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असहिष्णुता और जेएनयू कांड पर वाजपेयी संसद में होते तो क्या बोलते?

असहिष्णुता और जेएनयू कांड पर वाजपेयी संसद में होते तो क्या बोलते?

असहिष्णुता, रोहित वेमुला आत्महत्या, जेनएयू कांड और उसके बाद हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के बीच पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भाषण से नेताओं को बहुत कुछ सीखने की जरूरत है.

  • Pradesh18
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    आज के दौर में हमें पूर्व प्रधानमंक्षी और भारतीय राजनीत के अजातशत्रु कहे जाने अटल बिहारी वाजपेयी का ये भाषण आज भी उतना ही प्रासंगिक है. वाजपेयी आज खामोश हैं. वो भीष्म पितामह की तरह शैया पर पड़े भारतीय राजनीति की दुर्दशा देख रहे हैं. लेकिन आज के नेताओं को उनसे जरूर सीखना होगा कि उन्होंने 50 साल से ज्यादा विपक्ष में रहते हुए उन ऊंचाइयों को छुआ जहां तक शायद ही आज का कोई नेता पहुंच पाएगा.

    असहिष्णुता, रोहित वेमुला आत्महत्या, जेनएयू कांड और उसके बाद हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन ने पूरे देश के सामाजिक ताने-बाने को हिला कर रख दिया है. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये है कि आज कोई नेता ऐसा नहीं है जो पूरे देश से कह सके कि हम एक देश के तौर पर एक हैं और हमें अपने बारे में सोचने के बजाए देश के हित में सोचना चाहिए.

    हर पार्टी, हर नेता इन मुद्दों पर अपनी रोटियां सेंक रहा है. संसद भी आज उस स्थिति में नहीं है कि एक सुर से सही देश हित पर फैसला करे. लेकिन ऐसा नहीं है कि भारतीय राजनीति पहली बार इस तरह के दौर से गुजर रही है.

    इससे पहले भी देश ने कई खराब दौर देखे हैं लेकिन उस समय के नेताओं ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली और सही गलत का फैसला बिना किसी भेदभाव और वोट बैंक की राजनीति से इतर जाकर किया है.

     

    Tags: Jnu, कोरबा, छत्तीसगढ़

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