छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: घुरूवा के दिन बहुरिस जय जोहार

सत्ता के सुंदर सुंदर दूकान चलत हे. नवा छत्तीसगढ़ के बीन बजत हे व्यवस्था पगुरावत हे. भइंस पगुरावत हे.
सत्ता के सुंदर सुंदर दूकान चलत हे. नवा छत्तीसगढ़ के बीन बजत हे व्यवस्था पगुरावत हे. भइंस पगुरावत हे.

छत्तीसगढ़ म कहावत हे – ‘घुरूआ के दिन बहुरथे. ’इहाँ राजनीति म दिन बहुरगे. छोटे नेता हाईकमान के खडाऊ पहिनके बड़े होगें. कतको झन जेन दुसर के गोड़ म खड़े रिहिन तउन अपन गोड़ म खड़े होगें. सत्ता के सुंदर सुंदर दूकान चलत हे. नवा छत्तीसगढ़ के बीन बजत हे व्यवस्था पगुरावत हे.

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  • Last Updated: October 1, 2020, 10:03 AM IST
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बरीलाल, लालबुझक्कड़ अउ गोबरदास ठग विद्या के प्रोफेसर लगत हे. तीनों बइठे बइठे घाम म देह सेंकत हें.  खबरीलाल किहिस- ‘कोरोनाकाल ठग मन के सुवर्णकाल (स्वर्णकाल) कस होगे.  ठग विद्या बड़े विद्या आय. ये विद्या के शिक्षा स्कूल-कालेज म नइ दे जाय. एखर कोनो डिग्री कोर्स नइ होय. काम शुरू करे बर न कोनो रकम लगे न कोनो प्रमाण–पत्र के जरूवत. जब चाहे अपन धंधा शुरू कर लेव. आत्म–निर्भर हो जाव. ’गोबरदास खबरीलाल के बात सुन के अकबकागे. आज गियान के नवा अध्याय शुरू होइस.

गोबरदास आगू बढ़ के गोठियइस वो किहिस- ‘ठग विद्या के डंका हमर पूरा देश म बाजत हे. ठग छेल्ला हें. उन अपन-अपन ढंग ले जाल बिछावत रहिथें. कब कोन ल बात-बात म ठग लिहिं कोनो नइ जानय.  छोटे ठग, बड़े ठग बहुत बड़े ठग तरह तरह हवें. ठग बाजार गुलजार हे. ’खबरीलाल हाँसिस अउ किहिस–‘हर पेशा म ठग हें. सरकारी ठग, गैर सरकारी ठग. राजनीतिक ठग गैरराजनीतिक ठग सम्माननीय हें. कोनो जगा अइसे नइ हे जिहां ठग मन के जोर-शोर न हो. दल अउ,दलाल न हों. ये सर्वव्यापी हें. निराकार-साकार रूप में व्याप्त हें.

खतरनाक वायरस आंय. एखर मन ले छै गज के दूरी बने. इन खेल खेल म ठगत बरगलावत रहिथें. ’खबरीलाल के ठग-विद्या प्रवचन सुन के गोबरदास किहिस – ‘तहूँ ह बड़ गियानिक होगे भई. गियान के बिना जग अंधियार होथे.’ खबरीलाल किहिस- ‘ठग-ठग के खेल खेलत–खेलत उन नटवरलाल बन जथें. ठगी के होनहार स्टार-प्लेयर अइसने बनथें. बड़े-बड़े धोखाधड़ी करके नवा ठगी-काण्ड रचथें.’



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गोबरदास,खबरीलाल अउ लालबुझक्कड़ N-95  नाकमुंहतोपनी (मास्क)लगाय हें. लालबुझक्कड़ ठग विद्या के चरचा ल आगू बढ़इस किहिस- ‘ठग विद्या ल सरकारी मान्यता के मोह नइ हे. प्रमाण-पत्र के बिना येखर जोर-शोर हे.  राजनीति म ठग विद्या के मायाजाल फइले हे. राजनीति के धंधा करइया मन सच ल झूठ अउ झूठ ल सच करके जनता ल ठगत रहिथें. राजनीति म सच के संजीवनी विद्या के कला कोनो-कोनो ल आथे. ’खबरीलाल किहिस-‘माया के मोह म ठगी होथे. मनखे ह का ठगही ? माया ह ठगवाथे.

आजकल माया नगरी मुंबई के माया अउ ओखर छाया के ठगी दिखत हे. बालीवुड नशा म तउरत हे. राजनीति म हाई वोल्टेज ठगी के शानदार चलन हे. नेता मन मीठ बोल-बोल के कलात्मक से ठगाई करथें. कुरसी महाठगिनी होथे.   अब का कर लेबे. ’लालबुझक्कड़ किहिस- ‘राजनीतिक ठगी दिखथे कम. अउ दिखगे त लुका जथे. बड़े–बड़े महारथी एखर रिसर्च म भिड़े रहिथें. पहाड़ खोद लेव फेर मुसुवा मिलना कठिन होथे. अउ मिलिगे त मुसुवा ल मुसुवा सिद्ध करना टेढ़ी खीर होथें. खीर चटा जथे.

’खबरीलाल किहिस- ‘आजकल बड़े रकम के ठगी करइया मन के मान हे. बेंक म चतुरा सेंध लगाथें. हजारों करोड़ साफ़ कर देथें. एक दु झन के नाम ल का गिनाबे इहाँ त कतको माल्या,कतको नीरव मोदी हें. जेन बैंक के नोट साफ़ करेच बर ये धरती म जनमें हें. देश–विदेश म खूब नाम कमाथें. जिनगी के मजा लेथें. सरकार कतको झन ल पकड़ पाथे अउ कतको झन बांबर मछरी कस छलंड जथे. ठग मन चोर पुलिस के सुंदर मनोरंजक खेल खेलत रहिथें.’

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गोबरदास किहिस- ‘ठग लीला अपार हे. सायबर ठग मन इंटरनेट के गोदी म खेलत–खेलत गोलमाल करत आत हें.   उनकर ‘अच्छे –दिन’ अच्छा महीना अउ अच्छा साल चलत हे. बैंक के सुरक्षा म इन सेंध लगाय के सूत्र निकाल डरथे हें. जेखर खरा कमई के पइसा बैंक म जमा हे तेखर मन के पारा चढत–उतरत रहिथे. आजकल मुहावरा होगे हे सरकारी पइसा माने खाय के पइसा. ईमानदारी टिमटिमावत हे. बैंक तरह –तरह के करजा देवत हे. अब लोन लेवइया मन लोन के रकम ल खाय-उड़ाय के पइसा समझथें.

उनकर सोच होथे चुनाव के तीर सरकार करजा माफी करबे करही ये विशवास ज़िंदा हे. ’खबरीलाल किहिस- ‘ठग विद्या अथाह हे. जेन खा-पी के सुते हें उन मस्त हें. जेन जागत हें तेंन दुखी हें. छल म बल हे अउ बल म छल. बाजार म ठगाय बिना चेत नइ चढ़े. सबे दिन एक समान नइ होय. छत्तीसगढ़ म कहावत हे – ‘घुरूआ के दिन बहुरथे. ’इहाँ राजनीति म दिन बहुरगे. छोटे नेता हाईकमान के खडाऊ पहिन के बड़े होगें. कतको झन जेन दुसर के गोड़ म खड़े रिहिन तउन अपन गोड़ म खड़े होगें.

सत्ता के सुंदर सुंदर दूकान चलत हे. नवा छत्तीसगढ़ के बीन बजत हे व्यवस्था पगुरावत हे. भइंस पगुरावत हे.’ गोबरदास किहिस- ‘हमर चारों खुंट ठग हें. ठगाना हमर कर्तव्य होगे. सबे किसम के ठग दिन-रात एक करके अपन–अपन विद्या म नवा–नवा शोध करत हें. नवा-नवा ढंग ले ठगी करे के सूत्र निकालत हें. जय हो ठग विद्या, जय जोहार.
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