेट्रोल लेने की छूट है लेकिन कृषि कार्य में लगे वाहनों के लिए प्रशासन के लिए नहीं. ऐसे में किसानों के बीच फिर कर्ज में डूब जाने की आशंका चर्चा का विषय है.
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