एशिया गेम तक पहुंचे बॉलीबॉल रेफरी गौस वेग का सफर अब है जारी

कड़ी मेहनत और खुद पर विश्वास हो तो कोई भी चुनौती आपको मंजिल तक पहुंचाने से नहीं रोक सकती. यह साबित कर दिखाया है सूरजपुर के एक गरीब परिवार के युवक गौस वेग ने.

Varun Rai | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: August 26, 2017, 7:36 PM IST
एशिया गेम तक पहुंचे बॉलीबॉल रेफरी गौस वेग का सफर अब है जारी
गौस वेग के जीते हुए शील्ड.
Varun Rai | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: August 26, 2017, 7:36 PM IST
कड़ी मेहनत और खुद पर विश्वास हो तो कोई भी चुनौती आपको मंजिल तक पहुंचाने से नहीं रोक सकती. यह साबित कर दिखाया है सूरजपुर के एक गरीब परिवार के युवक गौस वेग ने. इस युवक का सफर सूरजपुर के करंजी गांव से शुरू हुआ था और म्यांमार में एशिया बॉलीबॉल गेम में भारत का प्रतिनिधित्व तक गया और यह सफर अभी भी जारी है.

यही वजह है कि 29 अगस्त को खेल दिवस के दिन प्रदेश के मुखिया रमन सिंह द्वारा गौस वेग को वीर हनुमान सिंह एवार्ड से सम्मानित किया जाएगा, जिसको लेकर जिले के लोगों में भी काफी उत्साह है.

अलमारी में चमकती ये ट्राफियां और शील्ड. ये एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं बल्कि कई सालों की लगन का नतीजा है. ये ट्रॉफियां हैं सूरजपुर के खेल अधिकारी गौस वेग का, जो आज अंतरराष्ट्रीय रेफरी हैं. इनका जन्म सूरजपुर के एक छोटे से गांव करंजी में हुआ था. बचपन में ही इनके सिर से पिता का साया उठ गया था.

आर्थिक और संसाधनों की भारी किल्ल्त के बीच इनका बचपन बीता. खेल में खासी रूचि होने के बावजूद किसी भी खेल में उन्हें कोई ख़ास मुकाम नहीं मिल सका, जिसके बाद उन्होंने रेफरी का फिल्ड चुना. इस क्षेत्र में बहुत मेहनत भी की जिसकी वजह से कई सालों तक देश के अलग-अलग प्रदेशों में इन्होंने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया और सूरजपुर को एक पहचान दिलाई.

वर्ष 2015 में म्यांमार में हो रहे एशियन गेम्स में इनको भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला. इनका बॉलीबॉल रेफरी के लिए चयन हुआ था आज गौस वेग ने सूरजपुर ही नहीं बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है.

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First published: August 26, 2017, 7:35 PM IST
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